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एक्सक्लूसिव खबरों का दबाव,प्रशासनिक लापरवाही ले डूबेगी फ्यूचर मेकर को या होगी निष्पक्ष जांच?

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प्रोडक्ट बेस्ड होने के दम पर करीबन 1 करोड़ लोगों को रोजगार मुहैया करवाने का दावा करने वाली फ्यूचर मेकर कंपनी पर चल रही तेलंगाना व हरियाणा पुलिस की कार्रवाई को लेकर हर तरफ चर्चा का बाजार गर्म है। कंपनी के डिस्ट्रीब्यूर्स हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, राजस्थान व महाराष्ट्र आदि समस्त भारत में फैले हुए हैं, जो टकटकी बांधे सरकार की तरफ देख रहे हैं। डिस्ट्रीब्यूटर्स का मानना है किसी एक संस्थान व किसी व्यक्ति विशेष की खामी, लापरवाही या जुर्म की सजा करोड़ों लोगों को नहीं दी जानी चाहिए। कंपनी जितने रुपए लेती है उतने का ही प्रोडक्ट उपलब्ध करवाकर देश के पर्यावरण व जहर मुक्त खेती में भी अपना योगदान दे रही है। साथ ही फ्यूचर चैरिटबेल ट्रस्ट ‘मदर रसोई’ खाेलकर भूखे लोगों को भोजन करवा रही है। कंपनी से लोगों का रोजगार ही नहीं चलता बल्कि भावनात्मक लगाव भी है। कंपनी के सीएमडी निर्धन कन्याओं की शादी में भी दिल खोलकर आर्थिक मदद करके सहयोग भी निरंतर करते आ रहे हैं। कंपनी से जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि उनका रुपया हमेशा समय पर मिला है व कंपनी को एक अवसर अवश्य देना चाहिए ताकि वह अपनी खामियों को दूर कर सकें, ताकि कंपनी से जुड़े एक करोड़ लोगों के भविष्य से खिलवाड़ न हो। पूर्व में भी सरकार से ऐसे गलत फैसले हुए हैं जिससे सिर्फ अाम जनता का नुकसान हुआ है।

फ्यूचर मेकर के सीएमडी राधेश्याम की गिरफ्तारी के बाद हर अखबार में उनकी खबर सुर्खियों में बनी हुई हैं। सभी पत्रकार इस खोजबीन में लग गए कि इस मामले में ऐसा क्या मिल जाए कि उनकी खबर दूसरे अखबार के पत्रकारों से भिन्न नजर आए। एक्सक्लूसिव की मारामारी… एक्सक्लूसिव के चक्कर में कोई पहुंच गया फ्यूचर मेकर के दफ्तर, तो कोई पहुंच गया घर, तो काेई तेलंगाना, मगर फ्यूचर मेकर के डिस्ट्रीब्यूटर्स इस इंतजार में रहे हैं कि शायद कोई उनके पास भी आता और उनकी भी बात सुनता। खैर किसी से जोर जबरदस्ती तो नहीं कर सकते, मगर हां हकीकत तो यह है कि अगर गलती है, तो भुगतना पड़ेगा।

हर दिन की खबरों ने फ्यूचर मेकर के डिस्ट्रीब्यूटरों में अफरातफरी का माहौल पैदा कर दिया है। इन खबरों के अखबारों के प्रकाशन के बाद कोई मोर्चा निकालने लगा तो किसी ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई। सवाल यह उठ खड़ा होता है कि जब तक फ्यूचर मेकर की ऐसी खबर सुर्खियों में नहीं थी, तब तक किसी डिस्ट्रीब्यूटर और अखबारों को इसमें कोई खामी नहीं दिखी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने फ्यूचर मेकर चैरिटेबल ट्रस्ट को पुरस्कार देने के समय नहीं पूछा कि क्या इस कंपनी के पास लाइसेंस है या यह कंपनी नियमों का पालन कर रही है। सब खामोश थे। अचानक इन खबरों के समाचार पत्रों में छपाई के बाद लोगों की, नेताओं की और प्रशासन की बुद्धि खुली कि कुछ तो गलत हैं। क्या यह इन लोगों को बाद में समझ आया या समाचार पत्रों में एकतरफा खबरों के बाद लोगों को समझ आया। इस सवाल का जवाब समझदार भलीभांति जानते हैं। किसने क्या कहा? क्या छापा? सवाल यह नहीं, सवाल यह है कि सरकार अब तक कहां थी। क्या यह गलती सरकार की नहीं कि जिस कंपनी पर अभी जो आरोप लग रहे हैं, वो कहीं न कहीं प्रशासन की लापरवाही, कमियां और सरकार की निष्क्रियता को दर्शाता है।

