राजनीतिसंपादकीय

वसुंधरा राजे बनाम कांग्रेस की जंग

Hisar Today

राजस्थान विधानसभा चुनाव में इस बार कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। यहां इतिहास बनाम इतिहास रचने की जंग है। यहां पिछले 20 सालों के इतिहास में सत्तासीन पार्टी लगातार दूसरी बार चुनकर नहीं आई है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस इतिहास को बदलना चाहती हैं लेकिन पार्टी की आंतरिक गुटबाजी और नए तेवर में आई कांग्रेस की चुनौतियों के बीच वह कितना सफल हो पाती हैं यह तो चुनाव नतीजे ही बताएंगे। बहरलहाल, भाजपा और कांग्रेस दोनों ने विधानसभा चुनाव जीतने के लिए चुनाव-प्रचार में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। साल 1998 से भाजपा और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता से चुनकर में आती रही हैं। राजस्थान की जनता ने लगातार दूसरी बार सत्ता की चाबी किसी भी दल को नहीं दी है। वह बारी-बारी से दोनों ही पार्टियों को मौका देती आई है। 2013 में जबर्दस्त प्रदर्शन करने वाली भाजपा के लिए इस बार हालात अनुकूल नहीं हैं। 2013 के चुनावों में उसने विधानसभा की 200 सीटों में से 163 सीटें जीती थीं। भाजपा को इस चुनाव में 46.05 प्रतिशत वोट मिले थे। यह राजस्थान के चुनावी इतिहास में किसी भी पार्टी का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन था लेकिन भाजपा अपने इस प्रदर्शन को उपचुनावों तक बरकरार नहीं रख पाई।

ये सभी जानते है कि गत फरवरी में हुए उपचुनावों में भाजपा को तगड़ा झटका लगा। लोकसभा की दो सीटों अलवर एवं अजमेर और विधानसभा मांदलगढ़ सीट पर हुए उपचुनावों में वह हार गई। ये तीनों सीटों भाजपा के पास थीं जिन पर कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया। उपचुनावों में भाजपा को मिली हार को वसुंधरा राजे की लोकप्रियता में आती कमी और पार्टी की आंतरिक गुटबाजी से जोड़कर देखा गया। इस हार से सबक लेते हुए भाजपा ने सांगठनिक स्तर पर बदलाव किए। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष बदला और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) एवं विधायक किरोड़ी लाल मीना को पार्टी में शामिल किया। मीना के कद और उनके प्रभाव को देखते हुए उन्हें अपने टिकट पर राज्यसभा पहुंचाया। मीना का पूर्वी राजस्थान के अनुसूचित जनजाति समुदाय में अच्छी पकड़ मानी जाती है। मीना साल 2008 में भाजपा से अलग हो गए थे और एनपीपी के टिकट पर 2013 में विधायक बने।

उपचुनावों में मिली जीत ने कांग्रेस में नई जान फूंकने का काम किया। सचिन पायलट की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं में आशा, उम्मीद की किरण जगी और उनमे नए जोश का संचार हुआ। इस जीत के तुरंत बाद कांग्रेस चुनावी रणनीति में जुट गई और उसने जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को सक्रिय और एकजुट करने के लिए ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’ कार्यक्रम की जोरदार शुरुआत भी की। हालांकि, उत्साह से सराबोर कांग्रेस की अपनी मुसीबत है। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भले ही यह कहें कि पार्टी एकजुट होकर विधानसभा की तैयारियों में जुटी है लेकिन यहां भी पार्टी आंतरिक गुटबाजी का शिकार है। पायलट और गहलोत के अपने-अपने गुट हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसी पर तंज कसते हुए सवाई माधोपुर में कहा था कि कांग्रेस के पास न तो नेता है और न नीति है।

राजस्थान में चुनाव तैयारियों को धार देने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं। वह अक्टूबर तक पांच बार से अधिक राज्य का दौरा कर चुके हैं और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से मिल चुके हैं। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल के दिनों में राज्य में रैलियां की हैं और राजे सरकार को कई मोर्चों पर घेरा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं को यह बताने की कोशिश की है कि प्रदेश नेतृत्व एकजुट होकर भाजपा को चुनौती दे रहा है। कांग्रेस को उम्मीद है कि परंपरा के अनुरूप जनता इस बार उसे मौका देगी और सत्ता विरोधी लहर उसके विजय अभियान को आगे बढ़ाएगी। वहीं, राज्य के चुनावी इतिहास को बदलने के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। उन्होंने पिछले दो महीनों में पूरे राज्य का दौरा किया है। अपनी ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ के तहत उन्होंने लोगों के साथ बैठकें कीं, अपनी सरकार की उपलब्धियों और जनहित की योजनाओं के बारे में जनता को बताया। राजे को उम्मीद है कि राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई योजनाओं जैसे कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, कौशल विकास, अन्नापूर्णा भंडार, बालिकाओं के लिए स्कूटर का वितरण और 15 लाख लोगों को रोजगार देने के उनके वादे का लाभ उन्हें चुनाव में मिलेगा।

