संपादकीय

राजनीति में कितने सफल खिलाड़ी!

कौन कहता है कि चुनाव में ग्लैमर हावी नहीं ? आज जब पार्टी को लगता है कि कोई सीट उसके लिए जितना मुश्किल है तो वह दांव लगाती है उन ग्लैमरस खिलाड़ियों पर जिसको देख उनको लगता है कि शायद उनके जितने की उम्मीद हो जाएगी। यानी कि वोटरों की फ़िक्र नहीं बस वोट के नाम पर चल रहा है यह खेल। राजनीति में खिलाड़ियों का आना कोई आज से नहीं बल्कि काफी समय से चल रहा है। यही कारण है कि जब लोकसभा चुनाव 2019 की बारी आयी तो इस चुनावी मौसम में राजनीति की तरफ तमाम क्षेत्रों की शख्सियतें आये दिन उतर रही हैं। हाल में जहां रंगीला व मस्त फेम उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस का हाथ थामा, वहीं चंद रोज पहले क्रिकेटर गौतम गंभीर बीजेपी में शामिल हुए। राजनीति में खेल जगत से लोगों को आना कोई नहीं बात नहीं है। विभिन्न दल जीत की उम्मीद में सिलेब्रिटीज और ग्लैमर वर्ल्ड के लोगों को उतारते रहे हैं। यूं तो अपने यहां तमाम क्षेत्रों से सिलेब्रिटीज आए, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा वर्चस्च फिल्मी कलाकारों और क्रिकेटर्स का रहा। उसकी एक बड़ी वजह अपने यहां इन दोनों के प्रति लोगों का बढ़ता क्रेज है।
वैसे मेरा मानना है कि राजनैतिक दलों द्वारा सिलेब्रिटीज पर दांव लगाने की सबसे बड़ी वजह समाज में उनके ग्लैमर और क्रेज को कैश कराना है। दरअसल, इन लोगों की अपनी फैन फाॅलोइंग होती है, लोग उन्हें नजदीक से देखना, सुनना और पास आना चाहते हैं, राजनैतिक दल लोगों की इसी मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए उन्हें मौका देते हैं। राजनैतिक दल इन सिलेब्रिटीज का दो तरह से इस्तेमाल करते हैं। कई बार वह अपने दल के प्रचार के लिए इन सिलेब्रिटीज का इस्तेमाल करते हैं तो ज्यादातर मौकों पर इन्हें चुनाव में उतारा जाता है। क्रिकेट और राजनीति का रिश्ता काफी पुराना है। कई बार ऐसा देखा गया है कि क्रिकेट के मैदान पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी राजनीति के मैदान पर भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। लेकिन कई बार अच्छे खिलाड़ियों ने भी राजनीति में अपना विकेट आसानी से गंवा दिया। टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज और रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की कप्तानी कर चुके प्रवीण कुमार समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। क्रिकेट के मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले प्रवीण कुमार राजनीति के मैदान में सफल हो पाएंगे या नहीं यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन प्रवीण कुमार राजनीति में जाने वाले पहले खिलाड़ी नहीं हैं। उनसे पहले भी कई खिलाड़ी राजनीति में हाथ आजमा चुके हैं, उनमें से कुछ सफल हुए और कुछ असफल। आइए डालते हैं एक नजर…
राजनीति में सफल होने वाले क्रिकेटरों में पहला नाम कीर्ति आज़ाद का आता है। भारत की तरफ से सिर्फ सात टेस्ट और 25 एकदिवसीय मैच खेलने वाले कीर्ति आज़ाद पिछले 23 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं। एक खिलाड़ी के रूप में कीर्ति जितनी कीर्ति नहीं कमा पाए उसे ज्यादा उन्होंने राजनीति में कमाई। कीर्ति आज़ाद 1993 से 1998 तक दिल्ली विधानसभा में बीजेपी के विधायक रहे। साल 1999 में दरभंगा लोकसभा सीट पर बीजेपी की तरफ से चुनाव लड़कर वह सांसद बने। इसके बाद 2009 और 2014 में इस चुनाव क्षेत्र से उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह कीर्ति आज़ाद एक बार विधान सभा चुनाव और तीन बार लोक सभा चुनाव जीत चुके है।
कीर्ति आज़ाद के बाद नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में सफल होने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज रहे सिद्धू राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी माने जाते हैं। वह पंजाब के अमृतसर सीट से तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद रहे। हाल ही में वह कांग्रेस की टिकट से पंजाब में चुनाव लड़ रहे है।
नाम आता है अगला लक्ष्मी रतन शुक्ल का। टीम इंडिया के पूर्व ऑल राउंडर लक्ष्मि रतन शुक्ल भी राजनीति के मैदान पर सफल होते हुए नज़र आए। इस साल वेस्ट बंगाल विधानसभा चुनाव में शुक्ल ने तृणमूल कांग्रेस की टिकट से विधानसभा चुनाव जीता था और अब पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री भी हैं।
