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‘जननायक सेवादल’ कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना

Hisar Today

कांग्रेस पार्टी कि नींव कहे जाने वाले “सेवा दल” कि स्थापना पद्मविभूषण डॉ नारायण सुब्बाराव हार्डिकर ने 1 जनवरी 1924 में की थी, भाजपा को जमीनी स्तर पर मजबूत कर सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने वाले आरएसएस की स्थापना 92 वर्षों पूर्व 27 सितंबर 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेगडेवार ने की। आज कांग्रेस और भाजपा के नक्शेकदम पर चलते हुए हरियाणा में इनेलो की ताकत को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने एवं पार्टी के कार्यकर्ताओं में अनुशासन का निर्माण करने के लिए ताऊ देवीलाल की विरासत को आगे ले जाते हुए सांसद दुष्यंत चौटाला ने “जननायक सेवा दल” को गति देने का काम किया हैं। दुष्यंत चौटाला के इस कदम के साथ हरियाणा में जाट और गैर-जाट सियासत के बीच प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने एक नया प्लेटफार्म तैयार कर दिया है। 2019 चुनावों के पहले से ही ‘जननायक सेवादल’ इनेलो पार्टी की नींव और जनता के बीच पकड़ रखने के लिए पार्टी की तरफ से सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर काम करता दिखाई देगा।

“जननायक सेवादल” के गठन के साथ, इनेलो ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि 2019 का आगामी लोकसभा एवं विधानसभा चुनावों में वह पूर्व उपप्रधानमंत्री स्व. चौधरी देवीलाल के चेहरे को आगे रखकर चुनाव में उतरेगी। वैसे तो, जननायक सेवादल का गठन 2002 में ही पूर्व सांसद व इनेलो प्रधान महासचिव अजय सिंह चौटाला ने कर दिया था। उनके जेल जाने के बाद से यह संगठन पूरी तरह से निष्क्रिय था। परन्तु अब 2019 के आगमन के पूर्व अजय चौटाला के बेटे सांसद दुष्यंत सिंह चौटाला ने जननायक सेवादल को पुनर्जीवित करने का काम किया है। यह दल भले ही सक्रिय राजनीति का हिस्सा न हो, मगर इनेलो की गतिमान राजनीति में इसकी भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। सांसद दुष्यंत चौटाला का यह कदम उनकी राजनैतिक भविष्यगामी सोच को प्रदर्शित करता है।

राजनीतिक हलकों में लोग दुष्यंत चौटाला के इस कदम को लेकर यह कयास लगा रहे हैं कि दुष्यंत पार्टी में खुद के बलबूते, अपनी स्वच्छ छवि और मजबूत इरादों के दम पर 2019 चुनाव के पहले खुद को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश करना चाहते हैं। जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर बनाए गए इस संगठन के 7 अहम पदाधिकारियों की नियुक्ति भी हो चुकी है। इन नियुक्तियों के साथ अब सभी 10 लोकसभा क्षेत्रों के प्रभारियों के साथ-साथ 22 जिला, 90 हलका प्रभारी नियुक्त होंगे। दुष्यंत ने सेवादल के नियम इतने कड़े कर दिए हैं कि यह पार्टी के साथ समानांतर काम करेगा, लेकिन इसके पदाधिकारियों, सदस्यों को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी। इसमें शामिल होने वालों को यह संकल्प-पत्र देना होगा कि वे आगामी 5 वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ेंगे। गौरतलब है कि आरएसएस की भांति इनेलो के इस ‘जननायक सेवादल’ का एक विशेष हरे रंग का ड्रैस कोड भी होगा।

इन दिनों चौटाला परिवार के अंदर आपसी रिश्तों कि कड़वाहट की भी चर्चाएं जोरों पर हैं। इनेलो की राजनीतिक विरासत का हकदार कौन होगा? सभी की निगाहें इसी फैसले पर टिकी हैं। अगर पार्टी को मजबूत और बिखरने से रोकना हैं तो इसके लिए संगठनात्मक ताकत को मजबूत करना जरुरी है। बता दें कि भाजपा की तरह जननायक सेवादल पूरी पार्टी ही नहीं बल्कि पार्टी के नेताओं का भी पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगा। पार्टी को लेकर प्रदेशभर से फीडबैक जुटाया जाएगा। मौजूदा सांसदों व विधायकों की ही नहीं बल्कि आगामी चुनावों में टिकट मांगने वाले नेताओं के कार्यो का रिपोर्ट कार्ड भी तैयार करने की जिम्मेदारी जननायक सेवादल से सदस्यों को होगी। दुष्यंत चौटाला का यह कदम जहां उनको मुख्यमंत्री के मजबूत दावेदार के तौर पर खड़ा करेगा? क्या दुष्यंत खुद की समानांतर ताकत बढ़ा रहे हैं? क्या दुष्यंत जाट के विभाजित वोटों को दुबारा इनेलो के पाले में लाना चाहते हंै? इन सवालों का जवाब तो खुद 2019 के चुनावों में दिखाई देगा।

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