राजे की इस यात्रा को कांग्रेस ने अपनी ‘संकल्प यात्रा’ से चुनौती दी। कांग्रेस के तीनों बड़े नेताओं सचिन पायलट, अशोक गहलोत और सीपी जोशी ने आरोप लगाया है कि राजे ने अपने वादों को पूरा नहीं किया। कांग्रेस का दावा है कि इस बार यदि वह सत्ता में चुनकर आती है तो वह प्रदेश के लिए बेहतरीन शासन देगी। कांग्रेस अपनी रैलियों में राजे पर निजी हमला करने के बजाय सरकार की नाकामियों को उजागर कर उस पर हमला बोल रही है और उसके इस दांव का असर जनता को प्रभावित करता भी दिख रहा है। बहरहाल, चुनावी रणभेरी बज चुकी है। राज्य की दोनों ही प्रमुख पार्टियां जीत का ताल ठोक रही हैं। राजस्थान का ‘चुनावी ऊंट’ कौन सी करवट लेता है यह देखने वाली बात होगी। वैसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी कोई को कसर नहीं छोड़ रहे। हाल में उन्होंने एक के बाद एक दौरे और सभा के दौरान भाजपा पर जबरदस्त हमला करते हुए उन्होंने उनके पसीने छुड़ा दिए है।

इन दिनों कांग्रेस ने अपनी ख़ास रणनीति के तहत मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को उनके घर में ही घेरने की रणनीति बनाई है। इसके तहत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अगल सप्ताह वसुंधरा राजे के गृह जिले धौलपुर से लेकर महुअा तक रोड शो करेंगे और फिर इस माह के मध्य में सीएम के राजनीतिक कार्यक्षेत्र झालावाड़ में आम लोगों के साथ संवाद करेंगे। वसुंधरा राजे धौलपुर के पूर्व राजपरिवार की महारानी हैं, वहीं एक बार विधायक भी रही हैं। वहीं, वे झालावाड़ से पांच बार सांसद रहने के बाद लगातार तीसरी बार विधायक बनी हैं। वर्तमान में उनके बेटे दुष्यंत सिंह झालावाड़ से सांसद हैं। कांग्रेस का मकसद वसुंधरा राजे को उनके ही घर में घेरना है। महुआ में दौसा जिले के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलने के बाद रात्रि विश्राम वहीं करेंगे और अगले दिन हेलीकॉप्टर से बीकानेर के लिए रवाना हो जाएंगे। बीकानेर में राहुल गांधी एक रैली को संबोधित करेंगे। बीकानेर में होने वाली रैली में कांग्रेस ने एक लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। राहुल गांधी बीकानेर शहर में भी रोड शो कर चुके है। मगर भाजपा ने कांग्रेस को मुंह जवाब देने की रणनीति बना ली है। राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कांग्रेस पर हर वर्ग को लड़ाने का काम करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर कांग्रेस सरकारें अपने शासन में विकास करतीं है तो यह प्रदेश कहां से कहां पहुंच गया होता।

राजे ने यहां तक कहा कि कांग्रेस ने 50 साल में कुछ भी काम नहीं किया। उन्होंने 50 साल बनाम 5 साल का हवाला देते हुए कहा कि अब राजस्थान की गाड़ी पटरी पर है इसलिए राजस्थान चल पड़ा है अब इसको रोकना नहीं है। राजस्थान अब हर क्षेत्र में अग्रणी बनता जा रहा है। 5 साल में बिजली के किसी भी तरीके का दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, घर-घर में बिजली पहुंचाई है और अब स्थिति यह है कि घरेलू बिजली कनेक्शन तुरंत ही दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने स्वयं कहा था कि जब केंद्र से 1 रुपए चलता है, तो जनता तक केवल 15 पैसे ही पहुंचते हैं और यही संस्कृति आज तक कांग्रेस में चलती आ रही है। कांग्रेस शासन में रोज-रोज भ्रष्टाचार की खबरें आती थीं। आज सभी को बैंक अकाउंट से जोड़ा गया है जितना भी सरकारी पैसा मिलता है वह सीधा उनके खाते में जाता है।

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