टुडे न्यूज़संपादकीय

बड़बोले नेताओं के भाषण पर संज्ञान लेने के लिए थैंक्स सुप्रीम कोर्ट!

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नफरत भरे भाषण देने के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, बीएसपी सुप्रीमो मायावती और अन्य नेताओं के खिलाफ चुनाव आयोग की कार्रवाई पर मंगलवार को संतोष व्यक्त किया। यह खबर सुनते ही सोचा क्या जमाना आया है कि जो काम चुनाव आयोग को करना चाहिए था वो हमारे माननीय कोर्ट ने कर के दिखाया। चुनाव के दौरान भाषा की मर्यादा खोने वालों को लेकर चर्चा तो बहुत हो रही थी, मगर चुनाव आयोग के पास हिम्मत न थी कि उन पर कार्यवाई करें, भाई उनके पीछे बड़े नाम जो थे. मगर आखिरकार चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने बीएसपी चीफ मायावती को तगड़ा झटका देते हुए उनके बड़बोलेपन की उन्हें सजा दी है और चुनाव प्रचार करने पर चुनाव आयोग द्वारा 48 घंटे का प्रतिबन्ध लगाया गया है। इस प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका को भी कोर्ट ने सुनने से इंकार कर ऐसे नेताओं को सबक सिखाने का काम किया है। बेंच ने मायावती के वकील से कहा कि चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ अलग से अपील दायर करें।
चुनाव आयोग की कार्रवाई का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग ‘जाग गया’ है और उसने विभिन्न नेताओं को अलग-अलग समय तक चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है। बेंच ने यह भी कहा कि अभी इसमें आगे किसी और आदेश की जरूरत नहीं है। बता दें कि भाषणों में बहुत उग्र भाषा का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ चुनाव आयोग के पास बहुत शिकायतें आयी थी।, मगर चुनाव आयोग ने इन शिकायतों पर धयान नहीं दिया मगर जब कोर्ट की फटकार लगी तब जाकर चुनाव आयोग जाएगा और उसने तत्काल सोमवार की दोपहर को आदित्यनाथ, मायावती, आजम खान और केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के खिलाफ कार्रवाई की।
बेंच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शारजाह स्थित प्रवासी भारतीय योग शिक्षक हरप्रीत मनसुखानी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में चुनाव आयोग को उन राजनीतिक दलों के खिलाफ ‘सख्त कार्रवाई’ करने के भी निर्देश देने की मांग की गई है, जिनके नेता आम चुनावों के लिए मीडिया में जाति एवं धर्म के आधार पर टिप्पणियां करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान मायावती और योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से विद्वेष फैलाने वाले भाषणों का संज्ञान लेते हुए आयोग से जानना चाहा था कि उसने अभी तक क्या कार्रवाई की।
इससे पहले आयोग ने इस मामले में खुद को ‘दंतविहीन’ बताया था। बेंच ने आयोग से कहा था, ‘आप बताएं कि आप क्या कर रहे हैं। हमें बताएं कि आपने क्या कार्रवाई की है।’ बेंच ने आयोग के एक प्रतिनिधि को मंगलवार की सुबह साढ़े 10 बजे पेश होने का निर्देश भी दिया था। वैसे इन सब शिकायतों को लेकर चुनाव आयोग की अपनी दलील है उनका मानना है कि चुनाव आयोग के पास ‘इस संबंध में एक्शन लेने का अधिकार बहुत ही सीमित है। आयोग ने इस बात का भी खुलासा किया कि वे केवल नोटिस देकर जवाब मांग सकते हैं परंतु किसी राजनीतिक दल की मान्यता खत्म नहीं कर सकते और न ही किसी प्रत्याशी को अयोग्य करार दे सकते हैं। वह सिर्फ सलाह जारी कर सकते हैं और यह अपराध दोबारा होने पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।’
मगर इन दलीलों से संतुष्ट न होकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त रूख अख्यितार किया और मात्र चंद घंटों के भीतर ही चुनाव आयोग हरकत में आया और उसने दोनों नेताओं की सांप्रदायिक टिप्पणियों के लिए कड़े शब्दों में निन्दा की और उन्हें चुनाव प्रचार से रोक दिया। आयोग ने आदित्यनाथ को 72 घंटे और बीएसपी सुप्रीमो मायावती को 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार से बाहर कर दिया। इसके बाद आयोग ने एसपी के आजम खान को 72 घंटे और बीजेपी की मेनका गांधी को 48 घंटे के लिए चुनाव प्रचार से बाहर कर दिया।
चलो देर आये दुरुस्त आये अच्छा हुआ सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और कम से कम एक्शन तो हुआ।

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