संपादकीय

धनखड़ मत भूलो तुम भी “नौकर” हो

भारतीय जनता पार्टी के नेता तो सत्ता के नशे में इतने चूर हो चुके हैं कि उनको यह तक समझ ही नहीं आता कि वो बोल क्या रहे हैं। सुना था महाशय जी ने राजनीति में कदम रखने के पहले 11 साल तक लेक्चरर रहे, मगर राजनीति में आने के बाद उन्होंने अपनी भाषा की मान मर्यादा तो छोड़िये, वह खुद ही भूल गए कि वो हैं क्या ? धनखड़ जी आपको क्या हो पता है “नौकर….. जनता के नौकर” अब यही नौकर किसी स्कूल में जाकर यह कहंे कि “स्कूल में शिक्षा से सिर्फ नौकर बनते हैं” तो आप क्या कहोग ? ऐसी बदजुबानी कहां से सीख रहे हंै जनाब। जब आप जैसे लोग ऐसे बयान देकर बच्चों का मनोबल गिराने लगे तो इससे अच्छा था आयोजक कार्यक्रम में किसी अशिक्षित या मुर्ख व्यक्ति को बुला देते। काहे आयोजक ऐसे महानुभावों को आमंत्रित करके अपना और बच्चों का समय बर्बादव बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ।
एक तरफ तो युवा बड़ी मुश्किल से पकोड़े वाले बयान को भुला पाए थे अब यहां नौकर वाला बयान सामने आ गया। लगता है कि भाजपा वालो ने तो ठेका लेकर रखा है सबको जलील करने का। दरअसल मामला है नरवाना के निजी स्कुल का और पत्रकार से ज्यादा एक अभिभावक होने के नाते मुझे तो धनखड़ के बयान पर बहुत आश्चर्य व दुःख हुआ कि हम जैसे मतदाता इन जैसे नेताओं को वोट देकर सत्ता की गद्दी थमा देते हैं और यह महाशय लोग हमको क्या बच्चों को भी नहीं छोड़ते। दरअसल नरवाना में एक निजी स्कूल में भाषण देते हुए ओमप्रकाश धनखड़ ने कहा कि “आप लोगों को पढ़ाएंगे उसमें सिर्फ नौकर बनने की शिक्षा देंगे मालिक बनने का नहीं। इसलिए हमारे बच्चे जितने भी ऊँचे और अच्छे स्कुल में पढते हैं वो नौकर बनने के लिए पढते हैं मालिक नहीं। कितना भी आईटीआई करले, आईआईएम कर ले वो नौकर बनने के लिए पढता है मालिक नहीं। धनखड़ आगे कहते हैं कि हमको नेता बनाना स्कूल और कॉलेज ने नहीं सिखाया हमको नेता बनाना आरएसएस ने सिखाया। धनखड़ भाई मेरा आपसे सरल सा सवाल है यह बताओ आरएसएस ने आपको नेता बनना सिखाया तो नेता बनके आपको क्या हो पता है “नौकर” जनता का वो सेवक जिसका काम जनता का काम करना और चौकीदारी करना। चौकीदार पता है न वो भी नौकर हैं, नौकरी का काम करता है। मोदी जी ने कहा था “मैं भी चौकीदार हूं” उम्मीद है धनखड़ जी ने सुनी होगी यह बात।
वैसे धनखड़ जी आप यह बताये मुकेश अम्बानी क्या स्कूल नहीं गए थे क्या ? या वो आरएसएस गए थे। वो आज इतने सफल बिजनेसमैन हंै, अभिताभ बच्चन का नाम तो सुना होगा वो भी स्कूल में पढ़ाई कर चुके हं, एमएस धोनी का नाम सुना है न वो भी स्कूल में पढ़ाई करके क्रिकेट में चौके-छक्के मार रहे हंै। माधुरी दीक्षित, सोनाली बेंद्रे कितनो का नाम बताएं ताकि आपके ज्ञान में थोड़ा भार पड़े और आपको यह समझ आ सके कि स्कूल में सिर्फ नौकर नहीं बनते। मुझे लगता है शिक्षाविद और अब्दुल कलाम आजाद और हमारे राष्ट्रपति भी स्कूलों में पढ़ाई कर चुके हैं। इसलिए आप जैसे नेता लोग सोच-समझ के बोलें और अगर यह समझ नहीं आता कि क्या बोलना है तो मत बोलंे और चुप होकर बैठ जाओ। कम से कम बच्चों में बचपन से अमीर-गरीब, नौकर-मालिक का भेदभाव न बताएं। उन्हें पढ़ने दंे, मेहनत करने दंे। आपके हिसार के लोकसभा प्रत्याशी को कृपया आप यह ज्ञान दे देते तो वो आपको सही प्रकार बताते कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे नौकर नहीं नेता की रेस में शामिल हो सकते हंै।

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