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रतनलाल कटारिया तुम्हारा फिर विरोध! कमाल है!

सुना था कि कल मौसम ने धोखा दिया और हमारे रतनलाल कटारिया का नसीब देखो राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके सभा स्थल पर प्रचार के लिए आ नहीं पाए। कोई कहता है कि टेंट उखड़ जाने की वजह से यह सब कुछ हुआ, जबकि जानकार बोलते हैं भीड़ नहीं जुटा पाए इसलिए अमित शाह नहीं आये। भाई खुदा जाने हकीकत। खैर मैं आज बात कर रहा हूं अपने भाजपा के अम्बाला लोकसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी रतनलाल कटारिया की। सुना है उनका वापस विरोध हुआ। भाई हो क्या रहा है भाजपा वालों के साथ। बोलते हैं बहुत विकास किया तो फिर विरोध क्यों हो रहा है?
सुना है इस बार उनका जैसा विरोध हुआ उससे दुबारा भाजपा की हालत खस्ता जताई जा रही है। अब रविवार का दिन ही ले लीजिये पंचकूला जिले के रायपुररानी क्षेत्र में मतदाताओं ने रतनलाल कटारिया का विरोध स्वरूप पांच साल से लापता सांसद के लौटने के पोस्टर सार्वजनिक स्थलों पर लगा दिए हैं। इतना ही नहीं पोस्टर की फोटो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गयी सब चटकारे लेकर पढ़ रहे हैं। यह सुर्खिया आज शहर में चर्चा का विषय बनी रही। जैसे ही पोस्टर की फोटो वायरल हुई इस मामले को विपक्षी नेताओं ने भुनाना शुरू कर दिया। उन्होंने फोटो पर कई तरह के कमेंट भी किए। लोगों के घरों व सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाए गए इन पोस्टरों में भाजपा प्रत्याशी कटारिया के 2014 लोकसभा चुनावों के समय किए वादों को सांसद बनने के बाद एक भी वादा पूरा न करना और जनता को 2019 के चुनावों में दोबारा बेवकूफ बनाना प्रकाशित किया गया है।
वैसे प्रत्याशी के प्रति रोष प्रकट करने का यह अनोखा तरीका जनता में चर्चा का विषय बना हुआ है। चलो नेता लोग भी समझेंगे कि 5 साल बेवकूफ बनाने के बाद दुबारा जनता को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता।
आपको पता है यह कीर्तिमान कटारिया ने पहली बार नहीं बल्कि पहले भी हासिल किया है। पहले भी जब वह जनता के बीच दिखाई नहीं दिए तो जनता ने उनके खिलाफ सांसद के लापता होने के पोस्टर भी लगाए थे। विपक्ष दल के नेताओं का कहना है कि पोस्टर लगना भाजपा प्रत्याशी के लिए नया मामला नहीं है। इससे पहले भी उनके पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने लापता होने के पोस्टर संसदीय क्षेत्र में लगाए थे। तब भी यह मामला चर्चा का विषय बना था। वैसे हकीकत तो यह है कि सांसद बनने के बाद कटारिया के प्रति जनता में रोष बहुत ज्यादा बड़ा है। उनका लगातार विरोध हो रहा है। अभी दो दिन पहले ही रामगढ़ में जनसभा के दौरान उनके खिलाफ नारेबाजी हो चुकी है। जबकि इससे पहले बरवाला में उन्हें जनसभा में जनता के विरोध का सामना करना पड़ चुका है। वैसे यह नौबत आनी ही थी एक तो 5 साल तक दिखायी नहीं दिए अब आ गए वोट मांगने। भाई लाजवाब बात है। वैसे वहां की जनता यह भी कहती है कि विकास करना तो दूर उन्होंने सांसद निधि के अंतर्गत की घोषणा की रकम को भी जारी नहीं किया।
वैसे जब इतना विरोध हो रहा है तो भाजपा को तो सामने आना ही पड़ेगा। इस मसले पर पंचकूला मीडिया प्रभारी नवीन गर्ग तो कहते हैं कि यह कटारिया को बदनाम करने की विपक्ष की साजिश है। वह अपने हार से डरा हुआ है। गर्ग जी आपकी बात समझ गए आप यह तो बताये आप के पार्टी के बाकी प्रत्याशी को क्यों रोष झेलना पड़ रहा है। हिसार से भाजपा प्रत्याशी बृजेन्द्र सिंह का भी विरोध हुआ था। जिस गांव में विरोध हुआ वह कैप्टन अभिमन्यु साहब जी का था। विरोध के अगले दिन अपने हलके में खुद कैप्टन अभिमन्यु को बृजेन्द्र के लिए मोर्चा संभालना पड़ा। आखिर उनको सामने आना पड़ा। वैसे अब महज कुछ दिन बचे हैं चुनाव को ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी, प्रियंका वाड्रा, अमित शाह, अरविन्द केजरीवाल सब यहां आ रहे हैं। वह वोट मांगेंगे मगर आप जनता को देखना है कि आपका हितैषी है कौन?

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