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‘अजेय भारत और अटल बीजेपी’ साथ भाजपा चुनावी आगाज

Archana Tripathi,Today News

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन में बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विदाई भाषण के साथ एक तरह से 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों का शंखनाद कर दिया । इस मंथन बैठक में 2019 नहीं बल्कि 2022 में होने वाली भाजपा पर भी गहन मंथन किया गया। इसके साथ ही नरेंद्र मोदी के अगुवाई में भाजपा अब पूरी तरह से चुनाव अभियान के मूड में उतर जाएगी। इस दो दिवसीय राष्ट्रिय कार्यकारिणी की बैठक में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा की आज का विपक्ष ऐसा है जिसके पास नेता, निति, रणनीति तीनो नहीं है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से भारतीय जनता पार्टी द्वारा यह सीधा संदेश दे दिया गया है कि पूरी तरह से कांग्रेस पर निशाना साधा जाएगा और राजनीतिक और रणनीतियों के तौर पर चुनावों में आक्रामक रुख बरकरार रखा जाएगा। इसका उदाहरण भी हमें इसी बैठक में देखने को मिला जब भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर हमलावर रुख अख्तियार करते हुए विशेष रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और देश के वित्त मंत्री और गृह मंत्री रहे पी. चिंदबरम को निशाने पर लिया।

इस मामले में चिंदबरम को विशेष तौर पर इसलिए सामने रखा गया क्योंकि उनकी छवि एक अंग्रेज़ी बोलने वाले और सभ्रांत वर्ग से आने वाले व्यक्ति के रूप में है. इस वर्ग को आमतौर पर मोदी के ख़िलाफ़ समझा जाता है. चिंदबरम की पृष्ठभूमि में ही अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा भी शामिल हो जाते हैं। अमित शाह ने एकबार इस बैठक में सभी को फिर साफ़ कर दिया कि उनकी पार्टी का ट्रंम्प कार्ड पहले और आज भी मोदी और उनका चमत्कारिक नेतृत्व है। पार्टी के नेतृत्व में किसी तरह के बदलाव की क्षणिक आशंकाओं को भी उन्होंने अपने इस बयान के साथ दूर कर दिया।

भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारिणी बैठक में यह भी साफ हो गया कि 2019 के चुनाव में भाजपा के चाणक्य और रणनीतिकार अमित शाह ही रहेंगे। यह साफ संकेत है कि इन चुनावों में भाजपा एक पूरी तरह से तैयार सेना के तौर पर उतरेगी जिसकी कमान मोदी और शाह संभालेंगे। इस दौरान पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों एवं राज्य इकाई के अध्यक्षों की बैठक में ‘‘अजेय भाजपा’’ के नारे को अंगीकार किया गया है। बताया जा रहा है कि पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में ही यह फैसला लिया गया है कि अमित शाह के अध्यक्षीय कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ाया जाएगा। अर्थात अमित शाह की अध्यक्षता में ही भाजपा द्वारा अगला लोकसभा चुनाव लड़ा जाएगा। खबरों के मुताबिक पार्टी संगठन का चुनाव एक साल के लिए टाल दिया जाएगा क्योंकि अमित शाह का कार्यकाल बतौर भाजपा अध्यक्ष जनवरी 2019 में खत्म हो रहा है। ऐसे में आम चुनाव के मद्देनज़र संगठन चुनाव को टाला जाएगा।

पिछले कुछ सालों में मोदी और शाह ने अपने नेतृत्व से पार्टी कैडर को अपनी अजेय छवि का साफ़ संदेश दिया है। यही रणनीति थी जिसके दम पर नरेंद्र मोदी ने साल 2001 से 2014 तक गुजरात में राज किया। आज भी इन दोनों की नजारे आगामी 2019 में फिर करिश्मा करने पर है। दिल्ली में हुई बैठक के साथ अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को इस बात के लिए आश्वस्त किया कि वे विपक्ष की बातों में ना आएं और इतना यकीन रखें कि जीत उनकी ही होगी। कार्यकारिणी के अंतिम दिन शाम को जब मोदी ने बैठक को संबोधित किया तो उन्होंने भी अपने भाषण से पार्टी के अजेय होने के संदेश को ही सबके सामने रखा।

भाजपा की इस बैठक में ‘अजेय भारत और अटल बीजेपी’ यह नारा बहुत-ही ध्यान रखकर गढ़ा गया है जिससे भारत में बीजेपी की पहचान को बताया जा सके। आगामी चुनावों मे इसी नारे के साथ भाजपा फिर जनता के बिच उनका विश्वास जितने जायेगी। गौरतलब है की हर चुनाव में पार्टिया किसी न किसी प्रकार के नारे के साथ जनता के बिच जाती है। इस बार भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के यादो को आगे रखकर उनके सपने की भाजपा पार्टी को दुबारा जितवाने के लिए ऐसा नारा चुना जो न केवल भाजपा के जीत के पूर्ण आत्मविश्वास की भावना को प्रकट करता है बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर इस जीत को समर्पित करता है। इसीलिए इस बार भाजपा का नारा है ‘अजेय भारत और अटल बीजेपी’। यह नारा शाइनिंग इंडिया की तरह नहीं है जिसमें एक तरह का घमंड और अहंकार छिपा हुआ था। ‘अजेय भारत और अटल बीजेपी’ का नारा एक धर्मनिरपेक्ष नारा लगता है जिसमें राष्ट्रीयता का पुट भी छिपा हुआ है साथ ही संघ परिवार की विचारधारा भी देखने को मिलती है।

