संपादकीय

राजनीति में परिवारवाद

राजनीति में अक्सर परिवार वाद की चर्चा होती रहती है। देश की जनता के मन में परिवार वाद के विरोध में आक्रोश तो रहता है मगर उसके उपरान्त भी देश की राजनीति में सैदव परिवार वाद फलता-फूलता रहा है। हमारे देश की राजनीति में परिवार वाद की शुरूआत करने में नेहरू परिवार को अग्रणी माना जाता रहा है। नेहरू परिवार जो बाद में गांधी नाम से जाना लाने लगा कि वर्तमान में पांचवी पीढ़ी राजनीति कर रही है।
नेहरू परिवार के पहले सदस्य पण्डित मोतीलाल नेहरू 1919 व 1928 में दो बार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उनके पुत्र पण्डित जवाहरलाल नेहरू आजादी के बाद बनी देश की प्रथम सरकार के प्रधानमंत्री बने। जवाहरलाल नेहरू कई बार कांग्रेस के अध्यक्ष व 17 वर्षो तक देश के प्रधानमंत्री रहे। मोतीलाल नेहरू की पुत्री विजयलक्ष्मी पण्डित आजादी से पूर्व बनी सरकार में मंत्री थी व 1953 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम महिला अध्यक्ष बनी। उन्होने राजदूत व राज्यपाल के पदो पर भी काम किया। मोतीलाल नेहरू की तीसरी पीढ़ी में उनकी पौत्री इन्दिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री व कांग्रेस की अध्यक्ष रही।
मोतीलाल नेहरू की चौथी पीढ़ी में इदिरा गांधी के पुत्र राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री व कांग्रेस अध्यक्ष रहें। इन्दिरा गांधी के दूसरे पुत्र संजय गांधी सांसद व कांग्रेस महासचिव रहे। राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी वर्षो कांग्रेस अध्यक्ष व कई बार सांसद बन चुकी है। संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी कई बार सांसद बनी व अभी भाजपा सरकार में मंत्री है। मोतीलाल नेहरू की पांचवी पीढ़ी में राजीव गांधी के पुत्र राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद हैं वहीं उनकी बहिन प्रियंका गांधी कांग्रेस की महासचिव है। संजय मेनका गांधी के पुत्र वरूण गांधी सांसद है।
कांग्रेस नेता कमलापति त्रिपाठी की चार पीढिय़ा राजनीति करती रही है। कमलापति त्रिपाठी खुद केन्द्र में रेल मंत्री व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उनके पुत्र लोकपति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश में मंत्री व पुत्रवधू चंदा त्रिपाठी सांसद रही। कमलापति के पौत्र राजेशपति व प्रपोत्र ललितेश पति विधायक रह चुके हैं। चौधरी देवीलाल हरियाण के मुख्यमंत्री व देश के उपप्रधानमंत्री रहे वहीं उनके बड़े पुत्र ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के मुख्यमंत्री, छोटे बेटे रणजीत सिंह सांसद रहें हैं। देवीलाल के पौत्र अजय,अभय सांसद, विधायक व पौत्र वधू नैना चौटाला विधायक है। देवीलाल के परिवार में चौथी पीढ़ी में उनके प्रपोत्र दुष्यंत चौटाला अभी सांसद है।
जम्मू कश्मीर में शेख अब्दुल्ला परिवार में तीन सदस्य मुख्यमंत्री रह चुके हैं। शेख अब्देल्ला स्वंय तो मुख्यमंत्री रहे ही उनके पुत्र फारूक अब्दुल्ला व पौत्र उमर अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस के बड़े नेता जगजीवन राम ताउम्र केन्द्र सरकार में मंत्री रहे। उनके पुत्र सुरेश राम विधायक रहें व पौत्री मेधावी कीर्ति हरियाणा सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। जगजीवन राम की पुत्री मीराकुमार केन्द्र सरकार में मंत्री व लोकसभा अध्यक्ष रह चुकी है। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री व केन्द्र में मंत्री रहे हेमवती नन्दन बहुगुणा देश के बड़े नेता थे। उनकी पत्नी कमला बहुगुणा सांसद रही थी। उनके पुत्र विजय बहुगुणा उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। बहुगुणा की तीसरी पीढ़ी में उनके पौत्र सौरभ बहुगुणा अभी उत्तराखण्ड में सितारगुज से विधायक हैं। हेमवती नन्दन बहुगुणा के दूसरे पुत्र शेखर बहुगुणा भी इलाहाबाद से 2012 में विधानसभा चुनाव लड़ कर हार गये थे। बहुगुणा की पुत्री रीता बहुगुणा जोशी अभी उत्तरप्रदेश की भाजपा सरकार में पर्यटन मंत्री है व आगामी लोकसभा चुनाव में प्रयागराज से भाजपा टिकट पर चुनाव लडऩे जा रही है। रीता बहुगुणा जोश भाजपा में आने से पहले महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
