टुडे न्यूज़संपादकीय

संघर्ष की भट्ठी में तपकर हरियाणा के जनप्रिय नेता बने कुलदीप बिश्नोई

Hisar Today

राजनीति के मायने बदलने के नारे के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले मेरे पिता कुलदीप बिश्नोई लगभग दो दशकों तक राजनीतिक उतार चढ़ाव देखने के बाद भी आज तक अपने उसी नारे पर अडिग हैं और संघर्ष, सच्चाई व राजनीतिक ईमानदारी के बल पर प्रदेश की राजनीति में नए आयाम स्थापित करते जा रहे हैं। पिता जी ने एक ऐसे असाधारण राजनेता के रूप में अपनी राजनीति में रहकर भी ईमानदार राजनेता की अपनी अलग छवि जनता के बीच बनाई है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भजनलाल की लंबी चौड़ी राजनीतिक व सामाजिक विरासत संभाल रहे पिता जी ने पिछले 20 वर्षों के राजनीतिक सफर में अपने ऊपर कोई दाग नहीं लगने दिया। उन्होंने 2007 में क्षेत्रीय नेतृत्व से मतभेद के चलते अलग पार्टी बनाकर लंबा संघर्ष प्रदेश की राजनीति में किया और भाजपा ने अगर उनको पिछले चुनावों में ऐन वक्त पर धोखा नहीं दिया होता तो वे आज हरियाणा के मुख्यमंत्री होते।

मौकापरस्तों व स्वार्थी लोगों के कारण उनको अपने राजनीतिक सफर में कदम-कदम पर धोखे मिले, परंतु जनता के हित के लिए उन्होंने कभी भी संघर्ष से कदम पीछे नहीं खिंचा। 5 मार्च 2010 को चंडीगढ़ में पुलिस की लाठियां अपने सीने पर खाने की बात हो, जनता की दुख तकलीफें जानने के लिए पूरे प्रदेश में स्वयं टै्रक्टर चलाकर टै्रक्टर यात्रा करने की बात हो, लोकसभा चुनावों से ठीक पहले 54 दिनों की ऐतिहासिक रथ यात्रा के माध्यम से प्रदेश के 3228 गांवों, सभी शहरों, 90 हलकों का दौरा करने की बात हो, धरने, प्रदर्शनों के माध्यम से उन्होंने आम आदमी के हितों की आवाज बुलंद की है। आज जबकि ऐसे समय में जब लोग गांव की सरपंची तक छोडऩे को तैयार नहीं होते, पिता जी ने जनता के हित के लिए बड़े-बड़े पदोंकेन्द्र में मंत्री पद, प्रदेश में उपमुख्यमंत्री पद समेत अनेक बड़े पदों व लालचों का त्याग कर संघर्ष के बल पर जनहित की लड़ाई लड़ी, जिस कारण आज हर जागरूक हरियाणवी के दिल में उनके लिए सम्मान है।

पिता जी की युवा, शिक्षित, निर्भीक, जुझारू और आदर्श राजनेता के रुप में साफ-सुथरी छवि ने उन्हें हरियाणा की राजनीति में प्रसिद्धि दिलायी है। उनकी ईमानदार, उदार, स्पष्टवादी कार्यशैली जिससे उनके धीरज और शौर्य की झलक मिलती है, एक विशिष्ट राजनीतिक शैली की परिचायक है, जो बड़े मुखर और प्रभावपूर्ण ढंग से सिखाती है कि राजनीति के इस नये युग में नई पीढ़ी के नेताओं को नेतृत्व के लिए किस प्रकार से आगे बढऩा चाहिए। अपनी निष्कलंक राजनीतिक-यात्रा में उन्होंने अब तक तीन विधानसभा और दो लोकसभा चुनावों में सफलता प्राप्त की है।

उनकी इन चुनावी जीतों ने उन्हें हरियाणा के एक कद्दावर, जुझारू नेता के रूप में स्थापित किया है। 2009 के विधानसभा चुनावों के बाद अपने 5 विधायकों द्वारा साथ छोड़ दिए जाने के बाद इस नेता ने अपने राजनीतिक मूल्यों से समझौता नहीं किया और फिर से संघर्ष की कठिन भरी राह पर निकलते हुए पूरे प्रदेश में टै्रक्टर यात्रा करके जनता से सीधे संवाद किया। चंडीगढ़ में कार्यकर्ताओं के साथ स्वयं पुलिस की लाठियां खाकर अपने अडिग लक्ष्यों व मजबूत राजनेता का परिचय उन्होंने दिया। अपने संघर्ष व उच्च राजनीतिक मूल्यों की बदौलत वे फिर से अपनी पार्टी को खड़ा करने में कामयाब हुए, जिस कारण भाजपा को उनके साथ गठबंधन करने के लिए मजबूर होना पड़ा और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लालकृष्ण आडवाणी, नीतिन गडकरी, राजनाथ सिंह, अरूण जेटली, सुषमा स्वराज सहित तमाम भाजपा दिग्गजों ने 2011 से 2014 विधानसभा से पूर्व तीन सालों तक उनको ही हरियाणा में नेतृत्व माना।

