संपादकीय

किसानों का सोना आग में स्वाह, क्या अब नेताओं को आएगी किसानों की याद ?

Hisar Today

चुनाव में जहां लोग पसीने बहा रहे हैं, वहीं ठीक दूसरी तरफ किसानों के आंसू निकल रहे हैं। उन पर ऐसी आफत आ चुकी है कि जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। कहीं बाल्टी में पानी भर कर, कहीं तेज हवा में फैलाती आग के धुएं में तपतपी हवा के बीच एक वृक्ष के डंठल के साथ आग बुझाते किसान ऐसे बेबस नजर आ रहे थे। हम तो शहरों में रहते हंै, मगर असली पसीने तो यह किसान ही बहाते हैं। दुःख होता है जब मैं महीनों के अपनी खेती की रक्षा करते हुए किसानों को इस आग की चपेट में आये उनके मेहनत को जलते देखता हूं। यह आग का राक्षस गांव खरबला, भैणी अमीरपुर, पेटवाड़, भकलाना, नारनौंद औरंगशाहपुर, राखी, गुराना व डाटा गांव के खेतों में पहुंच गया। सूचना मिलते ही चुनाव की गहमागहमी के बीच नारनौंद व हांसी से दमकल विभाग की गाड़ियां तुरत पहुंची और आग पर उन्होंने काबू पाया। पता है अन्नदाता की आग से सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल, एक कम्बाईन और मोटरसाईकिल भी जल कर खाक हो गयी। वैसा बताया जाता है कि गांव खरबला के मामन के खेत में कम्बाइन मशीन गेहूं की कटाई कर रही थी। अचानक से कम्बाईन में आग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि तुरंत ही उसने गेहूं की खड़ी फसल को भी अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना फायर ब्रिगेड व पुलिस को दी। सूचना मिलते ही खरबला, सीसर व रोशन खेड़ा गांव के सैकड़ों ग्रामीण ट्रैक्टरों की मदद से वहां पहुंचे और आग पर काबू पाना शुरू कर दिया। आग से मामन की 6 एकड़, धर्म सिंह की 6 एकड़, अनिल की 5 एकड़, विक्की की 3 एकड़, धमेन्द्र की 3 एकड़, बलवंत की 2 एकड़, शमशेर की 5 एकड़, शिव प्रकाश की 2 एकड़, दिवान सिंह की 4 एकड़, धर्मबीर की 2 एकड़, अमीर की 3 एकड़ व जगदीश की 3 एकड़ खड़ी गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। वहीं काफी किसानों के गेहूं के फानों को भी आग ने अपनी चपेट में ले लिया।

वहीं गांव पेटवाड़ के एक किसान के दो एकड़ गेहूं की फसल, भकलाना के किसान जसबीर की ढाई एकड़, गांव भैणी अमीरपुर के सुरेन्द्र के चार एकड़ फाने व सतबीर के तीन एकड़ के फाने जलकर राख हो गए। इसके अलावा गांव गुराना में भी फसल पर आग ने कहर बरपाया। इन किसानों की मदद के लिए अब अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति ने आगजनी से प्रभावित किसानों की मदद के लिए सामाजिक सहयोग मांगा है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार अपनी टीम के साथ गांव भादड़ा पहुंचे। गांव में एक किसान की 15 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। पचार ने ग्रामीणों से प्रभावित किसान की मदद के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस किसान पर यह आपदा आती है उस पर आर्थिक बोझ आ पड़ता है। इससे उबरने में अन्य लोग सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने हर किसान से 25 किलो प्रति एकड़ की दर से मदद करने की अपील की। उनकी अपील पर ग्रामीणों ने सहमति जताई। पचार ने कहा कि अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति इस अभियान को पूरे देश में पहुंचाएगी। इससे कोई भी किसान स्वयं को दु:ख की घड़ी में अकेला महसूस न करें। मगर क्या यह लड़ाई ऐसे समय पर सफल हो पायेगी जब चुनाव सर पर है।  

झज्जर स्थित गुभाना और माजरी गांव में 8 एकड़ गेहूं की फसल जल कर राख हो गई। दोनों गांवों के किसानों ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ट्रांसफार्मर से चिंगारी निकलने से आग लगी है। यह ऐसा नजारा था जब एक तरफ जहां ट्रेक्टर से आग को दबाकर काबू करने का प्रयास किया जा रहा था, तो वहीं बच्चों से लेकर औरतंे घर से भाग भाग कर इन फसलों पर हैंड पम्प से पानी डालकर उन्हें बुझाने का प्रयास कर रही थी। किसानो के अरमानो पर पानी फेर दिया। 

चरखी दादरी में भी चिलचिलाती गर्मी के बीच गांव चरखी व खेड़ीबूरा में 8 एकड़ गेहूं की फसल और अन्य सामान जलकर राख हो गया। फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियों ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। करनाल में भी यही हाल। अब सवाल यह उठ खड़ा होता है कि क्या अब चुनाव में खड़े किसी नेताओं को किसानों की याद आएगी? 

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