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क्या अभय चौटाला से हार गए उनके पिता ओमप्रकाश चौटाला

Hisar Today

“लोकराज लोकलाज से चलता है।” चौधरी देवीलाल या यूं कहे ताऊ देवीलाल द्वारा बनाई हर पार्टी में यही नारा पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र का सबसे बड़ा ब्रह्म वाक्य के तौर पर इनेलो की सोच को प्रदर्शित करता है। स्वर्गीय देवीलाल की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी पूर्व मुख्यमंत्री औमप्रकाश चौटाला भी ताऊ के विचारों पर चलने का दावा करते हुए 40 साल से भी अधिक समय से अपने राजनीतिक सफर की सीढ़ी तय करते जा रहे हैं। प्रदेश के कई बार मुख्यमंत्री रहे अौमप्रकाश चौटाला को पंचायती सोच में विश्वास रखने वाला और वर्करों को अहमियत देने वाला नेता माना जाता है, लेकिन आज उन्होंने इन दोनों ही पहचानों को खुद ही धूमिल कर दिया है। औमप्रकाश चौटाला ने आज अपने पिता के सबसे बड़े नारे का मजाक बना दिया। औमप्रकाश चौटाला ने पैरोल से बाहर आते ही गुरुग्राम में हुई इनेलो की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में लोकलाज की बजाय लोभराज का ठप्पा लगवा लिया।

यह बात इसलिए कह रहे हैं क्यूंकि औमप्रकाश चौटाला ने अपने बड़े बेटे अजय चौटाला के परिवार द्वारा पार्टी की मजबूती के लिए 40 साल तक बहाए गए पसीने को अनदेखा करते हुए अभय चौटाला के 4 साल के कार्यकाल पर अपनी पसंद की मुहर लगा दी। इतना ही नहीं उनकी मौजूदगी में पार्टी के संसदीय दल के नेता, देश के सर्वश्रेष्ठ और सबसे लोकप्रिय सांसद, देश के सबसे युवा सांसद व कैडर के सबसे चहेते नेता दुष्यंत चौटाला को बोलने का भी मौका नहीं दिया। ऐसा माना जा रहा है कि दुष्यंत की लोकप्रियता के चलते अभय चौटाला के इशारे पर पार्टी के उन छोटे-मोटे नेताओं को कार्यकारिणी की बैठक में बोलने का अवसर नहीं दिया गया जो सांसद दुष्यंत चौटाला के बेहद करीबी और जो दुष्यंत के कार्यों की तारीफ करने वाले थे। ऐसे सभी नेताओं का नाम बोलने वाले वक्ताओं को सूची से काट दिया गया। सूत्रों का मानना है कि पार्टी के जिन नेताओं ने दुष्यंत चौटाला को बुलाने की मांग की, उनको सरेआम कांग्रेसी कहा गया और उनको हाथ पकड़कर व मुंह बंद करके बाहर निकाल दिया गया।

इनेलो की बैठक में पहली बार बाहरी गुंडों को एंट्री दी गई जबकि दुष्यंत के करीबी नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया गया क्या यह घटना इस बात का सबूत है कि चौटाला परिवार के बारे में जो चर्चाएं बाहर चल रही थी, वो कही न कही सही साबित हो रही हैं या यह कार्यकर्ताओं में विभाजन कितना है उसे परखने का जरिया है, या कोई यह देखना चाहता हो कि दुष्यंत और अभय के साथ कितने कार्यकर्ता खड़े हैं, कितने विश्वासपात्र हैं? हालांकि भरी सभा में दुष्यंत और उनके कार्यकर्ताओं का अपमान और औमप्रकाश चौटाला की धृतराष्ट्र की भूमिका पर आज उनके ही कार्यकर्ता सवाल उठाने लगे हैं। औमप्रकाश चौटाला ने जिस प्रकार बड़े बेटे अजय के परिवार को भरी सभा में बेइज्जत कर छोटे बेटे अभय चौटाला की तारीफों के पुल बांधे। इससे यह तय हो गया कि चौटाला परिवार में जल्द सत्ता और विरासत की लड़ाई में बंटवारा न हो जाए। सूत्रों का मानना है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत इनेलो राज्य कार्यकारिणी की बैठक को हाईजैक किया गया।

इसमें सिर्फ अभय चौटाला के हिसाब से सारी कार्यवाही को अंजाम दिया गया। यह बड़े हैरत की बात है कि जिस दुष्यंत और दिग्विजय की मेहनत और समर्पण के चलते इनेलो पार्टी का प्रदेश में दबदबा है, उन्हीं की मेहनत को नजरअंदाज करते हुए औमप्रकाश चौटाला ने उन्हें दरकिनार कर दिया। जिस तरह से उनके सामने उनके ही पौते दुष्यंत चौटाला को बोलने नहीं दिया गया, उनके समर्थकों को धक्के मार कर बाहर कर दिया गया और जिस तरह पार्टी के नेताओं को ही कांग्रेसी एजेंट कह दिया गया, वह इस बात का प्रतीक है कि औमप्रकाश चौटाला अभय चौटाला के दबाव में हैं और अपनी भूमिका से न्याय करने की बजाय सरेआम नाइंसाफी कर गए। पार्टी और परिवार को एकजुट रखने की जिम्मेदारी पूर्व सीएम औमप्रकाश चौटाला के कंधों पर है। उनका फैंसला ही इनेलो के भविष्य दिशा तय करेगा।

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