टुडे न्यूज़संपादकीय

सीएम आदमपुर को भूल जाओ!

संपादकीय महेश मेहता

हिसार टुडे

यह चुनाव कोई साधारण सा चुनाव नहीं यह विधानसभा चुनाव वो चुनाव है जब यहां सीधी जंग मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की बहुत बड़ी भाजपा की फौज से होनी है। यह टक्कर बेहद रोचक तब होगी जब आदमपुर हलके का जिक्र सामने आएगा। दरअसल 2014 में हिसार से जिंदल परिवार का गढ़ तोड़ने के बाद 2019 में भाजपा भजनलाल परिवार का गढ़ आदमपुर को तोड़ने में पूरा जोर लगा रही है। एक तो आदमपुर में मुख्यमंत्री की रैलिया होना, राजनीतिक सभाएं होना, राजनीतिक सभा का आयोजन कुलदीप की दुकान के सामने होना, इस बात का सबुत है कि आदमपुर से कमल खिलाने के लिए मनोहर लाल की भाजपा सरकार कितना आतुर है।

अब हाल की सभा को ही देख लीजिए। जब विधानसभा चुनाव के पहले लगी आचारसहिंता के बाद आदमपुर में भाजपा अपना दम दिखाने के लिए आदमपुर में हाजिर हो गई। यहां आते ही उन्होंने भजनलाल परिवार पर जबरदस्त तरीके से प्रहार करने का काम किया। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने स्वर्गीय भजनलाल का नाम लेकर उनके बेटे और आदमपुर से कांग्रेस के विधायक कुलदीप बिश्नोई पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने भजनलाल को कमेराें का नेता बताया तो बेटे को लुटेरा करार दिया। शायद आपने यह बात गौर की या नहीं मगर आदमपुर में आयोजित कार्यक्रम में अपना दमखम दिखाने के लिए भाजपा ने भाजपा नेताओं की फौज लगा दी थी। उन्हें ऐसा लगा कि भाजपा नेताओं की फेहरिश्त यह दिखाएगी कि भाजपा यहां कमल आराम से खिला सकती है।

इस दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल से लेकर हिसार के सांसद बृजेंद्र सिंह, ओबीसी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष, मेयर गौतम सरदाना, विधायक रणबीर गंगवा, प्रोफेसर छत्रपाल सिंह, विधायक डॉ कमल गुप्ता, कर्ण सिंह राणोलिया बढ़चढ़ कर मौजूद थे। मगर इतने दिग्गज नेताओं के साथ रैली में सुनसान सा दृश्य यह बता रहा था कि रैली आयोजित की तो है, मगर शायद खानापूर्ति के लिए। यह इस बात का संकेत है कि भाजपा के लिए लोकसभा का परफॉर्मन्स आदमपुर से दुबारा दोहराना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। क्योंकि यहां की जनता किसी भी कीमत पर अब किसी हवा या लहर के पीछे शायद ही बहे। इसके पीछे कारण है कुलदीप बिश्नोई।

कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को जब से लोकसभा चुनाव में आदमपुर से हार का सामना करना पड़ा तभी से कुलदीप बिश्नोई परिवार लगातार आदमपुर में अपना डेरा जमाए हुए है। न केवल कुलदीप बिश्नोई, बल्कि उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई और बेटा भव्य बिश्नोई भी कुलदीप बिश्नोई की ताकत को वहां बढ़ाने का काम कर रहा है। मगर क्या ऐसे में यह सोच लिया जाए कि कुलदीप की राह आसान है। जो जवाब रहेगा हां, क्योंकि भाजपा को अब तक कुलदीप को टक्कर देने वाला कोई प्रत्याशी नहीं मिल रहा। हो सकता है ऐसी सूरत में भाजपा बाहरी प्रत्याशी को यहां लाये या किसी नेता को दूसरी पार्टी से भाजपा में ज्वाइनिंग करवाकर टिकट दी जाए। इसलिए यह मान के चलना चाहिए कि लोकसभा की तरह विधानसभा चुनाव के नतीजे की आस में भाजपा को नहीं बैठना चाहिए।

मगर मुख्यमंत्री ने फिर भी हार नहीं मानी। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कुलदीप को राजकुमार कहकर पुकारा। उन्होंनेे कहा कि स्व. भजनलाल के जाने के बाद उनकी संतान ने जनता की सेवा करने की बजाय सिर्फ बेनामी संपति इकट्ठा करने का काम किया। उन्होंने यह भी कहा कि 250 करोड़ की बेनामी संपति, होटल, 35 करोड़ की मूर्तियां मिलने से स्पष्ट है कि वे किस तरह भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। बस यही वो पल था की भीड़ में बैठे कुछ लोग उठ कर हंगामा करने लगे। वैसे इस दृश्य की उम्मीद खुद मुख्यमंत्री को भी थी। हंगामा कर रहे लोगों ने मनोहर लाल के खिलाफ और कुलदीप के पक्ष में नारे लगाए। नारे लगाने वाले समर्थक मांग कर रहे थे कि मुख्यमंत्री यहां अपनी रैली करें, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, मगर भजनलाल और कुलदीप बिश्नोई पर कुछ मत कहें।

जाहिर है जब मामला गरम हो, अच्छा है भाषण जल्दी खत्म करो और निकल जाओ। यही हुआ मुख्यमंत्री वहां से अपनी आवाज बुलंद कर चले गए और युवा नारेबाजी करते रहे। मुख्यमंत्री आये उन्होंने दहाड़ लगाई, मगर शायद इसका असर आदमपुर में वह छोड़ने में कामयाब हुए ? यह कहना मुश्किल है। क्योंकि अब यह वक्त ही बताएगा कि भाजपा आदमपुर की सीट मिशन 75 के अंदर रख रही है या बाहर ?

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