संपादकीय

नतीजों के बाद कांग्रेस के दिग्गजों की अगली परीक्षा “प्रदेशाध्यक्ष”

Hisar Today

आप यह मत सोचना कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेताओं की हार-जीत के नतीजे 23 तारीख को आने के बाद कांग्रेस के नेताओं के अंदर चल रही टैंशन खत्म हो जाएगी। आपका यह कहना गलत होगा। क्योंकि सांसद चुनाव में जैसा की आपको पता है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बार हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को इस बार चुनाव में उतारा था। एक तरफ तो इन दिग्गजों की ताकत देखना चाहते थे और इसी ताकत के आधार पर आने वाले समय में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री का चेहरा चुनना चाहते थे। राहुल ने दिग्गजों को मैदान में उतारकर एक तीर से कई निशाने साधे। एक तरफ वह यह सोच रहे थे कि इस बहाने और अपनी ताकत दिखाने के लिए यह दिग्गज अपनी जान लगाकर कांग्रेस की सत्ता वापस लाने का काम करेंगे, तो ठीक दूसरी तरफ यह नतीजे राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के करीब लाने में बहुमूल्य भूमिका अदा करेंगे।

इसीलिए इन कांग्रेस के दिग्गजों के लिए यह चुनाव जितना इतना जरुरी बन गया। क्योंकि उनको पता है कि इन चुनाव के नतीजे उनको हरियाणा कांग्रेस के महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौपेंगे। हालांकि इस दौर में सबसे सेफ गेम खेला रणदीप सुरजेवाला, कुलदीप बिश्नोई, नवीन जिंदल और किरण चौधरी ने। क्योंकि लोकसभा चुनाव में यह सभी दिग्गज नहीं है, हालांकि कुलदीप और किरण चौधरी ने इस चुनाव में अपने बच्चो को उतारा है। इसलिए वह कहीं न कहीं कांग्रेस अध्यक्षपद की दौड़ में आगे हैं।

मगर अगर इस चुनाव में हुड्डा परिवार यानीकि दीपेंद्र और भूपेंद्र हुड्डा अपनी सीट निकालने में कामयाब हुए तो वह कांग्रेस अध्यक्षपद के प्रबल दावेदार के तौर पर सामने आयंगे। जबकि ठीक दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में भी वह अपनी ताकत झोंक देंगे अगर हुड्डा यह सीट निकालते हैं तो पार्टी हाईकमान के सामने उनका दबदबा और बढ़ेगा। हालांकि अगर ठीक दूसरी तरफ हिसार जैसी सबसे हॉट सीट में कुलदीप बिश्नोई अपने 26 वर्षीय बेटे भव्य बिश्नोई को चुनाव जितवाने में कामयाब होते हैं तो वह भी मुख्यमंत्री के चेहरे की रेस में सबसे आगे रहेंगे। बता दें कि इस सूरत में यह मान के चलना चाहिए कि उनकी खासतौर पर पैरवी करने के लिए प्रियंका गांधी भी मध्यस्थता कर सकती है।

इसलिए कुलदीप बिश्नोई ने इस चुनाव को बहुत गंभीरता से लेते हुए भव्य को चुनाव में उतार कर अपनी ताकत दिखाने का काम किया। अगर भव्य बिश्नोई यहां से चुनाव जीत कर आते हैं तो न केवल कुलदीप का कद पार्टी हाईकामन के सामने और बढ़ेगा बल्कि वह खुलकर मुख्यमंत्री का चेहरा या प्रदेशाध्यक्ष बनाये जाने की बात कर सकेंगे। यही कारण है कि यह लोकसभा चुनाव के नतीजे आने तक सभी कांग्रेस प्रत्याशियों की सांसे हलक पर अटकी हुयी हैं। सबसे ज्यादा तो कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की। क्योंकि अगर अशोक तंवर हार जाते है तो भूपेंद्र हुड्डा को कहने का मौका मिलेगा कि उन्हें प्रदेशाध्यक्ष बनाया जाए। खैर यह तो वक्त ही बातयेगा कि कौन अपनी सीट बचाने में कामयाब होता है।

क्योंकि जीत के दावे सभी कर रहे हैं, चाहे भाजपा हो, कांग्रेस हो, जजपा हो या इनेलो। सभी मानते हैं उनकी जीत है, मगर कांग्रेस के नेताओं को दूसरी पार्टियों से ज्यादा चिंता खाएे जा रही है, क्योंकि यह उनके राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगा। वैसे यह चुनावी नतीजे यह भी तय कर देंगे कि क्या भाजपा का सफाया करने में वह कामयाब हुए या अभी चुनौती देना बाकी है। जानकारों का मानना है कि हुड्डा ने चुनाव में जो ताकत दिखाई वह कहीं न कहीं इस चुनाव में उनको फायदा पंहुचा सकती है।

वहीं ठीक दूसरी तरफ अगर कुलदीप हिसार की हॉट सीट से भव्य को जिताने में कामयाब होते हैं तो उनका भी आने वाला समय कांग्रेस के अंदर सुनहरा दौर लेके आएगा, हालांकि देखना यही है की कही गुटबाजी का शिकार तो इस चुनाव में यह दिग्गज तो नहीं हुए। अगर प्रदेशाध्यक्ष या मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर खुद को साबित करने के चलते गुटबाजी होती है तो न केवल कांग्रेस का सियासी गणित बिगड़ेगा, बल्कि हरियाणा में कांग्रेस का पतन कोई रोक नहीं पायेगा। मगर माना जा रहा है कि इस लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता अपने गढ़ को बचाने में जुटे थे इसलिए गुटबाजी का किसी के पास समय ही नहीं था। खुद हुड्डा ने हिसार में भव्य के लिए प्रचार करके यह दिखा दिया कि इस बार कांग्रेस एकजुट है।

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