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विपक्ष एक नहीं हुआ तो फिर से सत्ता में आएगी मोदी सरकार

Hisar Today

देश 17वें लोकसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने 4 साल पूरे कर लिए हैं। एक साल बाद भारत एक बार फिर लोकसभा चुनाव के लिए तैयार होगा लेकिन उससे पहले सी वोटर सर्वे के जरिए चुनाव के पहले देश का मूड जानने की कोशिश की गयी। नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में एनडीए ने 543 लोकसभा सीट में कुल 336 सीट हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया। इस सर्वे में महाराष्ट्र में सबसे बड़ा झटका शिवसेना को लगता दिख रहा है जबकि बीजेपी का बड़ा फायदा होता दिख रहा है। बता दे की 2014 के चुनाव में एनडीए ने राज्य के 51 प्रतिशत वोट अपने नाम किए जिसमें बीजेपी को 27 और सहयोगी शिवसेना को 24 प्रतिशत वोट मिले।

बीजेपी ने जहां 24 सीट अपने नाम किए वहीं शिवसेना के खाते में 20 सीट आए। वहीं दूसरी तरफ यूपीए (कांग्रेस और एनसीपी) को 35 प्रतिशत वोट मिले जिसमें कांग्रेस के खाते में 19 प्रतिशत वोट शेयर आए तो एनसीपी के खाते में 16 प्रतिशत। अन्य ने 14 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। बदलते समय के साथ महारष्ट्र में एनडीए का समीकरण भी बदला है। गाहे बगाहे कई बार शिवसेना ने एनडीए से अलग होने की बात कही है। इसका असर 2019 लोकसभा पर भी पड़ता दिख रहा है। सर्वे के मुताबिक एनडीए को 3 प्रतिशत वोट शेयर का घाटा दिख रहा है लेकिन बीजेपी फायदे में है। जबकि बहुचर्चित कार्वी इनसाइट्स-इंडिया टुडे के सर्वेक्षण के मुताबिक़ अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल गठबंधन कर लें तो एनडीए को कड़ी चुनौती मिल सकती है।

सर्वे में 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहतर विकल्प से लेकर किस दल को कितनी सीट और गठबंधन जैसे विषयों पर सवाल किए गए थे। जिसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सर्वे में 46 फीसदी लोगों ने राहुल गांधी को मोदी का बेहतर विकल्प बताया है। जबकि ममता बनर्जी को 8 फीसदी तो वहीं अखिलेश यादव को 4 फीसदी लोगों ने मोदी का विकल्प माना है। सर्वे में यह भी पूछा गया कि 2019 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी में से कौन बेहतर है। 49 फीसदी लोगों ने मोदी को तो वहीं 27 फीसदी लोगों ने राहुल को इस पद के लिए बेहतर करार दिया। सर्वे में जब पूछा गया कि अगर अभी चुनाव करवा दिए जाएं तो किस दल को कितने प्रतिशत वोट हासिल होंगे। सर्वे के मुताबिक, एनडीए को 36 फीसदी, यूपीए को 31 फीसदी तो अन्य को 33 फीसदी वोट हासिल होंगे।

यानि कि एनडीए को 281, यूपीए को 122 तो अन्य को कुल 140 सीटों पर जीत हासिल होगी। इसका मतलब है कि भाजपा को 80 सीटों का नुकसान हो सकता है। सर्वे के मुताबिक, अगर 10 महीने बाद चुनाव होते हैं और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर 2019 की चुनावी जंग में उतरती है तो यूपीए को लोकसभा की कुल 543 सीटों में से कुल 242 सीटों पर जीत हासिल होगी जिसमें कांग्रेस द्वारा जीती गईं सीटों की संख्यां 97 होगी। वहीं अगर एनडीए, एआईएडीएमके और वाईएसआर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी तो इस गठबंधन को कुल 255 सीटें मिलेंगी जिसमें भाजपा द्वारा जीती गईं सीटों की संख्यां 196 होगी। जबकि अन्य दलों को कुल 46 सीटों पर जीत हासिल होगी। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल गठबंधन कर लें तो एनडीए को कड़ी चुनौती मिल सकती है।

