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सहानुभूति वोटो के साथ बरवाला से रामनिवास घोड़ेला बढ़त की ओर !

सुरेंद्र पुनिया की खिलाफत से घोड़ेला को अपनी जीत पर भरोसा

अर्चना त्रिपाठी | हिसार टुडे

बरवाला विधानसभा चुनाव इतना रोचक होगा इसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो। आज जहां कुछ दल के प्रत्याशियों की कई गावों में खिलाफत हो रही है,तो कुछ अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रहे है। ऐसे में क्या इस बार सहानुभूति वोटो का भी क्या महत्वपूर्ण फैक्टर इस चुनाव में काम करेगा? वैसे लगता तो यही है क्योंकि बरवाला हलके में इस बार जिस प्रकार से बरवाला में विकास कार्यो की नींव रखने वाले रामनिवास घोड़ेला जो जनता के बीच का नेता माना जाता है। उनकी टिकट कांग्रेस ने काटकर भूपेंद्र गंगवा को देकर बरवाला हलके में कांग्रेस ने अपनी खुद की ही खिलाफत मोड़ ली। भूपेंद्र गंगवा से अधिक लोकप्रिय रामनिवास घोड़ेला के साथ हुए अन्याय के चलते आज बरवाला हलके में लोगो का जबरदस्त सहानुभूति वोट रामनिवास घोड़ेला की तरफ जा रहा है।

बरवाला का हमेशा से यह इतिहास रहा है कि अगर वो जिसे दिल पर बिठा लेता है उसे जीता देता है। इनदिनों रामनिवास घोड़ेला का मानना है कि बरवाला के विकास में उनकी जो महत्वपूर्ण भूमिका रही वह कोई नहीं भुला सकता। क्योंकि उनका मानना है कि जिस प्रकार उनको पार्टी ने धोका दिया है जिसे बरवाला की जनता ने देखा है इसलिए सहानुभूति वोटो के आधार पर वह जीत दर्ज करवाएंगे।

बरवाला ही तय करेगा घोड़ेला के हार जीत का फैसला

इस बार बरवाला में सहानुभूति वोट जमकर राजनीतिक समीकरणों को बिगाड़ने का काम करेंगे। मगर कहा यह भी जाता है कि बरवाला शहर जिसपर मेहरबान हुयी उसकी जीत सुनिश्चित हुयी। एक तरफ भाजपा प्रत्याशी शहरी वोट और पंजाबी वोटो को अपने पाले में लेने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर खुद दौरा कर चुके है, तो रामनिवास घोड़ेला अपने कार्यकाल के दौरान बरवाला के लिए किये गए कार्यो को गिनाते हुए, उनके साथ हुए अन्याय को भी मुख्य मुद्दा बनाकर जनता का सहानुभूति वोट लेने की फिराक में है। वैसे आगरा जातिगत फैक्टर को देखा जाए तो बरवाला, ढ़ाणी, ढाणी प्रेमनगर, प्रेम नगर पूनिया, ढाणी खान बहादूर बहबलपूर, बाडया, खेड़ी बरकी, धिकताना, शिकारपुर, बुडाना, छोटी बड़ी सातरोड़, रायपुर ढाणी, लाडवा, डाबड़ा, राजली में घोड़ेला अपनी बढ़त बढ़ाने में कामयाब होते है तो घोड़ेला के जीत एकतरफा हो जाएगी।

रामनिवास घोड़ेला का राजनितिक सफर

बरवाला विधानसभा क्षेत्र से वर्ष 2009 में विधायक बने रामनिवास घोड़ेला के राजनितिक सफर की बात करे तो रामनिवास घोड़ेला का परिवार सदा से ही कांग्रेस पार्टी के साथ रहा है और इन्होने 20 वर्षो से सच्चा कार्यकर्ता के रूप में काम किया। राजनितिक जीवन में उनकी एंट्री सर्वप्रथम ब्लॉक समिति का चुनाव लड़ कर की। पहला चुनाव मगर हाथ लगी निराशा मगर वह इस निराशा से घबराये नहीं बल्कि इसके बाद इन्होने जिला परिषद् का चुनाव लड़ा। उस चुनाव में भी वो महज कुछ मतों से पराजित हुए। मगर वह हार से घबराये बिना निरंतर कांग्रेस पार्टी की सेवा की। बरवाला शहर के कई विकास कार्य करवाए। और खुद को बरवाला की जनता के साथ जोड़ने में और उनके बीच का नेता बनने में सफलता हासिल की। रामनिवास घोड़ेला अपने प्रतिभा का लोहा बरवाला की जनता को मना चुके थे।