ये अलग बात है कि ही लोकसभा चुनावों की अपार सफलता के बाद भाजपा गठबंधन की शर्तों से मुकर गई, मगर चुनावों से ठीक पहले नुकसान का अंदेशा होने के बावजूद पिता जी ने अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। भाजपा के सामने नहीं झुके और 2014 विस चुनाव में उतरे। विपरित परिस्थितियों के बावजूद स्वयं को तीसरी बार और माता जी रेनुका बिश्नोई को दूसरी बार विधानसभा में पहुंचाने में सफल रहे। लगातार संघर्ष के रास्ते पर चलते हुए वे आज अपनी मूल पार्टी कांग्रेस में हैं और राहुल गांधी के सबसे विश्वस्त साथियों में उनकी गिनती होती है। रैलियों के मामले में पिता जी से बेहतर नेता शायद ही प्रदेश में कोई हो। फिर चाहे रैली में भीड़ जुटाने की बात हो, या फिर भीड़ को व्यवस्थित करने की, उनकी मैनेजमेंट ने हमेशा विपक्षियों की भी सराहना पाई है। 2007 की रोहतक रैली भीड़ के लिहाज से प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में आज तक मील का पत्थर मानी जाती है। भाजपा से गठबंधन के दौरान उन्होंने सिरसा में चौटाला हाऊस के सामने एक शानदार रैली की थी जिसमें लाखों की तादाद में लोग पहुंचे थे। इसी तरह 2013 में हिसार में उन्होंने जबरदस्त रैली का आयोजन किया था।

1998 में आदमपुर से उपचुनाव जीतकर वे पहली बार विधायक बने, 2004 में भिवानी लोकसभा सीट से सुरेंद्र सिंह और अजय चौटाला जैसे दिग्गजों को हराकर पहली बार सांसद बने, 2009 में आदमपुर विधानसभा सीट से वे दूसरी बार विधायक बने, 2011 में मेरे दादा जी भजनलाल के निधन के पश्चात हिसार लोकसभा सीट से उपचुनाव जीतकर दूसरी बार लोकसभा पहुंचे। 2014 में फिर आदमपुर से तीसरी बार विधायक बने। लगातार संघर्ष में कइयों से उनको धोखा मिला।

2004 में चौ. भजनलाल के नेतृत्व में बंपर सीटें आई लेकिन सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बना दिया गया। अपनी अलग पार्टी हजकां बनाई, छह विधायक भी जीते, लेकिन पांच विधायक धोखा दे गए। उसके बाद बहुजन समाज पार्टी ने समझौता किया, लेकिन 2009 चुनाव से ऐन पहले बसपा ने समझौता तोड़ा। बीजेपी ने पिता जी को सीएम बनाने की रजामंदी पर समझौता किया, लेकिन मोदी सरकार आते ही मुकर गई। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद हरियाणा में भी दस साल की कांग्रेस सरकार की विदाई हो गई। जिसके चलते लगातार प्रदेश में कांग्रेस का जनाधार घटने लगा। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पिता जी का संपर्क शुरु हुआ और वे कांग्रेस में शामिल हुए। तबसे पिता जी राहुल गांधी की टीम के अहम सदस्य हैं और इसका सबूत तब देखने को मिला जब राहुल गांधी ने पूरे देश से 50 अपने सबसे विश्वस्त साथियों की केन्द्रीय टीम बनाई तो उसमें पिता जी को भी शामिल किया। कांग्रेस की केन्द्रीय कार्यसमिति में इतनी जल्दी जगह बनाने वाले वे शायद अकेले नेता हैं।

