संपादकीय

आज हिसार में छाई रही चप्पल तो कहीं बूथ रहे खाली

Hisar Today

आज जहां देखो वहां चप्पल ही चप्पल के पोस्टर पड़े थे। हर किसी की नजर उस पर ना चाहते हुए भी पड़ रही थी। चाहे भाजपा के चाहने वाले हों, चाहे अन्य पार्टी को चाहने वाले सभी उस चप्पल से होकर गुजर रहे थे, देख रहे थे, पाँव रख रहे थे और सोच रहे थे कि आखिर इतनी चप्पल यहां कैसे आई और कौन छोड़ गया। जी हां, आज हिसार के हर बूथ, चौराहों, गलियों, घरों के बाहर चप्पल का पैम्पलेट जमीन पर बिखरा हुआ नजर आ रहा था। हजारों के संख्या में फैले इस पैम्पलेट को किसने डाला यह किसी को पता नहीं, मगर हां यह पैम्पलेट इशारा कर रहा था कि हिसार में छाई है “चप्पल”। दरहसल यह ऐसा प्रचार था जो मेयर चुनाव में भी भाजपा द्वारा दिखाई दिया था। मगर इस बार चप्पल ने बाजी मार ली थी। कांग्रेस भवन के सामने हो, पटेल नगर, सेक्टर 16-17, नवदीप कॉलोनी, आजाद नगर, राजगढ़ रोड़ हर जगह यह चप्पल दिखाई दे रही थी। वैसे चुनाव में ऐसे किस्से अनेक बार देखने मिलते हैं।
खैर मुख्य मुद्दा यह भी है कि कल हद्द से भी ज्यादा अफवाहों का बाजार रात तक गरम रहा। वैसे लगातार 3 दिनों से हमेशा फेसबुक में एक्टिव रहने वाले 3 प्रत्याशी भाजपा से बृजेन्द्र, कांग्रेस से भव्य और जननायक जनता पार्टी से दुष्यंत चौटाला समेत लोसपा, सीपीआई के प्रत्याशियों में से कुछ लोग ज्यादा एक्टिव नजर नहीं आये। हमें पता है यह दिन उनके लिए खास है और यह पल उनकी तकदीर का फैंसला करेगा। मगर जो बैचनी-घबराहट कुछ प्रत्याशियों में साफ दिखाई दी। इन पार्टी के ही समर्थक पत्रकारों से जानकारी लेने की कोशिश में थे कि हवा किसकी है, कौन जीतेगा। हालांकि मैं एक बात कहना चाहूंगा कि मेयर चुनाव में भाजपा के कार्यकर्ता समर्थकों और पत्र प्रमुखों का जो जोश था वह जोश कहीं दिखाई नहीं दिया।
रिपोर्ट यह बताती है कि ग्राउंड स्तर पर काफी इलाकों में इन पार्टी के समर्थक, कार्यकर्ता गए ही नहीं कि उनके प्रत्याशियों को वोट दो। न कोई मतदाता को पूछ रहा था न तो लेके जा रहा था, मतदाता भी मनमुताबिक उठे और चल दिए वोट डालने। बता दें कि आज वही बात दिखाई दी, दोपहर 2 बजे तक बोगस वोट का भी मामला सामने आया। एक महिला नलवा विधानसभा क्षेत्र में वह वोट डालने पहुंची, पता चला उसका वोट तो कोई पहले ही डाल कर चला गया था। हालांकि वह महिला निराश हो कर उलटे पैर लौट गयी। किसी मतदाता का लिस्ट में मारा हुआ दिखाया गया। खुद हांसी में भी घटना सामने आयी जब कुछ मतदाताओं की पहले ही वोटिंग हो चुकी थी। यह थी आज मतदाता की अड़चन। साथ ही इस बार काफी पार्टी के पोलिंग बूथ पर सन्नाटा छाया रहा। बता दें कि इन दिग्गज पार्टी के प्रत्याशी यह भी चाहते थे कि गांव से वोटिंग ज्यादा हो, तो कुछ पार्टी का जोर शहरी मतदाता के प्रति था। इतना ही नहीं कुछ पार्टी तो अपने पैतृक गांव से वोटिंग करवाने जुटे हुए थे। क्यूंकि वहां के कुछ गांव ने तो वोटिंग का बहिष्कार किया गया था।
बता दें कि इस बार सभी पार्टी के समर्थक अचानक रातों-रात अपने-अपने फेसबुक पेज में यह पोस्ट करने लगे कि उनको डेरा समर्थन का साथ और समर्थन मिला है। भाजपा, कांग्रेस और जननायक जनता पार्टी समेत लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के इस चर्चाओं में खुद पड़ी थी। सभी लोगों में यह होड़ थी कि उनको डेरे का समर्थन मिल चुका है, हालांकि आने वाले नतीजे ही बताएंगे कि आखिर डेरा समर्थकों ने अपना समर्थन दिया किसे। वैसे इस बार चर्चा का विषय रहा पिंक बूथ। जहां महिलाओं ने पोलिंग की जिम्मेदारी संभाली थी और खास कर दिव्यांगों के लिए जो व्यवस्था कर रखी थी वह भी कबीले तारीफ रही।

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