टुडे न्यूज़संपादकीय

तेवर दिखाकर घुटने टेक देने की शिवसेना की आदत

संपादकीय महेश मेहता

 हिसार टुडे

यह शीर्षक पढ़ कर कोई भी बुद्धिजीवी इस बात से इनकार नही कर सकता कि भले ही शिवसेना भाकपा पर छीटाकशी करती हो, मगर सत्ता को हासिल करने के लिए कई बार उन्हें भाजपा के सामने घुटने टेकते भी देखा गया है। इतिहास गवाह है कि इस सत्ता के लोभ में जब जब चुनाव आते है। सभी को पता रहता हैकि अब कुछ दिनों तक शिवसेना-भाजपा के बीच ड्रामा होगा उसके बाद मान मनुव्वल होती है। बैठकों का दौर चलता है और फिर हो जाता हूं ‘भरत मिलाप’।हर चुनाव में यही खेल मगर इस बार शिवसेना ज्यादा आक्रामक खुद को इसलिए दिखा रही है क्योंकि इस बार सवाल है उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे की राजनीति को सेट करना।

यही कारण है कि अचानक हरियाणा में गठजोड़ की सरकार बनने के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना 50-50 पर अड़ गई। शिवसेना कहती है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने की लिए उनके और भाजपा के बीच ढाई- ढाई साल के फॉर्मूला हुआ था। अब उस शर्त को मनाने और लिखित में देने को लेकर शिवसेना अड़ी हुई है वही भाजपा कहती है कि ऐसा कोई समझौता नही हुआ। इतना ही नही खुद दिल्ली से पीएम नरेंद्र मोदी ने भी विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद इस बात की घोषणा कर दी थी कि हरियाणा और महाराष्ट्र में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा। हरियाणा में भाजपा जजपा की मदद से सरकार बनाने में कामयाब रही जबकि महाराष्ट्र अब भी इसका इंतजार कर रहा है।

भाजपा शिवसेना के सामने झुकने को तैयार नही और शिवसेना अदित्य ठाकरे के लिए अपने बात पर अड़ी है। ऐसे में शिवसेना वालो को जब मनमुताबिक नतीजे न मिल रहे हो तो उनका फ्रॉस्टेड होना स्वाभाविक है। हमेशा अपनी दहाड़ के कारण सुर्खियां बटोरने वाले संजय राउत को अब हरियाणा के नेताओ की याद आने लगी है। सामना मे लंबे चौड़े लेख लिखने वाले अगर यह सोचे कि हरियाणा के नेताओ का नाम लेकर वो अपनी राजनीतिक साध लेंगे तो शायद ऐसा सोचना उनकी सबसे बड़ी भील होगी। आज संजय राउत का जब महाराष्ट्र में भाजपा के साथ गेम बिगड़ने लगा है तो उन्होंने टीवी चैनल को दिए एक बयान में कहा कि हमारे पास दुष्यंत जैसा नेता नहीं जिसके पिता जेल में है। शायद संजय राउत अपने उस नेता की करामात भूल चुके है जो घोटालो के कारण जेल की हवा खा चुका है।

घरकुल घोटाले में उनके नेता या यु कहे पूर्व राज्य मंत्री सुरेश जैन को कोर्ट ने 7 साल जेल की सजा सुनाई थी। और तो और उनपर 100 करोड़ का दंड भी लगाया था। उन्हें न्यायलय ने खंडेश्वर बिल्डर को मुनाफा पहुंचाने के आरोप में सजा सुनाई थी। क्या संजय राउत जी आपकी आँखे बंद हो गयी है क्या आपको यह बात पता नहीं या यह यादें आपके जहन में धुंधली पड़ गयी है। या संजय राहत आप अपनी पार्टी का वो स्टैंड भी जरूर भूल गए होंगे जब भाजपा नेता किरीट सोमैया ने आपकी पार्टी को “माफिया राज” करार देते हुए सभी नगरपालिका चुनाव स्वतंत्र तौर लड़ने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि भ्रष्टाचार को ख़त्म करेंगे।, और आखिर में क्या हुआ आपको “माफियाराज” की उपमा देने वाली पार्टी के साथ आप हर चुनाव में हाथ मिला लेते है। यह तो महज कुछ ही उदाहरण बताये है शिवसेना पार्टी के स्टैंड के बारे में। इसलिए इतना मत बौखलाओ कि कोई आपकी सुन नहीं रहा, भाजपा आपको हमेशा की तरह महाराष्ट्र की जनता के सामने शिवसेना को मजबूर दिखाकर बाद में हाथ मिला लेती है। इसलिए यह बौखलाहट को हरियाणा के नेता उपमुख्यमंत्री दुष्यंत पर तंज कसकर भुनाने की कोशिश न करो। शायद आपको पता है आपको दुष्यंत के नाम से आप सुर्खियां बटोर लोगे। मगर आपको यह ज्ञात होना चाहिए कि हरियाणा में दुष्यंत की साफ़ ईमानदार छवि है। जो शायद शिवसेना की रही या नहीं पता नहीं।

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