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अपने बुने जाल में फंसे अभय चाैटाला

Hisar Today

हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इनेलो में इन दिनों बड़ी सियासी घमासान चल रहा है। इस खेल में एक तरफ तो लोगों को पार्टी सुप्रीमो औमप्रकाश चौटाला नजर आ रहे हैं तो दूसरी तरफ सांसद दुष्यंत चौटाला। लेकिन सोशल मीडिया में यह चर्चा आम है कि इस पूरे खेल को प्लान करने वाले हरियाणा विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला अपने भतीजे दुष्यंत चौटाला को गेम से बाहर करने के चक्कर में खुद ही गेम से बाहर हो गए हैं। जिस चक्रव्यूह में फसाकर दुष्यंत चौटाला की लोकप्रियता खत्म करने की कोशिश की गई थी, सांसद दुष्यंत की समझदारी के चलते उस चक्रव्यूह में खुद अभय चौटाला ऐसे फंस गए कि शायद ही अब वो राजनीतिक वापसी कर पाए।सूत्रों के अनुसार अभय चौटाला लगातार अपने नजदीकी नेताओं के हाथों पार्टी सुप्रीमों औमप्रकाश चौटाला के पास ये संदेश पहुंचाते जा रहे हैं कि दुष्यंत चौटाला पार्टी में अनुशासनहीनता कर रहे हैं। वहीं अभय चौटाला पार्टी के अंदर भी अजय चौटाला, दुष्यंत चौटाला और उनके समर्थकों को ना सिर्फ अनदेखा करने लगे बल्कि सार्वजनिक रूप से अपमान भी करने की बात सामने आई। इनसो की सभा में जहां दिग्विजय और उनके कार्यकर्ताओं को अभय चौटाला ने लताड़ लगाई थी, वहीं गुरुग्राम में औमप्रकाश चौटाला की मौजूदगी में दुष्यंत चौटाला को बोलने के लिए समय न देने की घटना भी किसी से छुपी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सभी जगह से दुष्यंत की फोटो हटवाना भी उसी रणनीति का एक हिस्सा था।

इसी प्लान के तहत कुछ लोग एक टीम हायर करके सोशल मीडिया और बाकी माध्यमों से दुष्यंत चौटाला की छवि पर अटैक करने की कोशिश भी की। इसी प्लान के तहत सभी समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर दुष्यंत चौटाला को खलनायक बनाने की कोशिश भी की गई। ऐसा करके इनेलो दल के कुछ लोग एक समय के लिए पार्टी सुप्रीमों औमप्रकाश चौटाला को गुमराह करने में कामयाब भी हो गए और पार्टी की तरफ से दुष्यंत चौटाला का निष्कासन पत्र 18 जनपथ पहुंचवा दिया और बाद में इसी पत्र का सहारा लेकर सभी न्यूज पेपर में ये निकलवाना कि “अभय चौटाला होंगे वारिस” भी इसी प्लान का हिस्सा था ।लेकिन मजेदार बात ये रही कि दुष्यंत चौटाला बड़ी समझदारी से इस गेम को देखते रहे और सामने वाले को खेल खेलने देते रहे। बिना धैर्य खोए उन्होंने बार-बार अपील करके अपने समर्थकों को भी अनुशासन में रखा और खुद भी अनुशासित रहे।

क्योंकि दुष्यंत चौटाला समझते थे कि अभी तो पार्टी सुप्रीमों औमप्रकाश चौटाला 18 अक्टूबर तक बाहर हैं और काफी लोगों से मिलेंगे और सच्चाई उनके सामने आ ही जाएगी। अब दुष्यंत की लोकप्रियता, उनके समर्थकों की ताकत और उनके व्यवहार को देखकर औमप्रकाश चौटाला समझ चुके हैं कि दुष्यंत चौटाला के बिना सत्ता में आना तो दूर इनेलो क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा भी नहीं रख पाएगी। दुष्यंत चौटाला के बिना किसी बड़े शक्ति प्रदर्शन के पार्टी सुप्रीमों ये भी समझ गए कि अगर दुष्यंत चौटाला अलग पार्टी बनाते हैं तो ज्यादातर कार्यकर्ता दुष्यंत चौटाला का ही साथ देंगे। इसी के चलते अब औमप्रकाश चौटाला ने अपने परिवार के बाकी सदस्यों के साथ मिलकर दुष्यंत चौटाला को मनाने की कोशिश शुरू कर दी है। क्योंकि दुष्यंत चौटाला ने हमेशा औमप्रकाश चौटाला को ही मुख्यमंत्री बनाने की बात की है और हमेशा पार्टी सुप्रीमों की गरिमा का आदर किया है इसलिए इस पूरे खेल में दुष्यंत चौटाला की ना सिर्फ लोकप्रियता बढ़ी है बल्कि उनकी समझदारी के कारण राजनीति में भी उनका कद बढ़ा है। इस पूरे प्रकरण के बाद अब दुष्यंत चौटाला पार्टी का मुख्य चेहरा हो सकते हैं। अंत में अगर हम इस पूरे सियासी खेल के फायदे और नुकसान की बात करंे तो कह सकते हैं कि इस खेल में एक तो दुष्यंत चौटाला ने अपनी ताकत का अहसास पार्टी समेत बाकी पार्टियों को भी करवा दिया और खुद भी अपनी शक्ति का आंकलन कर लिया वही दूसरी तरफ अब इन सारे विवादों के बीच अभय चौटाला बिलकुल अलग थलग दिखाई देने लगे हैं।

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