निश्चित तौर पर यह बैठक पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए एक संदेश था, आने वाले चुनावों से पहले उनमें जोश भरने की एक कोशिश थी। इस बैठक के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि भाजपा देश निर्माण करने वाली पार्टी है। भाजपा और संघ परिवार में होने वाली ट्रेनिंग के बारे में बताया जाना इस बात का सूचक है कि पार्टी अपने कैडर के मन में यह छवि गढ़ने की पूरी कोशिश कर रही है कि देश के निर्माण में भाजपा ही सबसे अहम पार्टी है। लेकिन जो लोग यह सोच रहे हैं कि बीजेपी सिर्फ़ मोदी की उपलब्धियों को गिनाने भर से ही रुक जाएगी, वो दरअसल एक बड़ी चूक कर रहे हैं।

2019 के चुनाव से पहले अपने कार्यकर्ताओं का इस तरह मनोबल बढ़ाना और उनको मानसिक रूप से चुनाव के लिए तैयार करना, एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। अटल बिहारी वाजपेयी की याद के बहाने पूरे देश के कार्यकर्ताओं को एकसाथ जोड़ने का कार्यक्रम चल रहा है। इसके अलावा दूसरा कार्यक्रम लोगों को यह समझाना कि मोदी सरकार और उससे पहले नेहरू-गांधी परिवार के नेतृत्व में चली कांग्रेस सरकार में कितना फर्क है।

भाजपा अपने लाखों कार्यकर्ताओं की सेना के दम पर देश भर में मोदी सरकार की उपलब्धियों को बताने का काम करेगी। जिस तरह से बीजेपी ने अपने संगठन को फैलाया यह उसकी नेतृत्व क्षमता का ही कमाल है मगर नेतृत्व क्षमता की यही कमी आज भी कांग्रेस पार्टी और उसके गठबंधन में नज़र आ रही है। विपक्ष एक साथ होने का दावा तो कर रहा है, मगर कोई राहुल के नेतृत्व में एकसाथ आना नहीं चाहता। ममता बनर्जी इन दिनों विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा है, मायावती में अभी भी मोदी से टक्कर लेने की काबलियत और हौसला है। जबकि राहुल गाँधी पर किसी को यह विश्वास नहीं की वह विपक्ष को मजबूती से संभल सकते है। इसी बात का फायदा भाजपा उठा रही है। वैसे इस बैठक में भाजपा ने सभी पदाधिकारी और नेता आगामी चुनावों में जीत सुनिश्चित करने के लिए मंथन कर रहे हैं और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जीत का मंत्र देने में जुटे हुए हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनावों में जीत के लिए पार्टी नेताओं को जीत का मंत्र दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी राज्यों की रिपोर्टिंग के समय पार्टी नेताओं को विपक्ष के जाल में न फंसने की सलाह दे डाली है। उन्होंने भाजपा नेताओं को जीत का मंत्र देते हुए कहा कि ‘विपक्ष के जाल में न फंसे और अपने ही मुद्दों पर डंटे रहें, जीत अवश्य होगी। ‘पीएम मोदी ने पार्टी नेताओं को जीत का स्पष्ट मंत्र दे दिया है कि उन्हें सिर्फ अपने ही मुद्दों पर डंटे रहना है और विपक्ष के झांसे में आने से बचना है। हालांकि, इससे पहले भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के पहले दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी पार्टी नेताओं को जीत का मंत्र दिया। अमित शाह ने कहा कि अगले सात महीने सिर्फ दो चीजें याद रखें भारत माता और कमल का फूल और यही जीत का मंत्र है। अमित शाह ने कहा ओडिशा और बंगाल में सरकार बनाने का संकल्प लें।

एसएसी-एसटी एक्ट को लेकर हो रहे राजनीतिक उबाल पर भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि इस मुद्दे का 2019 के लोकसभा चुनाव में कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि “एससी/एसटी के मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई, लेकिन इससे 2019 के चुनावों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.” उन्होंने कहा कि जो भी भ्रम फैलाया जा रहा है, इसका डटकर मुक़ाबला किया जाएगा. वैसे इस साल के अंत तक मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने को है। ऐसे में भाजपा पूरा जोर लगा कर चुनाव लड़ने के पूर्व कार्यकर्ताओ को एकजुट और उनमें स्फूर्ति भरने का काम कर रही है। क्यूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह यह खुद जानते है की इस बार चुनाव में भाजपा के समक्ष मुश्किलें काफी है। एक तरफ महंगाई , बढ़ते पेट्रोल और डीजल के भाव , राफेल विवाद , नीरव मोदी मामला , सर बाए खड़ी है। और विपक्ष बड़ी बखूबी इन मुद्दों को उठाकर भाजपा के खिलाफ देश में माहौल बनाना शुरू कर चूका है, जिसका सामना करने के लिए इस बैठक में मंथन तो हुआ ही साथ ही इन मुद्दों से लड़ने की रणनीति भी बनाई गयी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि दो दिन तक चली इस कार्यकारिणी बैठक में आने वाले चुनावी संघर्ष की एक झलक भर दिखी है. अभी तो सांसें रोक कर बैठो अभी तो संघर्ष के क्लाइमैक्स का इंतज़ार बाकी है।

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