राजनीतिसंपादकीय

भाजपा के मंत्रियों की नोक-झोंक से गरमाया सियासी माहौल

Hisar Today

नई इंडस्ट्रियल टाउन पर दशहरा पर्व के मौके पर केंद्र राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और उद्योगमंत्री विपुल गोयल के बीच जोरदार नौंक झौंक की खबर इन दिनों सोशल मीडिया में जोर-शोर से वायरल हो रही है। आखिर इस गरमा गरमी की वजह क्या है, क्यों ये दोनों मंत्री आपस में भीड़ गए। दरअसल केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर और उद्योग मंत्री विपुल गोयल के बीच 20 साल पुरानी दोस्ती है। उनकी यह दोस्ती तब खटाई में पड़ी जब जुलाई 2015 में बड़खल से भाजपा विधायक सीमा त्रिखा को कृष्णपाल गुर्जर ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से उनकी सिफारिश कर उन्हें मुख्यमंत्री का मुख्य संसदीय सचिव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। यहां तक तो ठीक था मगर कृष्णपाल गुर्जर को लगने लगा की राजनीति की राह में गोयल उनके सामने प्रतिद्वंदी न बन जाए। सूत्रों का मानना है की यह दोस्ती राजनीतिक गतिरोध और असुरक्षा की भावना के कारण और खटाई में पड़ी। यह बात विपुल गोयल समझ चुके थे इसलिए उन्होंने मनोहर सरकार में अहम पदों को पाने के लिए अपने जिगरी दोस्त की मदद नहीं ली और उद्योग, वाणिज्य और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण पद पाकर कैबिनेट स्तर पर अपनी ऊंचाई बढ़ाई और मनोहर सरकार के विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभालकर अपना विशेष स्थान बनाया। शायद यह बात कृष्णपाल गुर्जर पचा नहीं पाए। उन दोनों मंत्रियो के बीच की दूरी और बढ़ती गई। 2016 में जब गोयल मंत्री बने तब उनका कई कार्यक्रमो में कृष्णपाल का आमना सामना हुआ।

उन्होंने फरीदाबाद और पलवल जिले में कृष्णपाल गुर्जर के विरोधियों को मंच पर जगह दी। इन विरोधियों में से एक थे पूर्व चार बार सांसद रहे और मौजूदा समय में उत्तरप्रदेश में मीरापुर विधानसभा में विधायक रहे भाजपा विधायक अवतार भड़ाना। बता दें 2014 में जब अवतार भड़ाना कृष्णपाल गुर्जर के सम्मुख लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। तब उस समय भड़ाना ने विपुल गोयल के खिलाफ जोरदार भड़ास निकाली थी। उन्होंने उस समय आरोप लगाया था की गोयल गैर गुर्जर होते हुए भी कृष्णपाल गुर्जर के चुनाव प्रबंध की जिम्मेदारी निभा रहे है। वो ऐसा दौर था कहा जाता है कि अपने दोस्त कृष्णपाल को जिताने के लिए विपुल गोयल ने अपनी तिजोरी के दरवाजे भी खोल दिए थे। उस समय गुर्जर और विपुल की जोड़ी ने ऐसा करिश्मा किया कि भड़ाना को तकरीबन 4.67 लाख वोटों से चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा। जिसके बाद कांग्रेस छोड़कर भड़ाना ने भाजपा पार्टी को ज्वाइन किया। 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र में 9 जगहों पर गुर्जर और विपुल ने टिकटों का वितरण किया था। उस दौरान खुद विपुल गोयल ने फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। हालांकि भाजपा 9 में से केवल 3 जगहों पर ही जीत पायी। उस समय कहा जाता है टिकटों के वितरण कृष्णपाल गुर्जर और विपुल गोयल ने अपनी मनमानी चलाई थी।

जब विपुल गोयल विधायक बनकर पहुंचे तो कृष्णपाल गुर्जर को डर सताने लगा की राजनीति क्षेत्र में तेजतर्रार गोयल उनसे आगे न निकल जाए। यही वह दौर था जब गुर्जर ने अपने तेवर दिखने शुरू कर दिए और देखते ही देखते 20 साल की दोस्ती की दरार पड़नी शुरू हो गयी। बता दे कि भले ही दोनों मंच में जब भी एक साथ आये और एक दूसरे को छोटा और बड़ा भाई बोले मगर असल में यह दोनों एक दूसरे के खिलाफ तलवार लेके बैठे रहते हंै। दरअसल विपुल गोयल को कृष्णपाल और सीमा त्रिखा दोनों का दीपावली के पर्व में फैसला फैसला गलत नजर आया तो उन्होने मंच में धार्मिक कार्यक्रमों में राजनीति करने की आलोचना की। बता दंे की सीमा त्रिखा के हस्तक्षेप के बाद ही एनआईटी ने दशहरा मानने की अनुमति नहीं दी जिसके बाद कई सालों से यहां पर प्रशासन द्वारा दशहरा पर्व आयोजित करता आ रहा है। विपुल गोयल ने इसी बात का विरोध किया और यह विरोध बहस में तब्दील हो गया। धीरे धीरे यहां पर दोनों दोस्तो के मन का छिपा गुबार बाहर आ रहा है। जो यह दिखा रहा राजनीति स्पर्धा में न कोई दोस्त होता है न दुश्मन।

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