आज करोड़ों डिस्ट्रीब्यूटर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि उनके साथ सरकार ने बहुत ज्यादती की है, क्योंकि अगर सरकारी बैंकों के करोड़ों के लोन डकारने वालों के साथ सरकार हमदर्दी दिखा सकती है तो फिर फ्यूचर मेकर कंपनी के मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। यह सब बातें किसी किसी गहरी साजिश की ओर इशारा भी कर रही हैं। सरकार को बिना किसी मीडिया व पूर्वाग्रह के करोड़ों लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। सरकार और पुलिस प्रशासन को क्यों नहीं लगा कि डायरेक्ट सेलिंग बिजनेस में जो कंपनी देश में अव्वल पायदान पर है, जिस कंपनी से लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोग जुड़े है, उन पर कार्रवाई से पूर्व उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

डिस्ट्रीब्यूटर की यह मांग है कि सरकार या पुलिस प्रशासन पहले कंपनी को नोटिस देते और कुछ समय की मौहलत देते, फिर उनका पक्ष जानते, संतुष्ट न होने पर उन पर कार्यवाही करते, मगर सरकार ने अरबों रुपए की कंपनी पर गैर जिम्मेदाराना तरीके से कार्यवाही करके कंपनी से जुड़े 1 करोड़ डिस्ट्रिब्यूटरों का रोजगार छीन लिया व कंपनी की संभावनाओं पर कुठाराघात करने का प्रयास किया है।

ऐसा करके करोड़ों डिस्ट्रीब्यूटरों के साथ धोखा किया है। एमएलएम कंपनियों व चिटफंड कंपनियों के मामले बार-बार सामने आ रहे हैं। एक कंपनी में खामी मिलते ही इस प्रकार की सभी कंपनियों पर कार्रवाई की जाती है। जिससे सही प्रकार से काम करने वाली कंपनियां भी अपना काम नहीं कर पाती हैं। कुछ वर्ष पूर्व पीएसीएल पर भी इसी प्रकार कार्रवाई की गई थी, लेकिन पीएसीएल के पास फंड होने व रुपए होने के बावजूद भी निवेशक अपना रुपया पाने के लिए अब भी भटक रहे हैं, लेकिन निवेशकों को उनके रुपए नहीं मिले हैं। आमजन का पैसा सिस्टम में फंसकर रह जाता है। दरअसल ये मामला वर्ष 2011 में इंद्रगंज पुलिस में आया जब पीएसीएल कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया था।

अधूरी तैयारी व मीडिया का दबाव प्रशासन को गलती करने पर मजबूर कर देता है व आधी अधूरी तैयारी के साथ कार्रवाई करके करोड़ों लोगाें को अधर में लटका देती है। हर कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर्स व निवेशक चाहते हैं जांच सही तरीके से हो व कंपनी मालिकों को एक अवसर देना चाहिए ताकि वे अपनी खामियों को दूर करके कंपनी का संचालन सही तरीके से कर सकें व कंपनी निरंतर उन्नति कर सके। फ्यूचर मेकर के डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि तेलंगाना पुिलस ने एकदम से कंपनी ऑफिस को सील करके ज्यादती की है।

कंपनी के सीएमडी राधेश्याम को कंपनी की खामियों काे दुरुस्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए था, ताकि कंपनी से जुड़े लगभग 1 करोड़ लोगों को जो रोजगार मिला हुआ है, उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का कोई खिलवाड़ न हो।

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