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कुरुक्षेत्र का ‘रण’ आसान नहीं भाजपा के लिए

Hisar Today

सन् 1977 में अस्तित्व में आने से पहले कुरूक्षेत्र लोकसभा सीट का कोई वजूद नहीं था और यह क्षेत्र कैथल लोकसभा सीट का हिस्सा थी। कैथल सीट 1957 में बनी थी और 1971 तक वजूद में रही। 1957 से 1971 तक हुए चार लोकसभा चुनावों में इस सीट पर हमेशा कांग्रेस के उम्मीदवारों ने ही बाजी मारी। बाबू मूलचंद जैन (जो बाद में हरियाणा के वित्त मंत्री भी रहे) कैथल सीट से जीतने वाले पहले सांसद थे। इसके बाद 1962 में कांग्रेस के देवी दत्त पुरी और 1967 व 1971 में गुलजारी लाल नंदा कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर यहां से विजयी हुए।

गुलजारी लाल नंदा देश में दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे थे और अनेक महत्वपूर्ण केंद्रीय मंत्रालयों का प्रभार भी उनके पास रहा था। जाने-माने राजनेता गुलजारी लाल नंदा की वजह से इस सीट की आज भी एक अलग ही प्रतिष्ठा है। प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन पर मई 1964 में और लाल बहादुर शास्त्री के निधन पर जनवरी 1966 में कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे गुलजारी लाल नंदा इस क्षेत्र का 1967 और 1971 प्रतिनिधित्व कर चुके हैं, लेकिन तब इस सीट का नाम कैथल लोकसभा सीट था।

लगभग 13 लाख मतदाताओं वाली कुरूक्षेत्र लोकसभा सीट पर लगभग सात लाख पुरूष और तकरीबन छह लाख महिला मतदाता हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या जाट मतदाताओं की है, जोकि 2,25,000 के करीब हैं। 1999 में कैलाशो देवी (438701 वोट) ने कांग्रेस के ओमप्रकाश जिंदल (275091 वोट) को हराकर यह सीट जीती। इस बार इनेलो का बीजेपी के साथ गठबंधन था। लेकिन 2004 में ओमप्रकाश जिंदल के बेटे नवीन जिंदल कांग्रेस की टिकट पर मैदान में उतरे और उन्होंने 3,62,054 वोट लेकर इनेलो सुप्रीमो औमप्रकाश चौटाला के बेटे अभय सिंह चौटाला (201864 वोट) को भारी अंतर से पराजित किया।

इसके बाद 2009 में भी नवीन जिंदल ने ही बाजी मारी और 397204 वोट बटोर कर इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक कुमार अरोड़ा (278475 वोट) को करारी शिकस्त दी। इस बार भी इनेलो व बीजेपी का गठबंधन था, लेकिन बात नहीं बन सकी। आखिर 2014 में पहली बार बीजेपी को इस सीट पर जीत नसीब हुई और उसके प्रत्याशी राजकुमार सैनी (4,18,112 वोट) ने इनेलो के प्रत्याशी बलबीर सैनी (2,88,376 वोट) को सवा लाख से अधिक मतों से पराजित कर यह सीट जीती। कांग्रेस के नवीन जिंदल 2,87,722 वोट ले कर तीसरे स्थान पर रहे थे जबकि बसपा के प्रत्याशी छत्तर सिंह 68,926 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे थे । आम आदमी पार्टी की प्रत्याशी बलविंदर कौर सिर्फ 32,554 वोट ही ले पाईं थीं ।

जहां तक आगामी लोकसभा चुनाव का सवाल है, इस बार बीजेपी की स्थिति यहां पतली दिखाई देती है। बीजेपी के मौजूदा सांसद राजकुमार सैनी इस समय बगावती मूड में दिखाई देते हुए उन्होंने लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का गठन कर भाजपा के खिलाफ ताल ठोकी है। ऐसे में बीजेपी को चुनाव मैदान में उतरने के लिए किसी नए उम्मीदवार को ढ़ूंढ़ना होगा और बिना किसी लहर के ही चुनावी जंग लड़नी होगी।
इस सीट पर अनेक बार जीत का डंका बजा चुकी कांग्रेस की तरफ से इस बार भी यदि कांग्रेस मंे रहे तो पूर्व सांसद नवीन जिंदल के ही उतरने की प्रबल संभावना है। वे हरियाणा कांग्रेस के दोनों प्रमुख गुटों को साध कर चल रहे हैं और कांग्रेस आलाकमान की गुड बुक में भी उनका नाम काफी ऊपर है । वैसे तो पूर्व सांसद कैलाशो देवी भी कांग्रेस की टिकट की दावेदार बन सकती हैं, लेकिन नवीन जिंदल की टिकट काटना काफी टेढ़ी खीर होगी ।

जहां तक इनेलो बसपा गठबंधन का सवाल है तो इनेलो इस सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ने को शायद कतई तैयार नहीं होगा। इस सीट पर इनेलो शुरू से काफी मजबूत स्थिति में रहा है। यदि इस दफा बसपा के साथ इनेलो को ठीकठाक वोट मिल गये तो यह गठबंधन इस सीट को जीत भी सकता है। फिलहाल इस सीट पर प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा व रामपाल माजरा इस सीट पर प्रमुख दावेदार नजर आ रहे हैं।

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