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर राजनीति के मैदान पर काफी सेफ खेलते हुए नज़र आते हैं। वह 2013 से राज्यसभा के सांसद हैं। लेकिन वह खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखते हैं। साल 2014 में कांग्रेस उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहती थी लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया था। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले सचिन राज्यसभा के अंदर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। पिछले चार साल राज्यसभा में सचिन का अटेंडेंस सात प्रतिशत के करीब रहा।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान चेतन चौहान भी दो बार लोक सभा सांसद रह चुके हैं। वह 1991 और 1998 में अमरोहा लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में वह चुनाव जीत चुके हैं।एस.श्रीसंथ एस श्रीसंथ ने कुछ दिनों पहले भाजपा की सदस्यता ली थी और केरल के तिरुअनंतपुरम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए हार गए थे। क्रिकेट के मैदान पर कई बार शानदार गेंदबाज़ी करते हुए बल्लेबाज़ों पवेलियन लौटने वाले श्रीसंथ राजनीति के पिच अपना विकेट नहीं बचा पाए थे। टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद कैफ भी राजनीति मे विफल हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में मोहम्मद कैफ कांग्रेस की टिकट से उत्तर प्रदेश के फूलपुर सीट से चुनाव लड़ते हुए हार गए थे। वही पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अज़हरुद्दीन ने खेल का मैदान छोड़ा तो हार का सामना करना पड़ा। वह 2014 के लोकसभा चुनाव में हार गए थे। उनके हारने की सबसे बड़ी वजह थी अपना मैदान छोड़कर दूसरे मैदान पर खेलना। साल 2009 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद सीट से चुनाव जीतकर सांसद बनने वाले अज़हरुद्दीन 2014 में राजस्थान के टोंक सवाई माधोपुर सीट से चुनाव लड़े थे और हार गए। भारत के पूर्व खिलाड़ी और तेंदुलकर के दोस्त विनोद कांबली भी राजनीति के पिच पर फेल हो चुके हैं। उन्होंने 2009 में लोक भारती पार्टी की तरफ से महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव लड़ा था और हार गए थे। टीम इंडिया के पूर्व ऑल-राउंडर मनोज प्रभाकर भी राजनीति में सफल नहीं हो पाए। साल 1996 में मनोज प्रभाकर ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) से साउथ दिल्ली क्षेत्र से चुनाव लड़ते हुए बुरी तरह हार गए थे।
वैसे अगर देखा जाए यूं ताे तमाम दल इन सिलेब्रिटीज को मौका देते रहे हैं, लेकिन इनमें सबसे आगे कांग्रेस दिखाई देती रही है। कांग्रेस के बाद बीजेपी व दूसरे क्षेत्रीय दलों ने भी इस नक्शे कदम पर चलना शुरू कर दिया। जहां फ़िल्मी स्टार तो इस बार लोकसभा चुनाव 2019 में खेल जगत के हस्तियों ने भी चुनाव में उतरने का मन बनाकर चुनावी मैदान में उत्तर चुके है। इनमें सबसे पहला नाम आता है गौतम गंभीर का। आगामी चुनावों में भाजपा की तरफ से पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर को नई दिल्ली सीट से राजनीतिक मैदान में उतारा गया है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने दक्षिणी दिल्ली लोकसभा सीट से ओलंपिक पदक विजेता मुक्केबाज विजेंद्र सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि दक्षिणी दिल्ली से विजेंद्र उसके उम्मीदवार होंगे। इस सीट पर विजेंद्र का मुकाबला बीजेपी के रमेश बिधूड़ी और आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा से होगा। विजेंद्र ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीता था।
अगला नाम है योगेश्वर दत्त का। भारतीय कुश्ती जगत के जांबाज पहलवान और ऑलंपिक पदक विजेता योगेश्वर दत्त हरियाणा की सोनीपत लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर उतारने का सोच रही थी।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से योगेश्वर की मुलाकात के बाद से ही चर्चा और गर्म हो गयी थी। मगर इस बार भाजपा ने योगेश्वार को टिकट तो नहीं दी। मगर योगेश्वर की राजनीति में आने की इच्छा देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि जल्द ही योगेश्वार को हम आने वाले समय में चुनावी मैदान में देख सकेंगे। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके फुटबॉलर बाईचुंग भूटिया भी इस बार अपनी हमरो सिक्किम पार्टी के साथ मैदान में उतर रहे हैं। 11 अप्रैल को राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भूटिया ने एचएसपी के 7 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बाईचुंग भूटिया ने सिक्किम की जनता से वादा किया था कि वो आगामी चुनावों में अपनी पार्टी के माध्यम से नए चेहरों को सक्रिय राजनीति में आने का मौका देंगे।
वैसे खेलों की दुनिया से निकलकर कई खिलाड़ियों ने राजनीति का रुख किया और कामयाब भी रहे। अपने देश में तो वैसे कहावत भी है। यहां राजनीति में खेल और खेल में राजनीति जमकर होती है। इस बार भी लोकसभा चुनाव से पहले कई खिलाड़ियों के नाम सामने आ रहे हैं।

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