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अपरिपक्व हाथों में सत्ता देने से कतरा रहे हैं औमप्रकाश चौटाला

Hisar Today

क्या दुष्यंत और दिग्विजय पर पार्टी सुप्रीमों औमप्रकाश चौटाला की कार्यवाई को बदले की भावना से जोड़कर देखना चाहिए या पार्टी में अनुशासन को लेकर उठाये गए कड़े कदमो को लेकर देखना चाहिए। वैसे इनेलो पार्टी के वरिष्ठ नेता समझते हैं कि औमप्रकाश चौटाला जो भी निर्णय लेंगे वह सही और सोच समझ कर लेने वालों में से एक है। जिस प्रकार दुष्यंत चौटाला से लेकर चौटाला चौधरी औमप्रकाश चौटाला के फैसले को सर्वोपरी बताते हुए उसको सही मान रहे हैं और अभी फिलहाल पार्टी से अलग होने का कोई फैसला नहीं लेना चाहते, उससे यह बात तो तय है कि मतभेद कितना ही हो मगर आज भी घर में ओमप्रकाश चौटाला से ऊपर कोई नहीं जाना चाहता। आज भी घर में उनका वही मान और सम्मान है जो पहले हुआ करता था। हरियाणा के प्रमुख विपक्षी दल इंडियन नेशनल लोकदल की अंदरूनी कलह अब सतह पर आ गई है। पार्टी सुप्रीमों औमप्रकाश चौटाला ने पार्टी को बचाने के लिए आज कड़े एक्शन लेते हुए पार्टी की युवा इकाई तथा छात्र विंग ‘इंडियन नेशनल स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन’ (इनसो) को भंग कर दिया है और निकट भविष्य में ही इनका पुनर्गठन करने का संकेत दिया है। यूथ विंग को जहां पार्टी के लोकसभा सांसद दुष्यंत चौटाला संभाल रहे थे, वहीं दिग्विजय सिंह चौटाला ‘इनसो’ के मुखिया के तौर पर काम कर रहे थे।

बड़े चौटाला के इस अप्रत्याशित कदम से दोनों भाइयों दुष्यंत चौटाला व दिग्विजय चौटाला को राजनीतिक रूप से करारा झटका लगा है। वैसे किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि औमप्रकाश चौटाला अपने पौत्रों को झटका देने के लिए एकाएक और इतनी जल्दी इतना बड़ा कदम उठा सकते हैं। वैसे औमप्रकाश चौटाला द्वारा उठाये कदम की आहट तो गोहाना रैली में ही हो गयी जब उनकी मौजूदगी में कार्यकर्ता एक दूसरे से ऐसे भीड़ रहे थे जैसे की किसी को किसी की परवाह नहीं हो। गौरतलब है कि पार्टी पर वर्चस्व को लेकर राज्य विधान सभा में विपक्ष के नेता और फिलहाल पार्टी पर बड़े चौटाला की ‘खड़ाऊ’ लेकर काबिज अभय सिंह चौटाला और उनके भतीजों-दुष्यंत चौटाला व दिग्विजय सिंह के बीच पिछले एक साल से चल रही रस्साकशी अब चरम पर पहुंच गई है। दुष्यंत चौटाला की युवा वर्ग में लगातार बढ़ रही लोकप्रियता पार्टी के बीच दरार पैदा करने का काम करने लगी थी। उनके समर्थकों ने उन्हें भावी मुख्यमंत्री के रूप में परोसना शुरू कर दिया था। अभय चौटाला को नापसंद करने वाले नेताओं व कार्यकर्त्ताओं की भीड़ दुष्यंत चौटाला के इर्द गिर्द जुटने लगी थी। बड़े चौटाला साहब को पार्टी में दो शक्ति केंद्र बनना गवारा नहीं हुआ तो आज उन्होंने अभय विरोधियों को कड़े तेवर दिखाते हुए पार्टी की दो महत्त्वपूर्ण इकाईयों को भंग कर दिया। उनके इस कदम से जाहिर है कि बड़े चौटाला अभी दुष्यंत व दिग्विजय को लंबी रेस के घोड़े के तौर पर आजमाने को तैयार नहीं हैं। स्पष्ट है कि वह आगामी चुनावों में अभय चौटाला पर ही दांव खेलने के मूड में है। शायद वो दुष्यंत व दिग्विजय के अपरिपक्व हाथों में पार्टी की बागडौर थमा कर राजनैतिक जुआ खेलने से बचना चाहते हैं।

इनेलो सुप्रीमो औमप्रकाश चौटाला ने पार्टी के पितृ पुरूष पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में सात अक्टूबर को गोहाना में आयोजित राज्य स्तरीय विशाल रैली में ही आज के एक्शन की भूमिका तैयार कर ली थी। रैली में दुष्यंत समर्थकों द्वारा अभय चौटाला की करी गई हूटिंग को उन्होंने उचित नहीं माना था और कहा था कि अनुशासनहीनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा था कि हूटिंग करने वालों को पार्टी से बाहर करने से भी वे पीछे नहीं हटेंगे । लेकिन किसी को पता नहीं था कि वह इतने जल्दी फैसला ले लेंगे। औमप्रकाश चौटाला के आज के कदम के बाद राजनैतिक गलियारों में चर्चा छिड़ गई है कि क्या इनेलो दो फाड़ होने के कगार पर पहुंच चुकी है? सूत्रों का मानना है कि हाल में अजय चौटाला को भी जेल के अंदर बाहर की रणनीति का पता चल चुका है हो सकता है कि वह खुद अपने बच्चों को कोई कठोर कदम उठाने के लिए बोल सकते हैं।

 

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