राजनीति जनसेवा का सर्वोत्तम पथ है, कहने में तो यह वाक्य बहुत आसान है और भारत के लगभग हर राजनेता या राजनीतिज्ञ ने अपने संबोधन में इस वाक्य का प्रयोग जरूर किया होगा, परंतु कोई विरला ही होता है जो इस वाक्य को अपने जीवन और कार्यशैली में उतार कर सच्चा नेता और जनसेवक बन पाता है। पिछले लगभग तीन दशकों से नेताओं ने अपनी करतूतों के बल पर खादी की साख को तार-तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन यह भी सच्चाई है कि आज भी कुछ राजनीतिज्ञ अपनी सोच और कार्यों के बल पर इस गंदगी के माहौल में भी अपनी महक बिखेर रहे हैं। हरियाणा के साफ छवि के नेता पिता जी ने एक के बाद एक अपनी नि:स्वार्थ भाव से जनसेवा के कार्यों व अपनी सोच के बलबूते अपने आपको विरले राजनेताओं की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया। राजनीति से इतर उन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए प्रदेशवासियों के हित में अपने कार्यों से अपनी अनूठी व जनहितैषी सोच को दर्शाया।

लोगों की सुरक्षा के लिए अपने निजी खर्च पर हिसार लोकसभा क्षेत्र के संवदेनशील स्थानों जैसे बाजारों, चौक व चौराहों पर आधुनिक क्लोज सर्किट कैमरे लगवाना उनका ऐतिहासिक कदम था, क्योंकि वे देश के पहले ऐसे सांसद थे, जिन्होंने लोगों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए। अपने सामाजिक दायित्व को आगे बढ़ाते हुए कुलदीप अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था स्टार की को हरियाणा में लेकर आए और हिसार के बाद 29 मार्च 2013 को करनाल में चार दिवसीय प्रदेश स्तरीय नि:शुल्क हियरिंग मशीन वितरण कैंप का आयोजन किया। हिसार में लगाए गए कैंप के दौरान जहां करीब 2 हजार लोगों को 3 करोड़ रूपए की अत्याधुनिक फ्री मशीनें बांटी गई, वहीं करनाल में लगे कैंप में राज्य भर से आए करीब 10 हजार बहरे व कम सुनने वाले लोगों को करीब 26करोड़ रूपए की मशीनें बांटकर उनके जीवन में पसरे सन्नाटे का अंत करवाकर कुलदीप बिश्नोई ने सीधे लोगों के दिलों में दस्तक दी।

2013 में करनाल में लगाए गए नि:शुल्क हियरिंग मशीन वितरण कैंप में उन्होंने पूरे हरियाणा को एक नजर से देखने की अपनी सोच को दर्शाते हुए राज्य के सभी 90 हलकों की सभी जातियों से संबंध रखने वाले बहरे व कम सुनने वाले लोगों को बुलाया। समाजसेवा की भावना पिता जी को संस्कारों में ही मिली है। जिस तरह से स्व. दादा जी चौ. भजनलाल सदा लोगों की दुख, तकलीफों में उनके बीच नजर आते थे, उनसे भी बढ़कर उन्होंने ऐतिहासिक फैसलों से राजनीति के मायने ही तो बदले। शायद यही कारण है कि मुश्किल से मुश्किल राजनीतिक परिस्थितियों से भी संघर्ष के सहारे बाहर निकलकर एक विरले, आधुनिक व कुशल राजनेता के रूप में वे अपने प्रशंसको द्वारा दिए गए उपनाम शेर-ए-हरियाणा को सार्थक कर रहे हैं।

मेरे दादा जी स्व. भजनलाल का राजनीति के साथ-साथ सामाजिक दायरा भी बहुत लंबा चौड़ा था। विभिन्न पदों पर रहते हुए दादा जी ने बिश्नोई समाज के उत्थान के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में फैला बिश्नोई समाज उनको आज भी भगवान की तरह पूजता है। दादा जी के स्वर्गवास के बाद बिश्नोई समाज ने पिता जी को बिश्नोई समाज के सर्वेसर्वा की जिम्मेदारी सौंपी और उन्हें अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा का संरक्षक नियुक्त किया। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के संरक्षक होने के नाते पिता जी राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में बिश्नोई समाज के सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते हैं और अपने दादा जी की तरह ही समाज के उत्थान की दिशा में प्रयासरत हैं। बिश्नोई समाज ने पिता जी में चौ. भजनलाल वाली दूरदर्शिता की एक झलक उस वक्त देखी जब अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर उन्होंने सभी को साथ लेकर चलते हुए राजस्थान के हीराराम भंवाल जैसे अनुभवी, बेदाग व्यक्तित्व वाले व्यक्ति को यह जिम्मेवारी सौंपी। उनके इस निर्णय की बिश्नोई समाज ने चहुं और सराहना की।

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