इतना ही नहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में पहले हुए एक और ऑनलाइन सर्वे में अलग बात सामने आई है कि देश की जनता एक बार फिर से नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहती है। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) की ओर से किए गए इस सर्वे में करीब 48 फीसदी लोगों ने माना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही देश के एजेंडे को आगे ले जा सकते हैं। 55 दिनों तक चले इस ऑनलाइन सर्वे में देश के 712 जिलों के 57 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। कितने लोगों की पसंद बने राहुल गांधी राष्ट्रीय एजेंडा फोरम के तहत किए गए इस ऑनलाइन सर्वे में प्रशांत किशोर की संस्था आई-पीएसी ने लोगों के सामने चुनाव के लिए 923 नेताओं को नामित किया था। सर्वे के तहत 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए जहां 48 फीसदी वोटों के साथ नरेंद्र मोदी पहले स्थान पर रहे, तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस सर्वे में पिछड़ गए। केवल 11 फीसदी लोगों ने उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए वोट किया।

केजरीवाल, अखिलेश, मायावती को मिले कितने वोट इस सर्वे में नामित किए 923 नेताओं में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी शामिल किया गया था। 9.3 फीसदी मतों के साथ अरविंद केजरीवाल तीसरे स्थान पर रहे। प्रधानमंत्री पद के लिए बाकी नेताओं में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 7 फीसदी वोटों के साथ चौथे स्थान पर, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी 4.2 प्रतिशत वोटों के साथ पांचवें स्थान पर और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती 3.1 फीसदी मतों के साथ छठवें स्थान पर रहीं। किन मुद्दों के आधार पर हुआ सर्वे प्रधानमंत्री पद के लिए कराए गए इस ऑनलाइन सर्वे की सूची में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी और एनसीपी नेता शरद पवार समेत कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को रखा गया था। सर्वे के मुताबिक मतदान करने वाले लोगों ने महिला सशक्तिकरण, किसानों की समस्याएं, आर्थिक गैरबराबरी, छात्रों की समस्याएं, स्वास्थ्य और सुरक्षा शिक्षा, स्वच्छता, सांप्रदायिक एकता और बेसिक शिक्षा जैसे मुद्दों के आधार पर नेताओं का चयन किया।

वैसे इ वॉटर सर्वे में सबसे पहले सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश की बात करे तो अगर कांग्रेस-सपा-बसपा का गठबंधन होता है तो कुल 80 सीट में से एनडीए को 24 और कांग्रेस गठबंधन को 56 सीट मिलेगी। अगर कांग्रेस महागठबंधन में शामिल नहीं होती है तो ऐसी स्थिति में एनडीए को 36, समाजवादी और बसपा को 42 और अगर 2014 की तरह लड़े तो एनडीए को 70, कांग्रेस को 2, और अन्य के पाले में 8 सेट आएगी। बिहार का हाल पर नजर दाल तो अगर आज का गठबंधन चलता रहा तो कुल 40 सीट में से एनडीए को 31, यूपीए को 9 आएगी और अगर पासवान और उपेंद्र कुशवाह यूपीए में चले गए तो एनडीए को 22, और यूपीए को 18 सीट से संतोष करना पड़ेगा। मध्य प्रदेश की कुल 29 सीट में से एनडीए को 23 और यूपीए को 6 सीट मिलेगी। छत्तीसगढ़ में कुल 11 सीट में से एनडीए को 9 और यूपीए को 2सीट से संतोष करना पड़ेगा।

राजस्थान के रण में कुल 25 सीट में से एनडीए को 18, यूपीए को 7 सीट मिलेगी। जबकि महाराष्ट्र में समीकरण अगर एनसीपी-कांग्रेस साथ और बीजेपी शिवसेना अलग-अलग लड़ें तो कुल 48 सीटमें से यूपीए को 30, एनडीए को 16 और शिवसेना को 2 सीट मिलेगी। वैसे अगर कांग्रेस-एनसीपी और बीजेपी-शिवसेना साथ लड़ें तो कुल 48 सीट में से एनडीए को 36, यूपीए को 12 सीट मिलेगी सब अलग-अलग लड़ें तो बीजेपी को 22, शिवसेना- 7, कांग्रेस-11 और एनसीपी को 8 सीट प्राप्त होगी। वही ओडिशा की कुल 21 सीट में से बीजेपी-13, बीजेडी-6 और कांग्रेस को 2 सीट मिलेगी। नॉर्थ-ईस्ट में पूर्वोत्तर – असम, अरुणाचल, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा में कुल 25 सीट में से एनडीए- 18, यूपीए -6और अन्य के कहते में 1 सीट जायेगी। पंजाब का कैप्टन कौन होगा इसकी चर्चा करे तो कुल 13 सीट में से यूपीए- 12 और एनडीए को 1 सीट मिलेगी। हरियाणा किसके खाते में जायेगा पर चर्चा चले तो कुल 10 सीटमें से सर्वे के अनुसार यूपीए- 3, एनडीए- 6 और अन्य के कहते में 1 सीट आएगी। दिल्ली में एनडीए- 7 और यूपीए को 0 मिलेगी।

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