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तीन मुद्दे बनेंगे भाजपा के गले की फांस

Hisar Today

हरियाणा में 2019 को दोबारा सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रही भारतीय जनता पार्टी के लिए यह ख्वाब पूरा करना टेढ़ी खीर नजर आता है। 4 साल के शासन काल के दौरान भाजपा सरकार से जनता ने जनता से वादें करते हुए जो उम्मीदें जगाई थी,आज जनता कि वहीं उम्मीदें उन्हें पूरी होते नहीं दिख रही। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की स्वच्छ छवि भी इस बार के आगामी चुनाव में भाजपा की नइया पार करवाने में उतनी कारगर साबित नहीं होगी। ऐसे कई कारण हैं जिनके चलते भाजपा के लिए इस बार दोबारा सत्ता हासिल करना हरगिज आसान नहीं होगा। इस समय भाजपा के पास 46 सीटें हैं और वह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में हैं। दोबारा सत्ता का सरताज अपने मस्तक में रखने के लिए 2019 में उसे यह जादुई आंकड़ा फिर से हासिल करके दिखाना होगा।

जो वर्तमान सियासी हालात में मुमकिन होता नजर नहीं आ रहा है। इस बार भाजपा की हरियाणा में सत्ता वापसी में 3 मुद्दे उन्हें मुश्किलों में डाल सकते है। पहला आरक्षण, दूसरा राम रहीम और तीसरा मुद्दा है राजकुमार सैनी। पिछले 3 साल से प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। यह भाजपा सरकार ही है जिसके कार्यकाल में जाट आरक्षण आंदोलन इतना भीषण हुआ कि प्रदेश हिंसा और आगजनी के लपटों से जल उठा। इस हिंसा में बड़े पैमाने में प्रदेश को भारी जान माल की कीमत चुकानी पड़ी। मामला हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर के हाथ से निकल जाने के कारण खट्टर सरकार की छवि पर न केवल यह प्रकरण एक काला दाग बनकर साबित हुआ, बल्कि यह मुद्दा आज भी भाजपा के गले कि फांस बन चुका है।

अपने दावे के अनुसार भाजपा जाटों को आरक्षण दिलाने में अभी तक नाकाम रही है। पिछले चुनाव में जाट वोटों का एक निर्णायक हिस्सा नरेंद्र मोदी के कारण भाजपा को मिला था लेकिन इस समय जाट वोटर जाट आरक्षण हिंसा मामलों में जारी कानूनी प्रक्रिया व आरक्षण नहीं मिलने के कारण भाजपा से पूरी तरह नाराज नजर आ रहा है। हालात इस कदर खराब है कि भाजपा के वर्तमान सभी 6 जाट विधायकों कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता, महिपाल ढांडा और सुखविंदर मांडी की दोबारा जीत पर बड़े सवालिया निशान साफ-साफ लगे नजर आ रहे हैं। 90 में से 30 सीटों पर जाट वोटरों की नाराजगी भाजपा प्रत्याशियों को जीत के लिए तरसाने का काम करेगी।

वही ठीक दूसरी तरफ राम रहीम के अनुयायी भी अपने बाबा के जेल में जाने का बदला भाजपा से लेने के मूड में हैं। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सिरसा के दबंग बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह का खुला समर्थन हासिल हुआ था। उनके भक्तों ने पहली बार पोलिंग बूथों पर मेज लगाकर भाजपा के लिए एकतरफा पोलिंग कराने का काम करवाया था। राम रहीम के भक्तों की एक तरफा मुहिम के कारण भाजपा को एक दर्जन सीटों पर जीत हासिल हुई थी। पिछले साल राम रहीम को 20 साल की सजा का सामना करना पड़ा । इसके अलावा पंचकूला में हुए हिंसा के भीषण तांडव के बीच लगभग 3 दर्जन राम रहीम समर्थकों को जान गंवानी पड़ी।

इन दोनों कारणों से राम रहीम के भक्तों में भाजपा सरकार के प्रति नफरत का माहौल है। अगले चुनाव में राम रहीम के भक्त भाजपा से बदला लेने के लिए उसके खिलाफ जमकर वोट डालने का काम करेंगे। राम रहीम के समर्थक दो दर्जन सीटों पर हार जीत का फैसला तय करने का काम करते हैं । राम रहीम के समर्थकों के कारण भाजपा को टोहाना, हिसार, बवानी खेड़ा, गुहला चीका, थानेश्वर, लाडवा, शाहाबाद, अंबाला शहर और अंबाला कैंट सीटो के वर्तमान भाजपा विधायकों पर हार का खतरा मंडरा रहा है। कुरुक्षेत्र के बागी भाजपा सांसद राजकुमार सैनी 2 सितंबर को पानीपत में अपनी अलग पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का गठन कर चुके हैं।

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