किसान नेता व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह की भी तीसरी पीढ़ी राजनीति में सक्रिय है। चौधरी चरणसिंह की पत्नी गायत्री देवी सांसद रही तो उनके पुत्र अजीत सिंह कई बार केन्द्र सरकार में मंत्री रहे। चरणसिंह के पौत्र जयन्त चौधरी सांसद रह चुके हैं। चरणसिंह की पुत्री ज्ञानवती दो बार विधायक रह चुकी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा खुद राजनीति में सक्रिय है व तुमकुर सीट से आगामी लोकसभा चुनाव लडऩे जा रहे हैं। उनका छोटा बेटा कुमारस्वामी कर्नाटक का मुख्यमंत्री व बड़ा बेटा एच डी रेवेन्ना कर्नाटक सरकार में मंत्री है। मुख्यमंत्री कुमार स्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी विधायक है। कुमार स्वामी का बेटा निखिल लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी है। उनके बड़े बेटे एच डी रेवेन्ना का बेटा प्रजव्वल अपने दादा की परम्परागत हासन सीट से लाकसभा चुनाव लडऩे जा रहा है। इस तरह देखे तो देवेगौड़ा का पूरा कुनबा राजनीती की मलाई खाने में लगा है।
उत्तरप्रदेश की समाजवादी पार्टी तो पूरी तरह से परिवारवादी पार्टी बनी हुयी है। समाजवादी पार्टी के पूर्व मुखिया मुलायमसिंह यादव सांसद है व आगामी लोकसभा चुनाव लडऩे जा रहे हैं। उनके पुत्र अखिलेश यादव मुख्यमंत्री व सांसद रह चुके है। पुत्र वधु डिम्पल यादव सांसद रही हैं। उनके भाई शिवपाल सिंह यादव उत्तर प्रदेश में मंत्री रहें हैं। उनके बड़ भाई रतनसिंह का पोता तेजप्रताप यादव सांसद है। उनके परिवार में दर्जनभर से भी अधिक सदस्य सांसद,विधायक व अन्य पदो पर काबिज है।
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के पुत्र सुरेन्द्र सिंह सांसद व मंत्री रहे तो दूसरे पुत्र रणबीर सिंह महेन्द्रा विधायक व भारतीय क्रिकेट कंटं्रोल बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। बंसीलाल की पुत्रवधू किरण चौधरी दिल्ली विधानसभा की उपाध्यक्ष व हरिणाण में मंत्री रही है। वे अभी हरियाणा में कांग्रेस विधायक दल की नेता है। बंसीलाल की पोती श्रुती चौधरी हरियाणा में सांसद रह चुकी हैं। राजस्थान के बड़े जाट नेता नाथूराम मिर्घा कई बार सांसद व केन्द्र सरकार में मंत्री रहे थे। उनके पुत्र भानुप्रताप मिर्धा नागौर से सांसद रहे व पोती ज्योति मिर्धा भी नागौर से पूर्व सांसद है तथा अब फिर से कांग्रेस टिकट पर मैदान में है।
परसराम मदेरणा राजस्थान सरकार में कई बार मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे हैं। उनके पुत्र महिपाल मदेरणा राजस्थान में मंत्री थे मगर भंवरीदेवी कांड के कारण जेल भेजे गये। मदेरणा की पोती दिव्या मदेरणा वर्तमान में विधायक है। मदेरणा की पुत्रवधू लीला मदेरणा जोधपुर की जिला प्रमुख रह चुकी है। हिमाचल प्रदेश के सुखराम हाल ही में कांग्रेस में घर वापसी कर चर्चा में हैं। वो प्रदेश व केन्द्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। नरसिंम्हाराव सरकार में जब वो संचार मंत्री थे तब उनके घर से बड़ी राशि बरामद होने के कारण उनको केन्द्रीय मंत्रीमंडल से हटाया गया था। उनके पुत्र अनिल शर्मा भाजपा की सरकार में मंत्री है व पूर्व में राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं। सुखराम मंडी से अपने पौत्र आश्रय शर्मा को कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़वाने जा रहे हैं।
राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पुत्र राजवीर सिंह अभी सांसद है व पूर्व में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। कल्याण सिंह के पौत्र संदीप सिंह उत्तरप्रदेश सरकार में मंत्री हैं। उमाशंकर दीक्षित कांग्रेस के बड़े नेता थे। वो तीन बार राज्यसभा सदस्य, इन्दिरा गांधी सरकार में मंत्री, कर्नाटक व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल व कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे थे। उनकी पुत्र वधू शीला दीक्षित अभी दिल्ली की कांग्रेस अध्यक्ष हैं। वो पूर्व में केन्द्र सरकार में मंत्री व तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी है। उमाशंकर दीक्षित के पौत्र संदीप दीक्षित दिल्ली से सांसद रह चुके हैं।
देश की राजनीति में परिवार वाद को आज सभी दलो के नेता बढ़ावा देने में लगे हैं। कोई भी राजनीतिक दल इससे अछूता नहीं है। परिवार के बढ़ते प्रचलन से राजनीति में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अनपे हक से महरूम होना पड़ता है। राजनीति में जब तक बढ़ते परिवारवाद पर लगाम नहीं लगेगी तब तक आम कार्यकर्ताओं के लिये मौके नहीं मिलेगें।

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