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अंबाला की सीट लेगी शैलजा की अग्निपरीक्षा

Hisar Today

आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा को अंबाला से चुनावी मैदान में उतारना तय माना जा रहा है। शैलजा 2 बार सिरसा से व 2 बार अंबाला से कांग्रेस की सांसद रही हैं। हरियाणा में कांग्रेस का दलित चेहरा मानी जाने वाली शैलजा केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रही है व कुछ महीने पहले ही पार्टी आलाकमान ने उन्हें दिसम्बर में राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनावों का प्रभारी नियुक्त किया है। सिरसा से 2 बार सांसद चुने जाने के बाद 2004 में पहली बार उन्होंने अंबाला से लोकसभा का चुनाव लड़ा, इसमें उन्हें 415264 व भाजपा के रतन लाल कटारिया को कुल 180329 वोट मिले थे। 2009 में फिर उनका मुकाबला कटारिया से हुआ और उन्होंने केवल 14500 मतों से कटारिया को शिकस्त दी। 2014 में पार्टी ने पूर्व मुख्यमत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खेमे के राजकुमार बाल्मीकि को यहां से टिकट दिया। भाजपा के रतन लाल कटारिया ने बाल्मीकि को करीब साढ़े 3 लाख वोटों से हरा दिया।

सोनिया गांधी व राहुल गांधी के करीब होने के चलते कुमारी शैलजा को जनवरी 2014 में हरियाणा से राज्य सभा का सदस्य बनाया गया। अगले साल मई में होने वाले लोकसभा चुनावों के समय उनका राज्यसभा का कार्यकाल करीब 6 महीने का बकाया रह जाएगा, इसलिए संसद में पहुंचने के लिए उनका चुनाव लड़ना जरूरी भी होगा। माना जा रहा है कि अंबाला उनकी पहली पसंद होगी। दरअसल, कुमारी शैलजा पिछले 4 सालों से अंबाला से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। राज्यसभा में जाने बाद भी वह नियमित रूप से अंबाला में अपने समर्थकों के बीच बैठकें करने के अलावा इलाके के लोगों के सुख-दु:ख में भी शामिल होती रही है। संसदीय क्षेत्र के सभी 9 हलकों में उन्होंने आने-जाने का सिलसिला भी जारी रखा। अंबाला शहर व अंबाला छावनी में उन्होंने अपने संगठन को काफी मजबूत किया। उनके समर्थक पूर्व विधायक जसबीर मलौर 27 सितम्बर को अम्बाला शहर के हुडा ग्राऊंड में उनकी अगुवाई में एक रैली भी कर रहे हैं जो एक तरह से उनके चुनावी अभियान का श्रीगणेश होगा।

कुमारी शैलजा भी खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार मानती है, शायद यही वजह थी कि हुड्डा से उनकी कभी नहीं बनी। हुड्डा करीब 10 साल हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन एक आध बार छोड़कर उन्होंने हुड्डा से कभी किसी रैली में मंच सांझा नहीं किया। हुड्डा विरोधी नेता अपने राजनीतिक संरक्षण के लिए उनके साथ जुड़ने लगे और हरियाणा कांग्रेस में एक नया मजबूत खेमा बन गया। 2019 में आने वाले लोकसभा चुनावों में एक बार फिर उनका भाजपा से मुकाबला होना है। इनैलो-बसपा गठबंधन भी उनके लिए के बड़ी चुनौती होगा। संसद में पहुंचने के लिए उन्हें 2 फ्रंट पर लड़ाई लड़नी पड़ेगी, जो 2004 व 2009 की तरह आसान नहीं होगा।

अपने तीखे तेवर दिखाने वाली शैलजा इन दिनों मोदी सरकार को भी जमकर आड़े हाथों ले रहीं हैं। कभी राफेल सौदे को लेकर तो कभी महंगाई पर। कुमारी शैलजा पर पार्टी को इतना विश्वास है की राजस्थान विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों की खोजबीन के लिए कांग्रेस ने अहम स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया जिसमें हरियाणा की और राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा को कमेटी के चेयरपर्सन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। शैलजा पहले भी राज्य में कार्यकारी प्रभारी रह चुकी है और पार्टी के दलित नेताओं में उनकी गिनती है। राजस्थान विधानसभा चुनाव के रण में कूदने से पहले कांग्रेस ने तमाम कमेटियों के गठन का सिलसिला शुरु कर दिया है। मजबूत, टिकाऊ और जिताऊ उम्मीदवारों की खोजबीन का काम करने वाली स्क्रीनिंग कमेटी का आलाकमान ने ऐलान कर दिया है। पार्टी ने राज्यसभा सांसद औऱ दलित नेता कुमारी शैलजा को कमेटी का चेयरपर्सन बनाया है। शैलजा हरियाणा की रहने वाली है और पार्टी में कईं अहम पदों में रह चुकी है। साथ ही केन्द्र में मंत्री भी रह चुकी है।

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