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फरीदाबाद लोकसभा चुनाव में भाजपा का बजेगा “डंका”

Hisar Today

लगभग 12 लाख मतदाताओं वाले फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र पर शुरू से ही कांग्रेस और बीजेपी का दबदबा रहा है। सिर्फ एक बार 1988 में हुए उपचुनाव में चौधरी देवीलाल के नेतृत्व वाले लोकदल के उम्मीदवार केए चौधरी ने इस सीट पर विजय पताका फहरा कर कांग्रेस और बीजेपी के वर्चस्व को तोड़ा था। गौरतलब है कि फरीदाबाद और पलवल जिलों के नौ विधान सभा क्षेत्रों में फैली फरीदाबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत फरीदाबाद की छह – पृथला, फरीदाबाद एनआईटी, बड़खल, बल्लभगढ़, फरीदाबाद शहर और तिगांव तथा पलवल जिले की तीन विधान सभा सीटें – हथीन, होडल व पलवल आती हैं। वर्ष 1977 से पहले यह चुनाव क्षेत्र गुड़गाव लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था लेकिन 1976 में हुए नए परिसीमन में गुड़गाव लोकसभा क्षेत्र को खत्म कर उसके आधे हिस्से को महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र में सम्मलित कर दिया गया तथा बाकी हिस्से को लेकर फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र के नाम से एक नया लोक सभा क्षेत्र गठित कर दिया गया।

इमरजेंसी हटने के बाद 1977 में हुए लोकसभा के आम चुनावों में फरीदाबाद की ताजा-ताजा अस्तित्व में आई सीट पर जनता पार्टी के धर्मवीर वशिष्ठ ने निर्दलीय उम्मीदवार खुर्शीद अहमद को हराकर इस सीट पर जीत का परचम लहराया था। 2014 में देशव्यापी ‘मोदी लहर’ में बीजेपी के कृष्णपाल गुर्जर रिकॉर्ड मतों के भारी अंतर से कांग्रेस के अवतार सिंह भड़ाना को धूल चटाने में सफल रहे और यह सीट बीजेपी की झोली में डाल दी। वर्ष 2019 के चुनावों में उम्मीद है कि पिछली बार की तरह इस दफा चुनावों में कोई लहर जैसी बात नहीं होगी और इस दफा यहां का चुनाव पूरी तरह मजहबी और जातीय समीकरणों के आधार पर लड़ा जाएगा।

गौरतलब है कि फरीदाबाद में तकरीबन सवा छ: लाख पुरूष और लगभग पांच लाख महिला मतदाता हैं। जातिगत हिसाब से सर्वाधिक दो लाख 50 हजार जाट, दो लाख गुर्जर, 2.20 लाख अनुसूचित जाति, 1.50 लाख ब्राह्मण, 1.30 लाख पंजाबी, 1.25 लाख मुस्लिम, एक लाख पिछड़ी जाति, 80 हजार बनिया, 50 हजार अहीर (यादव), 50 हजार राजपूत और 50 हजार ही अन्य जातियों के भी मतदाता यहां है। इस हिसाब से इस बार यहां इनेलो व बसपा गठबंधन मजबूत हो कर उभर सकता है। वर्ष 2019 के चुनावों में उम्मीद है कि पिछली बार की तरह इस दफा चुनावों में बीजेपी के पिछले उम्मीदवार कृष्णपाल गुर्जर ने 2014 में 6,52,516 वोट लिये थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार अवतार सिंह भड़ाना ने 1,85,643 तथा इनेलो प्रत्याशी आरके आनंद ने 1,32,472 वोट लिए थे। बीजेपी इस दफा भी अपने पुराने प्रत्याशी कृष्णपाल गुर्जर पर ही दांव खेलेगी, यह तय है। यदि कृष्ण पाल गुर्जर पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस बार आधे वोट भी बरकरार रख पाए तो बीजेपी की की जीत तय है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है, उसके पास भी फिलहाल अवतार सिंह भड़ाना का कोई ठोस विकल्प नजर नहीं आता। तय है कि अंत पंत कांग्रेस भड़ाना पर ही अपना दांव लगाएगी।

वैसे तो कांग्रेसी खेमे में आधा दर्जन लोग टिकट के लिए जोड़-तोड़ करने में लगे हुए हैं और अशोक तंवर और हुड्डा के धड़े किसी नए चेहरे को आगे करने की फिराक में हैं भी, लेकिन कांग्रेस दरबार में भड़ाना के नंबर भी किसी से कम नहीं हैं। इनेलो और बसपा का यहां साझा प्रत्याशी चुनावी जंग में उतरेगा। यह सीट दोनों में से किस पार्टी को जाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन पार्टियों के भावी प्रत्याशियों की चर्चा करने का फिलहाल कोई फायदा नहीं है। लेकिन यह तय है कि यदि इन पार्टियों ने मिल कर बेहतर उम्मीदवार उतारा तो नतीजे चौंकाने वाले भी हो सकते है। जहां तक आम आदमी पार्टी का सवाल है, उसके उम्मीदवार पुरूषोत्तम डागर ने पिछली दफा 67,355 वोट जीते थे और एकदम नई पार्टी के लिहाज से अच्छा प्रदर्शन किया था। इसलिए दिल्ली से नजदीक होने का आप उम्मीदवार को इस बार ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।

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