टुडे न्यूज़संपादकीय

वार्ता विफल, पाकिस्तानी मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया

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जब से भारत ने पाकिस्तान के साथ विदेश मंत्री स्तर की बातचीत रद्द क्या कर दी उसके बाद पाकिस्तानी मीडिया ने भारत की आलोचना करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के एक अखबार ने कहा है, कि ‘भारत अपनी आदत के मुताबिक डंक मारेगा ही।’ भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की मुलाकात को रद्द करने का भारत का फैसला इन दिनों पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में छाया हुआ है। इस फैसले ने पाकिस्तानी अखबारों को भारत के खिलाफ अपनी नफरत और जहर उगलने का एक और मौका दे दिया है। कई अखबारों ने भारत पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए लिखा है कि उसने शांति का एक और मौका गंवा दिया है। पाकिस्तानी मीडिया ने अपनी आदत के मुताबिक आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की जायज आपत्तियों पर ध्यान दिए बिना कश्मीर मुद्दे पर पुराना राग अलापा है। कई अखबार भारत के फैसले की वजह अगले साल होने वाले चुनावों को बता रहे हैं, तो कोई इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने की भारत कि कोशिश बता रहा हैं।

‘औसाफ’ लिखता है कि विदेश मंत्रियों की मुलाकात से बर्फ पिघलने की उम्मीद थी। लेकिन इस मुलाकात पर भारत के इकरार के बाद इनकार से शांति का एक और अवसर बेकार चला गया। अखबार कहता है कि भारत ने अपनी हठधर्मिता से दुनिया को संदेश दिया है कि वह अमन नहीं चाहता। अखबार कहता है कि पाकिस्तान ने कश्मीर में बीएसएफ जवानों की मौत के मामले की साझा जांच की पेशकश की, लेकिन इसकी बात ही नहीं कर रहा है। अखबार लिखता है कि विदेश मंत्रियों की मुलाकात रद्द करने के भारत के फैसले से दुनिया में पाकिस्तान की साख बेहतर होगी। क्योंकि पाकिस्तान आज शांति की तरफ खड़ा है और भारत शांति की कोशिशों को नाकाम बना रहा है।

रोजनामा ‘दुनिया’ ने अपने संपादकीय में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के इस ट्वीट को प्रमुखता दी है जिसमें उन्होंने भारतीय नेतृत्व की तुलना बड़े पदों पर बैठे छोटे लोगों से की है। अखबार लिखता है कि भारत में अगले साल अप्रैल या मई में चुनाव होने हैं, ऐसे में बीजेपी की सरकार पाकिस्तान के साथ रिश्ते बेहतर करके पाकिस्तान विरोधी अपने चुनावी नारे को छोड़ने को तैयार नहीं है। अखबार के मुताबिक, हो सकता है कि जैसे जैसे चुनाव नजदीक आएं, पाकिस्तान के साथ ऐसे बर्ताव को और बढ़ावा दिया जाए। अखबार की राय में, पाकिस्तान को भारत के साथ बातचीत को लेकर बेताबी दिखाने की जरूरत नहीं है, बल्कि कोशिश की जाए कि भारत के हथकंडों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करें।

वहीं रोजनामा ‘पाकिस्तान’ ने इमरान खान को सलाह दी है कि वह भारत के साथ बातचीत का ख्याल पालने की बजाय देश की अंदरूनी समस्याओं को हल करने पर अपना ध्यान लगाएं। अखबार कहता है कि अगले चुनाव में अगर मोदी जीत गए तो हो सकता है कि बातचीत का कोई सिलसिला चल निकले और अगर मोदी चुनाव हार गए तो बातचीत फिर नई सरकार से ही होगी। अखबार की इमरान खान सरकार को सलाह है कि अब बातचीत को लेकर कोई गर्मजोशी न दिखाएं, क्योंकि अगर उसका जवाब भी ऐसा ही मिला तो यह समझदारी नहीं होगी। अखबार की राय में, इतने साल बातचीत के बिना निकल गए और कोई आसमान नहीं गिरा, इसलिए अगर चंद महीने या चंद साल और बातचीत नहीं होगी तो इसमें परेशानी क्या है।