उनकी योग्यता को देखते हुए ही कांग्रेस पार्टी ने 2006 में उनको पिछड़ा वर्ग का अध्यक्ष बनाया और उसके बाद 2009 उनकी काबलियत को देखते हुए उन्हें 2009 में हिसार लोक सभा के उप चुनाव में हिसार का लोकसभा प्रभारी नियुक्त किया गया। इसके बाद 2009 में विधान सभा के चुनाव घोषित हुए I चौधरी भूपेंदर सिंह हुड्डा को अपना राजनैतिक गुरु मानते हुए रामनिवास घोड़ेला ने जितने सामाजिक कार्य किये उसको देखते हुए पार्टी बरवाला हलके से टिकट लेकर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने 10 हज़ार वोट से जीत हासिल की उसके बाद 2013 में वह बैकवर्ड क्लास के चेयरमैन नियुक्त किये गए। हालाँकि इस बार जिस प्रकार से उनकी टिकट पक्की मानी जा रही थी। बावजूद इसके यह सीट पर टिकट वितरण की जिम्मेदारी कांग्रेस ने किसी ख़ास घराने को दी उसके बाद घोड़ेला की टिकट काटकर शहर से अपरिचित भूपेंद्र गगवा की झोली में चली गयी मगर घोड़ेला ने निर्दलीय चुनाव में उतरकर माहौल को बेहद कड़ा बना दिया। आज जिस प्रकार का राजनैतिक माहौल चल रहा है उसे देखकर अगर रामनिवास घोड़ेला को ऐसा जनसमर्थन मिलता रहा तो शायद वह दमदार नेता बनकर साबित होंगे।

पिछले कार्यो का मिल रहा फायदा

बरवाला में 2009 का विधायक बनने के बाद विकास के दिशा में पिछड़े बरवाला शहर अति पिछड़ा था मगर उन्होंने न केवल अपने कार्यकाल के दैरान विभिन्न कार्यो के लिए ग्रांट पारित करवाकर न केवल बरवाला को एक उपमंडल बनवाया और बरवाला में पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज आईटीआई, स्कूल, मदन लाला डिंग़डा पार्क का निर्माण, स्टेडियम के लिए मंजूरी, बायपास के लिए प्रस्ताव पारित करवाने का काम किया। इतना ही नहीं 24 घंटे बिजली उनके कार्यकाल में मिलने से भी आज रामनिवास घोड़ेला की स्थिती मजबूत बनी हुयी है।इतना ही नहीं बरवाला हलके में 350 से ज्यादा उन्होंने सड़के और गलिया पक्की की। बरवाला शहर के हर वार्ड में सभी समुदाय के लोगो की धर्मशालाए चोपाल बनवाई। इसी प्रकार हर गाव में सभी समुदाय के लोगो की धर्मशालाये बनवाई गयी, हर गाव में बुस्टिंग स्टेशन का निर्माण करवाया गया गया, बरवाला शहर के मुख्य मार्ग पर 20 लाख की लागत से दो बड़ी बड़ी मरकरी लाइट लगवाई गयी। इस जैसे काई काम घोड़ेला के पास गिनाने के लिए है।

सुरेंद्र पुनिया की खिलाफत से घोड़ेला को अपनी जीत पर भरोसा

रामनिवास घोड़ेला मानते है कि जिस प्रकार जनता की खिलाफत इस बार भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र पुनिया को झेलनी पड़ी उससे यह तो तय है कि कही न कही इसका लाभ जोगीराम सिहाग और घोड़ेला को हो सकता है। मगर यह सभी जानते है कि भाजपा ने जिस प्रकार सत्ता में न रहने के बाद भी पुनिया ने बरवाला के लिए जो कार्य करवाए, सड़के पक्की करवाई उससे जनता परिचित है , साथ ही मुख्यमंत्री की ईमानदार छवि भी पुनिया को मजबूती दे रही है। ऐसे में देखना है कि अगर शहरी वोट कौन ले पाता है।
चुनावी मुद्दे

खुद पर हुए अन्याय को लेकर सहानुभूति वोट रामनिवास घोड़ेला के पक्ष में जरूर है मगर इस चुनाव में 100 बेड अत्याधुनिक हस्पताल की व्यवस्था, बरवाला के सभी सीवरेज व्यवस्था को दुरुस्त करना , साथ ही सडको और गलियों के कार्यो को मंजूर करवाकर दुबारा से 24 घंटे बिजली बरवाला की जनता को देनेजैसे मुददे के साथ वो आगे बढ़ रहे है।
जजपा सेे मान रहे कांटे की टक्कर

चुनाव में रामनिवास घोड़ेला को अगर कोई टक्कर दे रहा है तो वो है जननायक जनता पार्टी के नेता जोगीराम सिहाग। खुद घोड़ेला भी यह बात मानते है। उनका मानना है कि उनका गेम अगर कोई बिगाड़ सकता है तो वह जजपा है। जजपा के प्रत्याशी रामनिवास घोड़ेला को काफी गावो में सीधे सीधे टक्कर दे रहे है। मगर अगर बरवाला शहर घोड़ेला पर मेहरबान रहा तो पांसा पलट भी सकता है। रामनिवास घोड़ेला मानते है कि वह अपना मुकाबला भाजपा से नहीं बल्कि जजपा प्रत्याशी से मानते है।

 

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