टुडे न्यूज़संपादकीय

भाजपा का ग्राफ गिरा आधे कैबिनेट मंत्री हार के कगार पर

संपादकीय महेश मेहता

हिसार टुडे

जब हरियाणा का चुनाव हो और यहां हरियाणा के मुद्दों पर नहीं बल्कि कश्मीर में अनुछेद 370 के नाम पर वोट मांगने में लगे हुए इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा को जीत की कितनी भूख है। आज हालत लोकसभा की तुलना में बेहद अलग है। क्योंकि सभी राजनीतिक दल समझ चुके है कि भाजपा हमेशा देशभक्ति के नाम पर वोट मांगने का काम करती है और इस बार भी यही होता दिखाई दे रहा है। सूत्र बताते है कि भारतीय जनता पार्टी लोकसभा की तरह जिस धमाकेदार प्रदर्शन की उम्मीद कर रही थी। वह उनके लिए मायूसी में तब्दील होते जा रहे है। क्योंकि सूत्र बताते है कि इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। न उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी के सभाओ से फायदा हो रहा है न ही अभिनेता मंडलियों के आने से।

भाजपा की नौबत आज इतनी खराब हो चुकी है कि माना जा रहा है कि आज उनके आधे दर्जन कैबिनेट मंत्रियो की हार के कगार पर आ चुके है। समस्या इतनी विकत होती जा रही है कि खुद जजपा के नेता ने टीवी पर इस बात का खुलासा किया था कि नारनौंद में कैप्टन अभिमन्यु और टोहाना में सुभाष बराला की ख़राब रिपोर्ट को देखने के बाद ही गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी सभाये रद्द की थी। वैसे हकीकत राम जाने।

वैसे सूत्र यह भी बताते है की हरियाणा विधानसभा में ऐसी 10 से 15 सीट है जहां भाजपा तीसरे क्रमांक पर भी आ सकती है। माना जा रहा है कि ग्राउंड रिपोर्ट देंखे तो भाजपा का मिशन 75 का सपना महज सपना ही बनकर रह जायेगा क्योंकि आकलन बताते है कि भाजपा 45 से 50 सीटों पर सिमट जाए. बशर्त है E…… का खेल न हो तो। इतना ही नहीं आकलन यह भी है कि पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा का वोटिंग शेयर गिरेगा। आकलन बताते है कि भाजपा को 33 से 37 % वोट शेयर हो सकता है , जबकि कांग्रेस का ग्राफ बढ़ने की उम्मीद तो है ही साथ ही जजपा भी भाजपा को पसीने छोड़ रहे है।

ग्राउंड रिपोर्ट यह कहती है कि आज जिस प्रकार से भाजपा पारदर्शिता की दलीले देती है जबकि वास्तविकता यह है कि भाजपा के राज में भी पपएर लीक होने की घटनाएं सामने आयी है। एसडीओ की भर्ती प्रक्रिया रद्द होने, पेपर लीक गिरह का पर्दाफाश होना इस बात का सबूत है कि भाजपा के राज में स्थिती ज्यों की त्यों बनी हुयी है।

इस बार विधानसभा चुनाव में भाजपा के सभी प्रत्याशियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओ से अपेक्षा थी। मगर पीएम ने आकर हरियाणा नहीं बल्कि कश्मीर के मुद्दे पर अपने भाषण का आधा समय लिया जिसकी खीज लोगो में दिखाई दी। इतना ही नहीं जिस आसाम में एनआरसी का मुद्दा विवादों में घिरा हुआ है , आसाम के मंत्रियो का मानना है कि सूची से स्थानिको को हटाकर विदेशियों को स्थान दिया गया है। उससे एनआरसी का मुद्दा विवादों में भरा हुआ है। अब तक यह प्रयास सफल नहीं हुआ बावजूद इसके मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पीएम नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे को उठाकर लोगो को चिंता में जरूर डाल दिया है। जनता का मानना है कि मनोहर लाल के कार्यो पर वोट मांगने की जगह कश्मीर के मुद्दे पर भाजपा वोट मांग रही है। मगर यह जगजाहिर है कि इस बार जनता समझ चुकी है। इसी वजह से माना जा रहा है कि भाजपा का ग्राफ गिर रहा है और जजपा वह कांग्रेस का ग्राफ उठ रहा है। यानि सीधे लब्जो में कहे तो त्रिकोणीय मुकाबला।

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