रोजनामा ‘नवा ए वक्त’ लिखता है कि पाकिस्तान के साथ संबंध बिगाड़ना भारत की मजबूरी है ताकि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के लिए आवाज न उठा सके। अखबार कहता है कि पाकिस्तान को भारत के साथ रिश्तों को लेकर किसी खुशफहमी में रहने की जरूरत नहीं है क्योंकि ‘वह अपनी आदत के मुताबिक डंक मारेगा ही।’ अखबार कहता है कि पाकिस्तान को पूरी तैयारी के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेना चाहिए ताकि इस विश्व मंच पर कश्मीर में ढाए जा रहे जुल्मों को दुनिया के सामने लाया जा सके। अखबार ने इमरान खान सरकार को हिदायत दी है कि कश्मीर पर वह पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे सैद्धांतिक रुख में कोई कमजोरी न आने दे।

वही ‘जसारत’ ने लिखा है कि अमेरिका को खुश करने के चक्कर में भारत ने विदेश मंत्रियों की मुलाकात को रद्द किया है। अखबार लिखता है कि अमेरिका की चाकरी और चापलूसी के बावजूद पाकिस्तान को राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से लताड़ ही मिल रही है और पाकिस्तान पर हर रोज नई पाबंदियां लगाई जा रही हैं। अखबार की राय में, अमेरिका को खुश करने के लिए भारत भी पाकिस्तान से तनाव बढ़ा रहा है। साथ ही अखबार ने अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर का हवाला देते हुए लिखा है कि अमेरिका की दोस्ती दुश्मनी से ज्यादा खतरनाक होती है। अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान तो कब से यह दोस्ती भुगत रहा है, लेकिन भारत को यह बात समझने में जरा देर लगेगी।

यह मामला चर्चा में तब आया जब पाकिस्तान के नव-निर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खत लिखकर भारत-पाकिस्तान बातचीत दोबारा बहाल करने का आग्रह किया था। भारत ने इमरान खान के सुझाव को स्वीकार करते हुए घोषणा कर दी थी कि सितंबर के आखिरी हफ्ते में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के इतर भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी मुलाक़ात करेंगे। हालांकि भारतीय विदेश विभाग के प्रवक्ता रवीश कुमार ये साफ कर दिया था कि ये केवल मुलाकात होगी और इसे किसी भी हालत में भारत-पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता की शुरुआत नहीं कहा जा सकता। गौरतलब है कि 1998 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान से समग्र वार्ता की शुरुआत की थी जो कि 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के बाद से ही बंद है, क्योंकि उसके बाद से भारत ने समग्र वार्ता बहाल करने से इनकार कर दिया है। समग्र वार्ता न सही, केवल विदेश मंत्रियों की मुलाकात ही सही, लेकिन सिर्फ 24 घंटे के अंदर भारत ने प्रस्तावित बातचीत रद्द कर दी।

अखबार के अनुसार इमरान खान ने काफी सख्त लहजे का इस्तेमाल करते हुए ट्वीट किया है। उनका कहना था, “भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता बहाल करने के मेरे आग्रह पर भारत का घमंडी और नकारात्मक रुख देखकर मुझे बहुत निराशा हुई। मैंने अपनी ज़िंदगी में कई छोटे लोगों को ऊंचे पदों पर बैठे हुए देखा है, जिनमें मामले के बड़े अर्थ को देख पाने की समझ नहीं होती।’’ अखबार जंग के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी बातचीत रद्द किए जाने पर अपनी आपत्ति जताई है। कुरैशी का कहना था, “भारत-पाकिस्तान समस्या के समाधान से पूरे क्षेत्र को लाभ होगा। पाकिस्तान ने अच्छी नीयत के साथ बातचीत की पेशकश की थी लेकिन भारत के पीछे हटने पर अफ़सोस हुआ।’’

कुरैशी ने भारत पर हमला करते हुए कहा कि भारत ने राजनयिक तौर-तरीकों को भी रौंद डाला है जिसकी मिसाल नहीं मिलती। भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के उस बयान का भी पाकिस्तान के सभी अखबारों में जिक्र है जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान को दर्द महसूस कराने का समय आ गया है। अखबार जंग के अनुसार जनरल रावत ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भारतीय सेना की कार्रवाई में हमेशा ही सरप्राइज एलिमेंट होता है। अखबार जंग के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल अासिफ गफूर का कहना था, “जंग उस वक्त होती है जब कोई एक इसके लिए तैयार न हो। हम जंग के लिए हमेशा तैयार हैं। अगर ऐसा वक्त आया या किसी ने सब्र का इम्तिहान लिया तो कौम को मायूस नहीं होने देंगे।

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