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टिकट के मोह में मांगेराम गुप्ता “न घर के रहे न घाट के”

महेश महता | हिसार

पैंतरेबाज मांगेराम की हालत ऐसी है जैसे उन्होंने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी है। बोलते है न कि मोह, माया, लालच हमेशा भारी पड़ता है। यही हाल इन दिनों खुद मांगेराम गुप्ता का हो गया है। अब तक ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि भाजपा को जींद उपचुनाव में कड़ी चुनौती देने के लिए जननायक जनता पार्टी की तरफ से मांगेराम गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा के छक्के छुड़ा दिए जाएंगे। मगर भारतीय जनता पार्टी ने बड़े ही शातिर तरीके से पूर्व मंत्री मांगेराम को ऐसे षड़यत्र में फंसाया और उन्हें दुष्यंत चौटाला से ऐसा दूर किया कि आज मांगेराम की परिस्थिति ऐसी हो गई है कि वो न घर के रहे है और न ही घाट के।

इन दिनों अगर बात करें तो सोशल मीडिया में कभी यह खबर चल रही है कि पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता जननायक जनता पार्टी से जींद का उप चुनाव लड़ेंगे। थोड़ी देर बाद सोशल मीडिया में यह खबर चल पड़ती है कि वह भाजपा से जुड़ गए हैं। फिर सुभाष बराला का बयान सोशल मीडिया में चलता है जिसमें वे यह कहते हैं कि मांगेराम अभी पार्टी में शामिल नहीं हुए इसलिए उनको जींद उपचुनाव में भाजपा की तरफ से टिकट देने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा। ऐसे में इन तमाम खबरों को देखें तो अब लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर मांगेराम के साथ चल क्या रहा है? सूत्रों के अनुसार कल तक पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता की भाजपा में ज्वाइन की चर्चाएं जोरों पर चल रही थी। मगर जितनी तेजी से यह चर्चा रही उतनी ही तेजी से मांगेराम गुप्ता का अचानक उमड़ा भाजपा प्रेम उखड़ने की खबर आई। दरअसल मांगेराम गुप्ता परिवार को सांसद दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी का जींद उपचुनाव में प्रत्याशी माना जा रहा था।

जननायक जनता पार्टी के टिकट पर उनकी जीत के प्रबल आसार भी नजर आ रहे थे। ऐसे में अचानक दुष्यंत की जानकारी के बिना मांगेराम गुप्ता का दिल्ली में भाजपा हरियाणा प्रभारी अनिल जैन के घर पर पहुंचना प्रदेश की सियासत में खलबली मचाने का काम कर गया। हर तरफ यह चर्चा होने लगी की मांगेराम गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। दरअसल यह सब कैसे हुआ? किसने किया? क्या भाजपा ने जींद उपचुनाव जितने के लिए मांगेराम को मोहरा बनाया? क्या जींद उपचुनाव को जीतने के लिए भाजपा ने चक्रव्यूह रचते हुए इस चुनाव के सबसे मजबूत खिलाड़ी मांगेराम गुप्ता को खत्म करने का काम किया ? माना जाता है कि मांगेराम गुप्ता भाजपा में इसी शर्त में शामिल होने का मन बना रहे थे कि उन्हें जींद उपचुनाव की टिकट मिल जाए। मगर उनकी उम्मीदों पर भाजपा ने ही पानी फेर दिया। अगर मांगेराम गुप्ता भाजपा में शामिल हो जाते तो जननायक जनता पार्टी के लिए जींद उपचुनाव में अचानक दमदार प्रत्याशी तलाशना टेडी खीर हो जाती।

सूत्रों के हवाले इस बात की जानकारी मिली है कि भाजपा जानती थी कि अगर जननायक जनता पार्टी की तरफ से मांगेराम गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारा जाता है तो भाजपा की स्थिती थोड़ी मुश्किल हो जाएगी। इसलिए मांगेराम गुप्ता को सफाई से रास्ते से हटाने के लिए उन्हें भाजपा में शामिल कराने का गेम प्लान बनाया गया। कहा जाता है यह गेम प्लान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह का बताया जा रहा है। भाजपा में शामिल होने पर बड़े फायदे गिना कर मांगेराम गुप्ता को जेजेपी की टिकट का मोह छोड़कर भाजपा के खेमे में जाने के लिए तैयार कर लिया गया था। गुप्ता भी भाजपा की मोहमाया में फंस गए और दिल्ली पहुंच गए। मगर मांगेराम गुप्ता और भाजपा के मिलन की राह में एक शर्त ने अड़ंगा डाल दिया। मांगेराम गुप्ता ने यह शर्त रखी कि अगर उनके बेटे महावीर की जिद उपचुनाव के लिए टिकट का ऐलान कर दिया जाता है तो वह तुरंत भाजपा में शामिल हो जायेंगे। लेकिन भाजपा नेताओं ने उनकी शर्त मनाने से इंकार करते हुए कहा कि उन्हें भाजपा में बिना शर्त ही शामिल होना होगा। पहले भी सियासी धोखेबाजी के शिकार हो चुके मांगेराम गुप्ता ने भाजपा के शर्त को मानने से इंकार कर दिया और उलटे पांव वापस लौट गए।

भाजपा के फेर में करवा लिया अपना सियासी नुकसान
वैसे देखा जाए तो हिसार में मेयर चुनाव हो या कोई भी चुनाव भाजपा हमेशा अपनी शर्तो पर प्रत्याशियों को पार्टी में एंट्री देती है। मगर यह पहली बार था जब 2014 के बाद पहली बार भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। अनिल जैन के घर पहुंचने के बावजूद मांगेराम गुप्ता के भाजपा में शामिल नहीं होने से भाजपा की भारी फजीहत हुई है। भाजपा रणनीतिकारों को यह लगता था कि वह हरियाणा के किसी भी नेता को तोड़ने का दम रखते हैं लेकिन गुप्ता ने उनके ऑफर को ठुकरा कर यह बता दिया है कि यहां पर ना करने वाले नेताओं की भी कमी नहीं है। टिकट के चक्कर में भाजपा में शामिल होने का लालच मांगेराम गुप्ता के रसूख तो गया ही, साथ ही दूसरी पार्टियों का उनपर से विश्वास भी। अपनी आखिरी सियासी पारी खेलने या बेटे महावीर को विधायक बनाने की अन्तिम सियासी ख्वाहिश पूरी करने के ख्वाब देख रहे मांगेराम गुप्ता ने भाजपा की सौदेबाजी में शामिल होकर अपने नाम को बदनाम करवा लिया। भाजपा के चक्कर में पड़कर मांगेराम गुप्ता ने बड़ा सियासी नुकसान कर लिया है।

बेटे को विधायक बनाने का सपना ख्वाब तो नहीं बनकर रह जाएगा
एक तरफ उन्होंने भाजपा के प्रस्ताव को ठोकर मार कर वहां के दरवाजे खुद बंद कर दिए हैं तो दूसरी तरफ उन्होंने जेजेपी के भरोसे को तोड़ने का काम कर विश्वास खो दिया। देखना अब लाजमी है कि भाजपा इस फजीहत से किस तरह बाहर निकलती है और मांगेराम गुप्ता अपने ऊपर लगे लालच के धब्बे को किस तरह से दूर करते हैं। क्योंकि उन्हें देखकर यही बात जहन से निकली है “ गुप्ता ने घर के न घाट के।”

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