संपादकीय

ओए दलबदलू काम कर वरना टिकट “कट”

Hisar Today

हिसार लोकसभा चुनाव में टिकट के लालच में दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल दलबदलू नेताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी टिकट बचाने के लिए काफी मेहनत कर पसीने बहाने पड़ रहे हैं। भाई सुना है इसमें से कुछ तो लोकसभा की दौड़ में शामिल थे। ये लोग जोशोखरोश के साथ अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा में अपना राजनीतिक भविष्य ढूंढने के लिए घुस आए थे। खैर यह राजनीति में रहना है तो समय रहते कदम तो उठाना पड़ेगा।
मगर इन नेताओं पर वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने जिम्मेदारी थोप रखी है कि अब बयानबाजी और भाषणबाजी से कुछ नहीं होगा। परफॉरमेंस भी दिखानी होगी। तभी विधानसभा में नम्बर लगेगा। वरना टिकट की बात मत करना। कुछ नेता तो ऐसे हैं जो दशकों से भाजपा में अपना खून पसीना बहा चुके हैं, अब उनके सामने भी मुसीबत है कि भाई क्या करंे कि नेताजी को खुश कर सकें। इसलिए क्यों न बृजेन्द्र सिंह के प्रचार में ही साथ हो लिया जाए, चेहरा दिखेगा तो पार्टी को लगेगा कि चलो जीजान से काम कर रहा है। पता चला दिल से काम किया और बाद में मेवा कोई और खा जाए। मेवा से याद आया, यह दूषित और मिलावटी भी बाजार में मिलता है। मेवा की मिठाई खाये तो हाजमा खराब हो सकता है। मगर यहां मेवा कैसा भी हो इन नेताओं को खाने में कोई परहेज नहीं।
अपना दम खम दिखाने के लिए भाजपा के छूटबूट नेता गली-गली नुक्कड़ सभा और प्रचार कर रहे हैं। वोट लाने के लिए उन्होंने पार्षदों को भी नहीं छोड़ा। कितनों को तो खुद मुख्यमंत्री की उपस्थिती में पार्टी ज्वाइन करवाई। हंसते-हंसते महाशय ने ज्वाइन भी कर ली पार्टी। पता है क्यों? भाई डिप्टी और सीनियर डिप्टी मेयर का चुनाव जो होना है। सब अपना गेम फिक्स करने में लगे हैं। अगर वार्ड से ज्यादा वोट दिला दिया और नेताओं की जी हुजूरी कर ली तो कम से कम आस तो होगी पद मिलने की। लोभ-माया यह दो महत्वपूर्ण पहलू हैं राजनीति में, तभी तो जनसेवा का नाम करते हुए लोग इस पार्टी से दूसरी पार्टी छलांग लगा लेते हैं। वैसे मेरा मानना है कि दुख की घडी में जो आपका साथ छोड़ दे ऐसा एहसान फरामोश और कोई नहीं हो सकता और ऐसे इंसानों पर कभी भी जीवन में भरोसा नहीं किया जा सकता। मगर भाजपा में शामिल कुछ लोग ऐसे हैं उनके बारे में कुछ-कुछ यही बात चरितार्थ होती है। खैर वैसे ये उसकी मर्जी। अच्छा है लोकतंत्र में मुझे मेरे मत रखने का अधिकार है। मगर मुझे लगता है कि दूसरी पार्टी में घुसने वाले क्या अपना मत और अपने विचार उसी जोशीले अंदाज में रख सकेंगे? भगवान जानें। मगर चलो यह चुनाव अच्छा है 5 साल में एक बार आता है। कम से कम उन लोगों का चाल चरित्र भी तो पता चल जाता है जिसे हमने वोट दिया या जो वोट के लिए हमारे घर भटकता फिरता रहा और बाद में शक्ल तक नहीं दिखाता। वैसे मैंने सुना है कि हाल में भाजपा पार्टी में जाने वाले लोगों के कारण वर्षों से काम करने वाले पार्टी के अंदर के लोग चिंता में है कि अब उनका क्या होगा? यानी जमीं वो बनाये और फायदा कोई और उठाए। वैसे पिछले काफी दिनों से मैं सुन रहा हूं कि भाजपा के विधायक महोदय ने यहां पर बहुत विकास किया। ऐसा विकास जो 70 साल में नहीं हुआ। ऐसा विकास जो किसी सांसद ने आज तक नहीं किया? ऐसा विकास जिसको देखकर विपक्ष की बोलती बंद हो जाए। कल ही मैंने यह विकास देखा। पता है प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव डॉ अनिल जैन को यह विकास देखने के लिए पैदल चलकर जाना पड़ा। मेरा मतलब है कि इतना ट्रैफिक जाम और कार्यकर्ताओं द्वारा मनमाने तरीके से की गई पार्किंग के कारण अनिल जैन को कार्यक्रम स्थल तक पदयात्रा निकालनी पड़ी है और उनके साथ तब मौजूद थे विकास के देवता डॉ कमल गुप्ता। पता है न आप मतदाताओं को कि हिसार की सबसे बड़ी समस्या क्या है? समस्या है हिच्चकोले खाते ट्रैफिक जाम में हमेशा त्रस्त सफर। मगर मैं अब भी आशावादी हूं निराश नहीं। मैं अब भी उस विकास पुरुष के विकास को ढूंढ रहा हूं, आशा करता हूं कि चुनाव खत्म होते होते मुझे वो विकास दिख जाए।

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