टुडे न्यूज़संपादकीय

‘फिफ्टिन इन वन’ टीम का बंटाधार

बहुत बड़ी बड़ी बात करने वाले गुलाम नबी आजाद जी क्या हुआ आजकल आपकी बोलती बंद हो गयी है, क्या हुआ आपके “फिफ्टीन इन वन”का।

हिसार टुडे।

बहुत बड़ी बड़ी बात करने वाले गुलाम नबी आजाद जी क्या हुआ आजकल आपकी बोलती बंद हो गयी है, क्या हुआ आपके “फिफ्टीन इन वन”का। आपने जब यह टीम बनायीं थी तभी पता चल गया था कि आप कितनी भी टीम बनाये मगर यह टीम कभी “वन” नहीं हो सकती। बस में सफर के बाद जिसने जो रास्ता पकड़ा उससे वह लौटकर वापस नहीं आया। अभी भी सभी टीम अपने अपने काम में लगी हुई है। राहुल आये थे तब बस में सभी 15 टीम प्लेयर्स ने अपनी शककल दिखा दी थी. अब यह टीम दुबारा अपने कफ्तान का इंतज़ार कर रही है।

इस टीम के कोच अर्थात गुलामनबी आज़ाद किस प्लेयर को कौन से गुर सिखाये, इसे लेकर कंफ्यूज है क्योंकि उनके प्लेयर्स उनसे दो -कदम आगे है। यह प्लेयर्स तो अब बच्चो की तरह लड़ने लगे है कि अगर मुझको कफ्तान नहीं बनाया तो मैं टीम तोड़ दूंगा।

मैंने सुना था समन्यवय समिति के बारे में, जितनी सुर्खियों में यह खबर थी उतनी तेजी से यह खबर गायब हो गयी थी। आज न समन्वय बचा है और न ही कोई समिती। क्योंकि न लोकसभा चुनाव में समन्वय समिती के नेता कुछ करिश्मा दिखा पाए न ही कोई खता खुलवा पाए। इस समन्वय समिती की निष्क्रियता के चलते अब जैसे जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, कांग्रेस के अंदर बेचैनी बढ़ती जा रही है। पता है मैडम किरण तो नेता प्रतिपक्ष को लेकर नजर गढ़ाए हुए है क्यूंकि उनको पता है कि तंवर और हुड्डा के रहते उनको कोई नहीं पूछेगा।

अपने हुड्डा जी तो पार्टी कार्यकर्ताओ का शक्तिप्रदर्शन दिखा कर प्रदेशाध्यक्ष पर नजर गढ़ाए हुए है। अशोक तंवर हुड्डा की चाल और दबाव में फंसकर लुड़कने वाले नहीं है, उन्होंने भी हुड्डा को खुद की ताकत दिखने के लिए शक्तिप्रदर्शन 12 तारीख को कर दिया। शैलजा जी तो यह सब तमाशा देखकर अकेले मस्त है और जैसे तैसे अपने केंद्र के राजयसभा सांसद पद को संभल कर सोचती है कि प्रदेश को छोड़ो और पार्टी हाईकमान से नजदीकी का फायदा उठाओ। 15 इन 1 टीम के सबसे प्रमुख खिलाड़ी रणदीप जींद उपचुनाव में काँटा चुबने के कारण प्रदेश से बेहतर केंद्र स्तर पर राहुल के सिपाह -सालार बनने की कवायद में जुटे हुए है। वही नॉन जाट नेता प्रियंका गाँधी से नजदीकी का फायदा उठाकर पिछले दरवाजे से अपनी एंट्री की कोशिश में। वही दीपेंद्र हुड्डा रोहतक में जिन जगहों पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा वहां हालत समझने और लोगो का दिल जितने में लगे है।

पता है कि यह तंवर और हुड्डा के बिच का जंग केंद्र के लिए इतना सरदर्द साबित हो गया है की आजकल हुड्डा के करीबी नेता भी उनसे दुरी बरतने में लगे है। अब तो कोच भी कह चूका है कि मैं कफ्तान के नाम की सिफारिश नहीं करूँगा। अब बताओ ऐसे समय में बेचारे कार्यकर्ता करे तो करे क्या। उनको तो आज दूसरी पार्टी के कार्यकर्ता भी ताने देने लगे है। विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैचेनी लगातार बढ़ती जा रही है। उनको तो अब यही लगने लगा है कि अगर अभी भी कांग्रेस पार्टी हाईकमान ने कोई कदम नहीं उठाया तो हो सकता है 15 टीम के 15 सदस्य अपना अपना रास्ता चुन ले. और कार्यकर्ता अपना। वैसे भाजपा में विधानसभा चुनाव तक भरी भरकम भर्तियां कचल रही है. उसके लिए ज्यादा क्वालिफिकेशन भी नहीं चाहिए बस आप यह बोल दो भाजपा की विचारधारा के साथ है और बस आपकी भर्ती पक्की।

अब तो नौबत यहां तक आ चुकी है कि वह पूछने लगे है कि पार्टी के अंदर चल क्या रहा है। पार्टी कर क्या रही है? अगर अभी भी कोई फैसला नहीं हुआ तो लोकसभा में जो नतीजा हुआ इस बार विधानसभा चुनाव में उससे भी ज्यादा शर्मनाक होंगे। और तब पार्टी के पास न 15 का आकड़ा बचेगा न 10 का. शायद भाजपा का 75 का आकड़ा जरूर बढ़ाने में कांग्रेस निर्णय लेने में देरी करते हुए मदद करे।

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