संपादकीय

दो वोट – हां मैं शिक्षित हूं

Hisar Today

कभी चारा घोटाला, तो कभी गुंडागर्दी के मामले में हमेशा लिप्त रहने वाले बाहुबलियों का एक समय पर बहुत जोर रहता था राजनीति में। राजनीति में इसे लोगों के कारण कोई उनमें आना नहीं चाहता था। सभी लोग राजनीति को गंदे शब्दों से पुकारा करते थे। बार-बार यह सवाल और यह प्रश्न भी उठे कि कब बदलेगी राजनीति की ऐसी तस्वीर ? क्या कभी राजनीति में आम आदमी के लिए कोई जगह होगी ? क्या जनता पर हुकुम करने वाला अशिक्षित उम्मीदवार उनके सर पर बिठाया जाएगा ? क्या अशिक्षित लोग प्रदेश या अपने हलके का भला कर पाएंगे ? न जाने ऐसे कई सवाल मेरे भी जहन से उठते थे। मगर अब लगता है तस्वीर बदल रही है। न केवल राजनीति में शिक्षित उम्मदवारों की मांग बढ़ रही है, बल्कि स्वच्छ छवि वाले नेताओं की लगातार मांग बढ़ती जा रही है। जो एक शुभ संकेत है। आज राजनीति जिस प्रकार से बदल रही है। सत्ता के साथ सत्ता की ताकत उन्हें मिल रही है। उसी की मोह माया में आज बड़े-बड़े डिग्री होल्डर भी राजनीति में उतर आये हैं।

इस बार अगर हरियाणा की बात करें तो शिक्षित उम्मीदवारों को लेकर रेल सी लग गई है। कोई भी पार्टी ऐसी नहीं जिसके पास काबिल और शिक्षित उम्मदवारों की कमी हो। इस बार हरियाणा की राजनीति में बड़े-बड़े डिग्रीधारक अपना राजनीतिक ‘करियर’ बनाते दिखेंगे इसमें कोई दो राय नहीं। मगर सवाल यह उठ खड़ा होता है कि उनको नौकरी देने का काम कौन करेगा ? आम जनता। इसीलिए एक बार नौकरी 5 साल छुटकारा। अब इन 5 साल में वो कुछ भी करें कोई रोक टोक नहीं। बता दें कि इस बार हरियाणा के लोकसभा चुनाव में कुल 10 संसदीय क्षेत्र हैं।

इन 10 संसदीय क्षेत्र अर्थात नौकरी में कुल मिलकार पांच प्रमुख राजनीतिक दल हैं और 40 से अधिक उम्मीदवार। वैसे तो इस बार के लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा में कई मुद्दे लीक से हटकर हैं। मसलन, पार्टियों में बिखराव, नयी पार्टियों का गठन, दल-बदल तथा ‘पुत्र मोह।’ लेकिन बात अगर उम्मीदवारों की शिक्षा को लेकर करें तो यहां मामला कम रोचक नहीं है। मैदान में आईएएस अफसर, पीएचडी, डॉक्टर, वकील, इंजीनियर के अलावा विदेशी डिग्री धारक भी हैं।

हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों पर 11 वकील, एक डॉक्टर, आईएएस, दो पीएचडी होल्डर, एक आईआईएम पासआउट, एक इंजीनियर, तीन एमएससी, तीन एमबीए, एक एमफिल, सात स्नातक और पांच-पांच बारहवीं व दसवीं पास हैं। यही नहीं, इनमें दो जेएनयू से पास आउट हैं, वहीं 6 के पास विदेशी डिग्री भी हैं। पांचों में से कोई भी ऐसी पार्टी नहीं है जिसके पास विदेशी डिग्री धारक प्रत्याशी न हो। कांग्रेस के पास ऐसे 2 प्रत्याशी हैं। वैसे भाजपा में कोई भी प्रत्याशी स्नातक से कम नहीं है। इनेलो में 3 ही प्रत्याशी स्नातक या उससे ज्यादा शिक्षित हैं। इनमें चार प्रत्याशी दसवीं पास तो तीन प्रत्याशी बारहवीं पास हैं। भाजपा में पांच वकील, एक डॉक्टर (रोहतक से अरविंद शर्मा दंत चिकित्सक), एक आईएएस (हिसार से बृजेंद्र सिंह) और बाकियों में दो स्नातक तथा एक एमएससी हैं।

इसी प्रकार कांग्रेस में चार वकील, एक पीएचडी (सिरसा से अशोक तंवर), दो विदेशी डिग्री धारक (रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा व हिसार से भव्य बिश्रोई), एक एमफिल, एक स्नातक व एक दसवीं पास (फरीदाबाद से अवतार सिंह भड़ाना) हैं। इसी प्रकार जजपा के 7 प्रत्याशियों में 2 विदेशी डिग्री धारक (हिसार से दुष्यंत व भिवानी से स्वाति यादव), एक आईआईएम से पीजी (गुरुग्राम से महमूद खान), एक वकील, एक स्नातक व दो 12वीं पास हैं, जबकि आप के 3 प्रत्याशियों में से एक पीएचडी (सोनीपत से नवीन जयहिंद), एक इंजीनियर (अंबाला से पृथ्वी सिंह) व एक एलएलबी है। जहां तक प्रत्याशियों की उम्र का मामला है, भाजपा इसमें सबसे ‘बुजुर्ग’ है। उसके प्रत्याशियों की औसत उम्र 57.7 वर्ष है, जबकि जजपा-आप गठबंधन ‘सबसे जवान’ है। इसके प्रत्याशियों की औसत उम्र 41.7 है। इसी प्रकार कांग्रेस के प्रत्याशियों की औसत उम्र 53.1 व इनेलो प्रत्याशियों की 49.4 है। राजनीति में जिस प्रकार से शिक्षित प्रत्याशियों को लाकर सभी राजनीतिक दलों ने अभूतपूर्व बदलाव लाने की कोशिश की है वो वाकई सराहनीय है।

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