टुडे न्यूज़संपादकीय

यह दल बिगाड़ेंगे भाजपा, कांग्रेस और इनेलो का चुनावी समीकरण

Hisar Today

हरियाणा में 2019 का चुनावी रण इस बार ऐसे सियासी खेल दिखाएगा, जिसकी उम्मीद शायद किसी ने नहीं की होगी। हमेशा जाट और नॉन जाट मुद्दे के इर्द गिर्द घूमती हरियाणा कि राजनीति अब राजकुमार सैनी के आगमन से एक अलग जातिगत राजनीति में बट गई है। वैसे हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा के होने वाले चुनाव में सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। चुनाव के इस खेल में इस बार कांग्रेस, भाजपा, इनेलो, बसपा के गणित को दो पार्टियां बिगाड़ सकती हैं। वो हैं आम आदमी पार्टी और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी। हाल में आम आदमी पार्टी ने लोकसभा की सभी 10 सीटों और विधानसभा की 90 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इसी प्रकार लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी ने भी हरियाणा की सभी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर लड़ने का ऐलान कर दिया है। लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का तो हाल ही में विधिवत गठन हुआ है।

लेकिन पार्टी के संयोजक कुरूक्षेत्र से भाजपा सांसद राजकुमार सैनी पिछले 2 वर्षों से रैलियां और जनसभाएं करके नए राजनीतिक दल गठन करने की घोषणा कर चुके थे। इन दो सालो में सैनी ने जमकर भाजपा, कांग्रेस और इनेलो की नीतियों की जमकर बखिया उधेड़ने का काम किया है। पार्टी चुनाव मैदान में उतरने का मन बना रही है उससे यहां के लोगों में संशय उत्पन्न होने लगा है कि पार्टी के कार्यकर्ता एक साथ चुनाव मैदान में उतरने के लिए तैयार होंगे भी या नहीं। नई गठित पार्टी पिछड़े वर्गों की जातियों को साथ लेकर अपनी चुनावी रणनीति बनाने में जुटी है। लोगों का यह भी कहना है कि राजकुमार सैनी भी चुनाव मैदान में उतरकर अपनी पार्टी को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। पिछड़े वर्ग की जातियां प्रदेश भाजपा सरकार की नीतियों से काफी नाराज नजर आ रही हैं। जिसका लाभ उठाने के लिए राजकुमार सैनी ने लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का गठन करके चुनाव मैदान में ताल ठोकी है। सैनी कोई कच्चे खिलाड़ी नहीं है, क्यूंकि उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार नवीन जिंदल को तीसरे पायदान पर पटककर पहली बार कुरुक्षेत्र में भाजपा का खाता खोला था।

वहीं आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हरियाणा के कई जिलों का दौरा करके कार्यकर्ताओं और पत्रकारों से प्रदेश में पार्टी के फीडबैक की जानकारी ले चुके हैं। उन्होंने कई सभाओं में घोषणा की है कि पार्टी हरियाणा की सभी लोकसभा औऱ विधानसभा की सीटों पर अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारेगी। इसके लिए पार्टी ने प्रभारी भी नियुक्त कर दिए हैं। बताया जाता है कि प्रदेश की जनता दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कार्यप्रणाली से काफी प्रभावित है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद तो ये घोषणा कर चुके है कि पार्टी दिल्ली सरकार की जनहित की नीतियों और कार्यों को लेकर हरियाणा में चुनाव मैदान में लेकर उतरेंगे। लोगों का यह भी मानना है कि आम आदमी पार्टी और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी अन्य उम्मीदवारों की हार जीत में अंतर को कम या अधिक करने में कामयाब हो सकते हैं। यानि चुनावी भाषा में कहें तो वोट कटवा साबित होंगे।

इन दोनों पार्टियों के बीच अब हम बात करते हैं हरियाणा के तीसरे मोर्चे की। दरअसल पंजाबियों की अनदेखी से नाराज हरियाणा के विभिन्न राजनितिक दल से जुड़े पंजाबी नेताओं ने एकत्रित होकरर एक नए मोर्चा का निर्माण किया है। खास बात यह है कि यह मोर्चा उन नेताओं द्वारा बनाया गया हैं जो पंजाबी हैं। गौरतलब है कि यह मोर्चा अभी चुनाव तो नहीं लड़ेगा मगर आगामी चुनावों के नतीजों में परिणाम जरूर डालेगा। एक तरफ सैनी के वोट बटे हैं, जाट वोट विभाजित हुए हैं।

ऐसे में पंजाबी नेताओ के अलग मोर्चे के कारण पंजाबी वोट किसके पाले से कहा जाएंगे इसकी कल्पना करना मुश्किल होगा। पंजाबी वोट खिसकने के चलते हो सकता है इसका असर इन तीनो पार्टियों के वोट बैंक पर भी दिखाई दे। आंकड़े बताते हैं कि सिरसा, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कर्नल लोकसभा में 15 लाख पंजाबी आबादी हैं। ऐसे में इन तीनो पार्टियों के लिए इन विधानसभा क्षेत्रों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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